{"_id":"5be0b138bdec22233165e1d2","slug":"141541452088-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रजा के रंग में रंगा शहर, कुलशरीफ में उमड़ा सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रजा के रंग में रंगा शहर, कुलशरीफ में उमड़ा सैलाब
Updated Tue, 06 Nov 2018 02:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का सौवां उर्स मुबारक सोमवार को अकीदत के साथ रुहानी माहौल में मुकम्मल हो गया। उर्स में आला हजरत के शैदाइयों का भारी सैलाब उमड़ा। विदेश से भी हजारों जायरीन ने शामिल होकर अकीदत-ओ-मोहब्बत का नजराना पेश किया। इस दौरान पूरा शहर रजा के रंग में रंगा नजर आया। किसी ने लंगर किया तो किसी ने रजा के नाम पर तबर्रुक बांटा। व्यापार भी किया तो रजा के नाम पर और किसी को रास्ता बताय तो भी रजा के नाम पर। कुल के बाद जब रजा के चाहने वाले लौटने के लिए सड़कों पर आए तो पूरा शहर रजामय हो गया।
उर्स-ए-रजवी के मौके पर यूं तो दो दिन पहले से जायरीन के आला हजरत की चौखट पर हाजरी सिलसिला शुरू हो गया था। चादरपोशी गुलपोशी के लिए भी लोग पहुंचते रहे। पिछले दो दिनों से शुरू हुआ हाजिरी और चादरपोशी का तांता नहीं टूटा। कुल के बाद भी लोग दरगाह तक पहुंच रहे। सोमवार को उर्स का आखिरी दिन था, सुबह से ही अकीदतमंदों का दरगाह पर रेला शुरू हो गया था। हाजिरी देने वालों को सैलाब थमा नहीं था कि सुबह से ही उर्सगाह इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर उर्स की तकरीब शुरू हो गई। सुबह कुरान ख्वानी के बाद नातो मनकबत फिजाओं में गूंजने लगीं। इसके बाद मंच से देश विदेश से आए उलमा की तकरीर का दौर शुरू हुआ। दीन दुनिया से लेकर बच्चों की तालीम तक का जिक्र हुआ। अरब हुकूमत के खिलाफ विरोध के स्वर भी गूंजे।
रफ्ता रफ्ता जलसा अपने उरूज पर पहुंचने लगा। इस बीच इस्लामियां कॉलेज का मैदान अकीदतमंदों से खचाखच था। यहां तक कि आसपास के तमाम इलाके कुतुबखाना से चौपुला, बिहारीपुर की गलियां और नावल्टी तक तमाम सड़कें ठसाठस थीं। उधर, बिहारीपुर से दरगाह गली और मलूकपुर तक की गलियों में भी जायरीन थेे। लगभग ढाई बजे जलसा अपने शबाब पर था। रास्ते पैक थे फिर भी लोग आगे पहुंचने की कोशिश में आगे बढ़ते रहे। जैसे ही वक्त 2:38 का हुआ मंच से कुल की आयतें गूंज उठीं। बस जो जहां था वहीं हाथों में तबर्रुक लेकर रुक गया। फातेहा के बाद मुल्क की तरक्की और अवाम की खुशहाली की दुआ के साथ उर्स की तकरीब पूरी हो गई और जायरीन अपने घरों की ओर रवाना होने लगे। वापसी का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
उर्स-ए-रजवी के मौके पर यूं तो दो दिन पहले से जायरीन के आला हजरत की चौखट पर हाजरी सिलसिला शुरू हो गया था। चादरपोशी गुलपोशी के लिए भी लोग पहुंचते रहे। पिछले दो दिनों से शुरू हुआ हाजिरी और चादरपोशी का तांता नहीं टूटा। कुल के बाद भी लोग दरगाह तक पहुंच रहे। सोमवार को उर्स का आखिरी दिन था, सुबह से ही अकीदतमंदों का दरगाह पर रेला शुरू हो गया था। हाजिरी देने वालों को सैलाब थमा नहीं था कि सुबह से ही उर्सगाह इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर उर्स की तकरीब शुरू हो गई। सुबह कुरान ख्वानी के बाद नातो मनकबत फिजाओं में गूंजने लगीं। इसके बाद मंच से देश विदेश से आए उलमा की तकरीर का दौर शुरू हुआ। दीन दुनिया से लेकर बच्चों की तालीम तक का जिक्र हुआ। अरब हुकूमत के खिलाफ विरोध के स्वर भी गूंजे।
विज्ञापन
रफ्ता रफ्ता जलसा अपने उरूज पर पहुंचने लगा। इस बीच इस्लामियां कॉलेज का मैदान अकीदतमंदों से खचाखच था। यहां तक कि आसपास के तमाम इलाके कुतुबखाना से चौपुला, बिहारीपुर की गलियां और नावल्टी तक तमाम सड़कें ठसाठस थीं। उधर, बिहारीपुर से दरगाह गली और मलूकपुर तक की गलियों में भी जायरीन थेे। लगभग ढाई बजे जलसा अपने शबाब पर था। रास्ते पैक थे फिर भी लोग आगे पहुंचने की कोशिश में आगे बढ़ते रहे। जैसे ही वक्त 2:38 का हुआ मंच से कुल की आयतें गूंज उठीं। बस जो जहां था वहीं हाथों में तबर्रुक लेकर रुक गया। फातेहा के बाद मुल्क की तरक्की और अवाम की खुशहाली की दुआ के साथ उर्स की तकरीब पूरी हो गई और जायरीन अपने घरों की ओर रवाना होने लगे। वापसी का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
विज्ञापन