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कोचिंग संस्थाओं से हटाएं पुराने तार, एमसीवी लगवाएं
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बरेली। सूरत में हुई अग्निकांड की बड़ी घटना के बाद अमर उजाला नेे स्थानीय कोचिंग संस्थाओं में सुरक्षा की बदहाली का खुलासा किया था। इसको लेकर गुरुवार को पुलिस लाइन सभागार में एडीजी ने कोचिंग संचालकों के साथ बैठक कर अग्निकांड में सुरक्षा संबंधी टिप्स दिए। कहा, थोड़ी सतर्कता से ही हादसे से बचा जा सकता है। एसएसपी, एसपी सिटी समेत अन्य अधिकारियों ने भी आग लगने से बचाने के उपाय सुझाए।
एडीजी अविनाश चंद्र ने कहा, आग लगने के शुरुआती दो या तीन मिनट की सावधानी ही तय करती है कि हादसा कितना बड़ा होगा। अगर पहले से कुछ इंतजाम कर लिए जाएं तो हादसा नहीं होगा, अगर होगा भी तो तत्काल काबू हो जाएगा। बताया कि शार्टसर्किट से ही कई बार आग लगती है। मामूली खर्च से पुराने वायर बदलवा सकते हैं। स्मॉग सेंसर लगा होगा तो धुआं घुटने से पहले निकलने का रास्ता खोजा जा सकेगा। एमसीवी भी लगवाई जाए जिससे फॉल्ट होने पर बिजली सप्लाई बंद हो सके। बताया, सूरत की घटना में निकलने का रास्ता न होने पर बच्चे छत से कूदे थे। ऐसा न हो, इसलिए छतों पर बांस की सीढ़ियां रखवाएं। दमकल के आने जाने का भी रास्ता होना चाहिए। कोचिंग संचालकों ने इन नियमों का पालन करने की हामी भरी। एफएसओ ने भी अग्निसुरक्षा मानक पूरे करने की अपील की।
गुलमेाहर पार्क आवासीय कालोनी के कोचिंग संस्थानों की शिकायत
कुछ अभिभावक भी बैठक में पहुंचे। उन्होंने बताया कि राजेंद्रनगर की गुलमोहर पार्क आवासीय कालोनी में रिहायशी नक्शे पास कराकर कोचिंग खोली गई हैं। दो मंजिल पर परिवार रहते हैं और तीसरी-चौथी मंजिल पर छात्र-छात्राएं पढ़ाए जाते हैं। कोचिंग वाले भवनों में अग्निशमन यंत्र भी नहीं हैं। कोचिंग में आने वाली छात्राओं से शोहदे छेड़छाड़ भी करते हैं। कई बार 100 डायल पुलिस भी बुलाई जा चुकी है।
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एडीजी अविनाश चंद्र ने कहा, आग लगने के शुरुआती दो या तीन मिनट की सावधानी ही तय करती है कि हादसा कितना बड़ा होगा। अगर पहले से कुछ इंतजाम कर लिए जाएं तो हादसा नहीं होगा, अगर होगा भी तो तत्काल काबू हो जाएगा। बताया कि शार्टसर्किट से ही कई बार आग लगती है। मामूली खर्च से पुराने वायर बदलवा सकते हैं। स्मॉग सेंसर लगा होगा तो धुआं घुटने से पहले निकलने का रास्ता खोजा जा सकेगा। एमसीवी भी लगवाई जाए जिससे फॉल्ट होने पर बिजली सप्लाई बंद हो सके। बताया, सूरत की घटना में निकलने का रास्ता न होने पर बच्चे छत से कूदे थे। ऐसा न हो, इसलिए छतों पर बांस की सीढ़ियां रखवाएं। दमकल के आने जाने का भी रास्ता होना चाहिए। कोचिंग संचालकों ने इन नियमों का पालन करने की हामी भरी। एफएसओ ने भी अग्निसुरक्षा मानक पूरे करने की अपील की।
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गुलमेाहर पार्क आवासीय कालोनी के कोचिंग संस्थानों की शिकायत
कुछ अभिभावक भी बैठक में पहुंचे। उन्होंने बताया कि राजेंद्रनगर की गुलमोहर पार्क आवासीय कालोनी में रिहायशी नक्शे पास कराकर कोचिंग खोली गई हैं। दो मंजिल पर परिवार रहते हैं और तीसरी-चौथी मंजिल पर छात्र-छात्राएं पढ़ाए जाते हैं। कोचिंग वाले भवनों में अग्निशमन यंत्र भी नहीं हैं। कोचिंग में आने वाली छात्राओं से शोहदे छेड़छाड़ भी करते हैं। कई बार 100 डायल पुलिस भी बुलाई जा चुकी है।
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