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टीबी-डायरिया रोगियों को अस्पताल में ही संक्रमण का खतरा
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बरेली। जिला अस्पताल के टीबी और डायरिया वार्ड में भर्ती मरीजों को अस्पताल में ही संक्रमण का खतरा है। वार्ड के गेट से लेकर प्रांगण तक में गंदगी ही गंदगी नजर आती है। कहीं सीवर के गंदे पानी में मच्छर पनप रहे हैं तो कहीं कूड़े का ढेर लगा हुआ है।
जिला अस्पताल के पुराने भवन में टीबी-डायरिया वार्ड है। टीबी वार्ड में 18 और डायरिया वार्ड में 12 बेड हैं। यहां लगभग हर दिन ही बेड से ज्यादा मरीज भर्ती रहते हैं। रविवार को भी टीबी वार्ड में 18 बेड पर 20 मरीज भर्ती थे। बेड कम होने के चलते दिन में तो मरीज टहलते रहते हैं, लेकिन रात में सोने को परेशान होते हैं। इसके चलते कई बार तो मरीजों को वहां पड़ी मेज पर ही रात गुजारनी पड़ती है। कमोवेश यही स्थिति डायरिया वार्ड की है। रविवार को यहां कई बेड खाली दिखे लेकिन कागजों में 20 मरीज भर्ती थे। स्टाफ नर्स ने बताया कि ड्रिप लगने के बाद कुछ मरीज टहलने चले गए हैं। वार्ड के गेट पर ही पान-गुटका की पीक और भोजन के अवशेष पड़े थे। सीवर का गंदा पानी भी चारों तरफ फैला मिला। स्टाफ नर्स ने बताया, सीवर सही कराने के लिए कई बार सीएम को लिखकर दे चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने भी स्वीकार किया कि टीबी-डायरिया वार्ड के बाहर गंदे पानी के जमा रहने से मरीजों और तीमारदार परेशान होते हैं। बताया, सीवर लाइन ठीक कराने के लिए नगर निगम को पत्र लिखा गया है। वहां से जल्दी ही समाधान का आश्वासन मिला है।
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जिला अस्पताल के पुराने भवन में टीबी-डायरिया वार्ड है। टीबी वार्ड में 18 और डायरिया वार्ड में 12 बेड हैं। यहां लगभग हर दिन ही बेड से ज्यादा मरीज भर्ती रहते हैं। रविवार को भी टीबी वार्ड में 18 बेड पर 20 मरीज भर्ती थे। बेड कम होने के चलते दिन में तो मरीज टहलते रहते हैं, लेकिन रात में सोने को परेशान होते हैं। इसके चलते कई बार तो मरीजों को वहां पड़ी मेज पर ही रात गुजारनी पड़ती है। कमोवेश यही स्थिति डायरिया वार्ड की है। रविवार को यहां कई बेड खाली दिखे लेकिन कागजों में 20 मरीज भर्ती थे। स्टाफ नर्स ने बताया कि ड्रिप लगने के बाद कुछ मरीज टहलने चले गए हैं। वार्ड के गेट पर ही पान-गुटका की पीक और भोजन के अवशेष पड़े थे। सीवर का गंदा पानी भी चारों तरफ फैला मिला। स्टाफ नर्स ने बताया, सीवर सही कराने के लिए कई बार सीएम को लिखकर दे चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने भी स्वीकार किया कि टीबी-डायरिया वार्ड के बाहर गंदे पानी के जमा रहने से मरीजों और तीमारदार परेशान होते हैं। बताया, सीवर लाइन ठीक कराने के लिए नगर निगम को पत्र लिखा गया है। वहां से जल्दी ही समाधान का आश्वासन मिला है।
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