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बारिश की लेटलतीफी से कम हो सकता है गेहूं का उत्पादन
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बरेली। जनवरी का दूसरा सप्ताह भी बगैर बारिश के निकल जाने से कृषि और मौसम विशेषज्ञ चिंता में हैं। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में भी बारिश होने के आसार न के बराबर हैं। एकाध दिन आसमान में बादल जरूर छाये रह सकते हैं, कोहरा भी पड़ेगा। बारिश न होने की वजह से ही जो तेज हवाएं फरवरी में चलती हैं, वह इस बार जनवरी में ही चलनी शुरू हो गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में अगर जल्द बदलाव न हुआ तो गेहूं की फसल को इस भारी नुकसान पहुंचेगा।
मौसम के बदले मिजाज की वजह से सोमवार को अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा। अधिकतम तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम 7.2 डिग्री रिकार्ड किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दो सप्ताह में कुछ ही दिन न्यूनतम तापमान 4.0 डिग्री सेल्सियस से नीचे आया। अधिकतम तापमान भी दो या तीन दिन छोड़कर 20.0 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चल रहा है। सर्दी और बारिश की यह कमी गेहूं के उत्पादन पर असर डाल सकती है। इस समय गेहूं की कोपलें निकल रही हैं। ठंड, बारिश और कोहरा न पड़ने से उसके उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत गिरावट आ सकती है।
मौसम वैज्ञानिक डा. एचएस कुशवाहा के अनुसार अभी चार-पांच दिन तक बारिश के आसार नहीं हैं। 15 से 18 जनवरी तक हल्का मध्यम कोहरा पड़ेगा। 19 जनवरी से कोहरे की मात्रा बढ़ सकती है। पहाड़ों पर बर्फबारी होने से बरेली समेत आस-पास के इलाकों में धूप में भी बर्फीली हवाएं ठंड का अहसास दिलाएंगी। तय समय से 20 दिन पहले से हवा चलने से भी गेहूं की फसल को नुकसान है।
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गेहूं की लागत बढ़ेगी, उत्पादन पर असर
जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि इस समय गेहूं में किल्ले फूट रहे हैं। अगर 15 दिन बारिश नहीं हुई तो किल्लों की मात्रा में कमी आएगी। इससे गेहूं के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। डीएओ के अनुसार इस बार मौसम 20 दिन लेट चल रहा है। हो सकता है कि आगे चलकर बारिश हो। मगर, अभी ठंड भी गेहूं की जरूरत के अनुसार नहीं पड़ रही है। जनवरी के दूसरे हफ्ते में 3.0 से 5.0 डिग्री सेल्सियस के बीच में तापमान होना चाहिए। मगर, यह 7.0 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चल रहा है। अभी तक पाला भी नहीं पड़ा है। कोहरे की मात्रा भी कम है। हवा में नमी की मात्रा बढ़ने और बेमौसम हवा चलने से गेहूं का उत्पादन कम हो सकता है। बारिश न होने पर किसानों को कम से कम एक से दो सिंचाई अतिरिक्त देनी पड़ेंगी। अभी भी 10 से 15 दिन में बारिश होने पर चीजें ठीक हो सकती हैं।
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मौसम के बदले मिजाज की वजह से सोमवार को अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा। अधिकतम तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम 7.2 डिग्री रिकार्ड किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दो सप्ताह में कुछ ही दिन न्यूनतम तापमान 4.0 डिग्री सेल्सियस से नीचे आया। अधिकतम तापमान भी दो या तीन दिन छोड़कर 20.0 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चल रहा है। सर्दी और बारिश की यह कमी गेहूं के उत्पादन पर असर डाल सकती है। इस समय गेहूं की कोपलें निकल रही हैं। ठंड, बारिश और कोहरा न पड़ने से उसके उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत गिरावट आ सकती है।
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मौसम वैज्ञानिक डा. एचएस कुशवाहा के अनुसार अभी चार-पांच दिन तक बारिश के आसार नहीं हैं। 15 से 18 जनवरी तक हल्का मध्यम कोहरा पड़ेगा। 19 जनवरी से कोहरे की मात्रा बढ़ सकती है। पहाड़ों पर बर्फबारी होने से बरेली समेत आस-पास के इलाकों में धूप में भी बर्फीली हवाएं ठंड का अहसास दिलाएंगी। तय समय से 20 दिन पहले से हवा चलने से भी गेहूं की फसल को नुकसान है।
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गेहूं की लागत बढ़ेगी, उत्पादन पर असर
जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि इस समय गेहूं में किल्ले फूट रहे हैं। अगर 15 दिन बारिश नहीं हुई तो किल्लों की मात्रा में कमी आएगी। इससे गेहूं के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। डीएओ के अनुसार इस बार मौसम 20 दिन लेट चल रहा है। हो सकता है कि आगे चलकर बारिश हो। मगर, अभी ठंड भी गेहूं की जरूरत के अनुसार नहीं पड़ रही है। जनवरी के दूसरे हफ्ते में 3.0 से 5.0 डिग्री सेल्सियस के बीच में तापमान होना चाहिए। मगर, यह 7.0 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चल रहा है। अभी तक पाला भी नहीं पड़ा है। कोहरे की मात्रा भी कम है। हवा में नमी की मात्रा बढ़ने और बेमौसम हवा चलने से गेहूं का उत्पादन कम हो सकता है। बारिश न होने पर किसानों को कम से कम एक से दो सिंचाई अतिरिक्त देनी पड़ेंगी। अभी भी 10 से 15 दिन में बारिश होने पर चीजें ठीक हो सकती हैं।