फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   यानी चावल न गरीबों के पेट में जा रहा न चूहों के...

यानी चावल न गरीबों के पेट में जा रहा न चूहों के...

Fri, 09 Nov 2018 12:52 AM IST
Updated Fri, 09 Nov 2018 12:52 AM IST
विज्ञापन
यानी चावल न गरीबों के पेट में जा रहा न चूहों के...
बरेली। सरकारी धान खरीद से लेकर उसकी राइस मिलों से कुटाई के बाद चावल की सरकारी गोदामों में सप्लाई के बीच बड़ा खेल चल रहा है। कई राइस मिलों ने कुटाई के लिए लिया गया लाखों रुपये का चावल सरकार को वापस ही नहीं दिया। सूत्र बताते हैं कि राइस मिलर्स और विभागीय अफसरों की मिलीभगत से मिलों से चावल की पूरी सप्लाई सरकारी गोदामों में होती ही नहीं है। बाद में उसे कागजों पर चूहों के खाने या खराब हो जाना दिखाकर समायोजन कर लिया जाता है। पिछले साल भी दो राइस मिलों के करीब 80 लाख का चावल दबाकर बैठने का मामला सामने आ चुका है। इतना ही नहीं, इस राइस मिल के खराब रिकार्ड के बावजूद उसे इस साल भी काम दे दिया गया है। उधर, एक दूसरी मिल से 28 लाख रुपये का चावल न मिलने से उसे आरसी जारी कर दी गई है।
विज्ञापन

जिला खाद्य एवं विपणन विभाग के जरिये जिला प्रशासन हर साल धान की खरीद कराता है। इसके बाद इसी विभाग की यह जिम्मेदारी भी है कि वह सरकारी केंद्रों पर खरीदे गए धान को कुटाई के लिए मिलों को भेजे और वहां से चावल वापस लेकर एफसीआई गोदामों तक पहुंचाए। यह मानक है कि सरकारी एजेंसियां जितनी मात्रा में जिन राइस मिलों को कुटाई के लिए धान देंगी, उसका 67 फीसदी चावल के रूप में वापस लेंगी, जबकि कई राइस मिलों ने इसमें घपलेबाजी की और लाखों रुपये का सरकारी चावल वापस ही नहीं किया। नवाबगंज की केसी इंडस्ट्रीज नाम की मिल को सरकारी चावल न वापस करने में 28 लाख रुपये की आरसी जारी कर वसूली की जा रही है। अफसरों का कहना है कि मिल को कई बार चावल वापस करने का मौका दिया गया लेकिन ऐसा न होने पर अब सख्ती के साथ वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इधर, फरीदपुर में भी मैसर्स सार इंपैक्ट राइस मिल ने सैकड़ों क्विंटल चावल सकार को वापस नहीं किया है। डिप्टी आरएमओ की तरफ से जांच हुई तो यह सामने आया कि मिल मालिक ने यह चावल कहीं दूसरी जगह खपा दिया है। इसके बाद डिप्टी आरएमओ की तरफ से वसूली की कार्रवाई शुरू हुई। मिल मालिक ने चावल तो वापस नहीं किया लेकिन कार्रवाई के डर से करीब 50 लाख रुपये वापस कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि सरकारी एजेंसियों के स्टाफ और मिल मालिक पहले दोनों मिलकर खराब चावल की मात्रा दिखाकर गड़बड़ी करते हैं। बाद में राइस मिलर और सरकारी गोदाम प्रभारी भी मिलकर कागजों पर आपूर्ति दिखाते हैं। बाद में मिलर जितना खाद्यान्न कम देते हैं, उसे सड़ना या चूहों के खाने से नुकसान दिखाकर उसकी खानापूर्ति कर दी जाती है।
विज्ञापन


चहेती राइस मिलों के साथ खरीद केंद्रों का अटैचमेंट
जिला खाद्य एवं विपणन विभाग ने इस वर्ष के लिए भी विभिन्न सरकारी एजेंसियों के 69 खरीद केंद्रों का अटैचमेंट 64 राइस मिलों से कर दिया गया है। हालांकि विभागीय अफसरों की भूमिका पर यह सवाल उठाए गए हैं कि उन्होंने मनमाने तरीके से खरीद केंद्रों को अपनी चहेती राइस मिलों से जोड़ दिया है। हालांकि विभागीय अफसर इस बात को नकार रहे हैं। उनका कहना है कि जिले में केवल नवाबगंज और बहेड़ी क्षेत्र में ही राइस मिल हैं। इसके लिए मजबूरी है कि जिले में कहीं भी सेंटर बने, उनका अटैचमेंट उन्हीं से होना है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकारी चावल वापस न करने वाली राइस मिलों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। नवाबगंज की एक मिल को काली सूची में डाल दिया गया है। इस बार उसका अटैचमेंट नहीं हो रहा है। - सुशील भारती, डिप्टी आरएमओ

जानकारों के सवाल
- सालभर का 80 लाख के चावल का ब्याज कौन भरेगा।
- 50 लाख का चावल कितने मुनाफे में बेचा, कौन बताएगा।
- साल भर तक सोते क्यों रहे अफसर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed