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नाला सफाई के टेंडर मेयर ने किया निरस्त
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बरेली। नगर निगम में मेयर उमेश गौतम और नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. के बीच घमासान और तेज होने के आसार बनने लगे हैं। चुनाव आचार संहिता निष्प्रभावी होते ही मेयर आक्रामक हो गए हैं। सोमवार को उन्होंने नालों की सफाई के लिए शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश ही जारी नहीं किया बल्कि इस प्रक्रिया में नियम-कायदों का पालन न किए जाने की टिप्पणी करते हुए इसमें भ्रष्टाचार होने की आशंका भी जता दी। इससे पहले आचार संहिता लागू रहने के दौरान नगर निगम की कमान जब पूरी तरह नगर आयुक्त के हाथों में थी, तब दो ही दिन पहले कई पार्षदों ने भी अपने वार्डों में सफाईकर्मियों की तैनाती में भी भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया था।
नगर आयुक्त की तैनाती के फौरन बाद मेयर के साथ उनके संबंध बिगड़ गए थे। शुरुआत नगर आयुक्त की ओर से शहर में सफाई व्यवस्था के लिए बजट बैठक में दस करोड़ का बजट आवंटित करने का प्रस्ताव रखने के साथ हुई जिसे मेयर ने खारिज कर दिया था। इसके बाद बाकरगंज के मिनी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर भी दोनों आमने-सामने आए। इसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ा तो दोनों तरफ से तीखे बयान भी आने लगे। लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने के बाद भी नगर आयुक्त के कई फैसलों ने मेयर को विचलित किया। अब आचार संहिता खत्म होते ही मेयर ने आक्रामक रुख अख्त्यिार कर लिया है।
सोमवार को मेयर ने चौथे चरण में 23 नालों की सफाई के टेंडर की फाइल को स्वीकृति देने के बजाय प्रक्रिया ही निरस्त कर दी। पिछले दिनों पार्षदों ने नाला सफाई अभियन में ‘खेल’ का आरोप लगाया था। मेयर ने इससे पहले नगर आयुक्त को पत्र लिखा था कि नाला सफाई अभियान में पार्षदों के सत्यापन के बाद ही ठेकेदारों का भुगतान किया जाए। कहा जा रहा है कि मेयर का यह पत्र नगर आयुक्त ने नजरंदाज कर दिया जिसके बाद पार्षदों ने भी अभियान पर सवाल खड़ा कर दिया। पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन पर नाला सफाई में लगे निजी कर्मचारियों की संख्या और उनके कार्यस्थल की जानकारी न देने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद बाद पार्षदों ने निजी कर्मचारियों की फर्जी सूची बनाकर निगम कर्मचारियों से सफाई कराने का आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार की आशंका जताई।
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अफसरों की मनमानी नहीं चलने देंगे
नगर आयुक्त ने 23 नालों की सफाई के लिए स्वीकृति मांगी थी मगर टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न न कराए जाने की वजह से फाइल को रोककर टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। नगर निगम के अफसरों ने नियम-कायदों की अनदेखी कर मनमानी की है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और जलकल महाप्रबंधक को नोटिस भी जारी होंगे। - उमेश गौतम, मेयर
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नगर आयुक्त की तैनाती के फौरन बाद मेयर के साथ उनके संबंध बिगड़ गए थे। शुरुआत नगर आयुक्त की ओर से शहर में सफाई व्यवस्था के लिए बजट बैठक में दस करोड़ का बजट आवंटित करने का प्रस्ताव रखने के साथ हुई जिसे मेयर ने खारिज कर दिया था। इसके बाद बाकरगंज के मिनी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर भी दोनों आमने-सामने आए। इसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ा तो दोनों तरफ से तीखे बयान भी आने लगे। लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने के बाद भी नगर आयुक्त के कई फैसलों ने मेयर को विचलित किया। अब आचार संहिता खत्म होते ही मेयर ने आक्रामक रुख अख्त्यिार कर लिया है।
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सोमवार को मेयर ने चौथे चरण में 23 नालों की सफाई के टेंडर की फाइल को स्वीकृति देने के बजाय प्रक्रिया ही निरस्त कर दी। पिछले दिनों पार्षदों ने नाला सफाई अभियन में ‘खेल’ का आरोप लगाया था। मेयर ने इससे पहले नगर आयुक्त को पत्र लिखा था कि नाला सफाई अभियान में पार्षदों के सत्यापन के बाद ही ठेकेदारों का भुगतान किया जाए। कहा जा रहा है कि मेयर का यह पत्र नगर आयुक्त ने नजरंदाज कर दिया जिसके बाद पार्षदों ने भी अभियान पर सवाल खड़ा कर दिया। पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन पर नाला सफाई में लगे निजी कर्मचारियों की संख्या और उनके कार्यस्थल की जानकारी न देने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद बाद पार्षदों ने निजी कर्मचारियों की फर्जी सूची बनाकर निगम कर्मचारियों से सफाई कराने का आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार की आशंका जताई।
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अफसरों की मनमानी नहीं चलने देंगे
नगर आयुक्त ने 23 नालों की सफाई के लिए स्वीकृति मांगी थी मगर टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न न कराए जाने की वजह से फाइल को रोककर टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। नगर निगम के अफसरों ने नियम-कायदों की अनदेखी कर मनमानी की है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और जलकल महाप्रबंधक को नोटिस भी जारी होंगे। - उमेश गौतम, मेयर