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मंत्री जी के गांव से निकली सड़क का काम भी हो गया बंद
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बरेली। पीडब्ल्यूडी को मार्च से शासन से रकम न मिलने के कारण तमाम सड़क परियोजनाएं ठप हो गई हैं। इसमें सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के गांव गुलड़िया से होकर बन रही रम्पुरा-अलीगंज का काम भी बंद हो गया है। यही हाल तमाम दूसरी सड़कों का भी है। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों का कहना है कि सर्दी में कोलतार सही से नहीं चिपकता। बारिश में भी डामर रोड नहीं बनाई जा सकती। गर्मी का यह सीजन काफी बेहतर है लेकिन लंबे समय से बजट न मिलने के कारण विभागीय स्टाफ हाथ पर हाथ धरे बैठे हुआ है। अब आचार संहिता समाप्त होने के बाद ही धनराशि जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
रम्पुरा से अलीगंज तक करीब 14 किलोमीटर लंबी सड़क सिंचाई मंत्री के गांव गुलड़िया से होकर निकलती है। मंत्री जी ने करीब 14 करोड़ की इस सड़क को पास कराने में खास दिलचस्पी दिखाई। शासन ने करीब छह माह पहले इसे पास तो कर दिया लेकिन बजट के नाम पर केवल चार करोड़ रुपये ही जारी किए गए। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार पर दबाव बनाकर कुछ उधार में भी काम कराया गया लेकिन पेमेंट न होने से ये काम बंद हो गया है। इसी तरह, बहेड़ी-भिटौरा रोड को मंजूर हुए करीब तीन साल बीत गए हैं। 80 करोड़ के मंजूर हुए इस प्रोजेक्ट के लिए 80 प्रतिशत तो काम पूरा हो गया लेकिन दस करोड़ का पेमेंट बाकी रहने से रोड का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इन दिनों यहां भी काम बंद है। बहेड़ी-शीशगढ़ रोड भी करीब तीन साल पहले मंजूर हुआ था, इस पर करीब 38 करोड़ खर्च होना था। इसका भी छह करोड़ आना शेष है। मार्च के बाद से शासन ने भुगतान करने की सुध नहीं ली तो ठेकेदार ने भी इस काम को पूरा करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। करीब 22 करोड़ की पास हुई फरीदपुर से बीसलपुर सड़क के काम पर भी ब्रेक लग गया है। चार माह बीत गए हैं और सिर्फ एक करोड़ रुपये ही मिला है। बरेली-बीसलपुर रोड के बरेली जिले में पड़ने वाले हिस्से के लिए 3.30 करोड़ रुपये से रिन्यूवल का काम होना है। इस काम के लिए केवल 70 लाख ही मिले हें। सेमीखेड़ा बसधरन मार्ग को बनाने के लिए 12 करोड़ की जरूरत है। इसके लिए भी सिर्फ 7.50 करोड़ ही मिला है। इस कारण इसका सिर्फ 50 फीसदी काम ही हो सका है।
मंडनपुर रोड का काम भी लटका
टेंडर प्रक्रिया के दौरान ही काफी विवादित रहे प्रांतीय खंड से मंजूर 22 करोड़ के मंडनपुर-बहेड़ी रोड का काम भी बीच में अटक गया है। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों का कहना है कि इस रोड को पास हुए करीब छह माह बीत गए हैं लेकिन केवल चार करोड़ रुपये ही आए हैं। इससे इसका काम भी आगे नहीं बढ़ाया जा पा रहा है।
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मार्च से ही सड़कों के काम के लिए बजट नहीं मिला है। इसलिए उनका निर्माण या तो बंद हैं या वे बहुत धीमी गति से कराए जा पा रहे हैं।
- हरबंश सिंह, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी
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रम्पुरा से अलीगंज तक करीब 14 किलोमीटर लंबी सड़क सिंचाई मंत्री के गांव गुलड़िया से होकर निकलती है। मंत्री जी ने करीब 14 करोड़ की इस सड़क को पास कराने में खास दिलचस्पी दिखाई। शासन ने करीब छह माह पहले इसे पास तो कर दिया लेकिन बजट के नाम पर केवल चार करोड़ रुपये ही जारी किए गए। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार पर दबाव बनाकर कुछ उधार में भी काम कराया गया लेकिन पेमेंट न होने से ये काम बंद हो गया है। इसी तरह, बहेड़ी-भिटौरा रोड को मंजूर हुए करीब तीन साल बीत गए हैं। 80 करोड़ के मंजूर हुए इस प्रोजेक्ट के लिए 80 प्रतिशत तो काम पूरा हो गया लेकिन दस करोड़ का पेमेंट बाकी रहने से रोड का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इन दिनों यहां भी काम बंद है। बहेड़ी-शीशगढ़ रोड भी करीब तीन साल पहले मंजूर हुआ था, इस पर करीब 38 करोड़ खर्च होना था। इसका भी छह करोड़ आना शेष है। मार्च के बाद से शासन ने भुगतान करने की सुध नहीं ली तो ठेकेदार ने भी इस काम को पूरा करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। करीब 22 करोड़ की पास हुई फरीदपुर से बीसलपुर सड़क के काम पर भी ब्रेक लग गया है। चार माह बीत गए हैं और सिर्फ एक करोड़ रुपये ही मिला है। बरेली-बीसलपुर रोड के बरेली जिले में पड़ने वाले हिस्से के लिए 3.30 करोड़ रुपये से रिन्यूवल का काम होना है। इस काम के लिए केवल 70 लाख ही मिले हें। सेमीखेड़ा बसधरन मार्ग को बनाने के लिए 12 करोड़ की जरूरत है। इसके लिए भी सिर्फ 7.50 करोड़ ही मिला है। इस कारण इसका सिर्फ 50 फीसदी काम ही हो सका है।
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मंडनपुर रोड का काम भी लटका
टेंडर प्रक्रिया के दौरान ही काफी विवादित रहे प्रांतीय खंड से मंजूर 22 करोड़ के मंडनपुर-बहेड़ी रोड का काम भी बीच में अटक गया है। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों का कहना है कि इस रोड को पास हुए करीब छह माह बीत गए हैं लेकिन केवल चार करोड़ रुपये ही आए हैं। इससे इसका काम भी आगे नहीं बढ़ाया जा पा रहा है।
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मार्च से ही सड़कों के काम के लिए बजट नहीं मिला है। इसलिए उनका निर्माण या तो बंद हैं या वे बहुत धीमी गति से कराए जा पा रहे हैं।
- हरबंश सिंह, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी