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सत्संग से पुण्य प्रभाव का होता है उदय
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बरेली। आनंद आश्रम में चल रही नौ दिवसीय कथा के अंतर्गत बृहस्पतिवार को बनारस से आए पं. आशीष मिश्र ने श्रीराम-वाल्मीकि मिलन की कथा सुनाई।
बताया कि श्री रामचंद्र वन गमन के दौरान अगस्त्य मुनि के आश्रम पर पहुंचे। वहां वाल्मीकि महाराज के यहां जाने का रास्ता पूछा तो उन्होंने चार शिष्यों को लगाया जो कि चार वेद स्वरूप थे। जिन्हें वापस कर श्री राम वाल्मीकि जी से मिले। श्री राम ने संत के दर्शन होने और सत्संग को सर्वोपरि बताते हुए पुण्य उदय होने की बात कही। आखिर में श्री राम का गुणगान कर कथा का विश्राम हुआ। इस दौरान आश्रम प्रबंध समिति के सर्वेश, रजनीश अग्रवाल, महेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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बताया कि श्री रामचंद्र वन गमन के दौरान अगस्त्य मुनि के आश्रम पर पहुंचे। वहां वाल्मीकि महाराज के यहां जाने का रास्ता पूछा तो उन्होंने चार शिष्यों को लगाया जो कि चार वेद स्वरूप थे। जिन्हें वापस कर श्री राम वाल्मीकि जी से मिले। श्री राम ने संत के दर्शन होने और सत्संग को सर्वोपरि बताते हुए पुण्य उदय होने की बात कही। आखिर में श्री राम का गुणगान कर कथा का विश्राम हुआ। इस दौरान आश्रम प्रबंध समिति के सर्वेश, रजनीश अग्रवाल, महेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे। ब्यूरो