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नेताजी की पार्टी की साख अखिलेश के हाथों चौपट
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बरेली। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रांतीय मुख्य महासचिव और पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव ने कहा कि लोकसभा चुनाव में विपक्ष की हार स्तब्ध करने वाली है। भाजपा इस चुनाव में धर्म के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण करने में सफल रही। कांग्रेस, सपा और बसपा उसे प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने से नहीं रोक पाए। खासतौर पर सपा तो उत्तर प्रदेश में एक तरह से साफ हो गई। इस हार के बाद सभी समाजवादियों को एकजुट होकर इस पर मंथन करने की जरूरत है।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि नेताजी मुलायम सिंह यादव और उनके साथियों ने कड़ा संघर्ष करके जिस समाजवादी पार्टी को ऊंचाइयों तक पहुंचाया था, उसकी साख अब खतरे में है। बसपा से गठबंधन के बाद भी सपा मात्र पांच सीटें ही जीत सकी। सपा के वोट बैंक में भी गिरावट आई और सैफई परिवार के कई नेता तक चुनाव हार गए। बसपा से गठबंधन करने के बाद जब सपा का लोकसभा चुनाव में यह हाल हुआ तो यह सोचने वाली बात है कि भविष्य में अगर मायावती ने गठबंधन नहीं किया तो सपा कहां पर ठहरेगी। वीरपाल सिंह ने कहा कि अगर समाजवादियों में ऐसे ही आपसी फूट रही तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए सभी बड़े नेताओं को अपनी जिद छोड़कर एकजुट होकर संगठन को नए सिरे से खड़ा करना चाहिए।
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अमर उजाला से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि नेताजी मुलायम सिंह यादव और उनके साथियों ने कड़ा संघर्ष करके जिस समाजवादी पार्टी को ऊंचाइयों तक पहुंचाया था, उसकी साख अब खतरे में है। बसपा से गठबंधन के बाद भी सपा मात्र पांच सीटें ही जीत सकी। सपा के वोट बैंक में भी गिरावट आई और सैफई परिवार के कई नेता तक चुनाव हार गए। बसपा से गठबंधन करने के बाद जब सपा का लोकसभा चुनाव में यह हाल हुआ तो यह सोचने वाली बात है कि भविष्य में अगर मायावती ने गठबंधन नहीं किया तो सपा कहां पर ठहरेगी। वीरपाल सिंह ने कहा कि अगर समाजवादियों में ऐसे ही आपसी फूट रही तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए सभी बड़े नेताओं को अपनी जिद छोड़कर एकजुट होकर संगठन को नए सिरे से खड़ा करना चाहिए।
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