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सेटेलाइट बस स्टैंड पर डबल लोड, सारी बसें रहीं ठसाठस
Updated Tue, 06 Nov 2018 02:37 AM IST
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बरेली। उर्स की वजह से पुराना बस अड्डा बंद रहा तो बसों का पूरा लोड सेटेलाइट बस स्टैंड पर आ गया। बरेली एवं रुहेलखंड डिपो की 245 बसें यहां से संचालित हुईं और बाहरी डिपो की भी तीन सौ से ज्यादा बसें यहीं से निकलीं। वाहन और मुसाफिरों की भीड़ बढ़ी तो गहमागहमी का माहौल बना रहा।
पुराने बस अड्डे को बरेली डिपो और सेटेलाइट बस अड्डे को रुहेलखंड डिपो संचालित करता है। सोमवार को भीड़ के चलते पुराने बस अड्डे से बसों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद अस्थायी ऑफिस बनाकर बरेली डिपो को भी एक दिन के लिए सेटेलाइट बस स्टैंड से संचालित किया गया। बरेली डिपो की करीब 130 बसों का संचालन यहीं से हुआ। इनमें अधिकांश बसें दिल्ली रूट की थीं। सामान्य दिनों में 107 बसें चलाने वाले रुहेलखंड डिपो ने मुसाफिरों की भीड़ देखकर सोमवार को 115 बसें चलाईं। अधिकांश बसें लखनऊ, कानपुर आदि रूट पर चलाई गईं।
70 फेरे बढ़ाए, स्टाफ की छुट्टियां रद्द
परिवहन निगम के अधिकारियों ने भीड़ को देखते हुए बसों के फेरे बढ़ाए। रुहेलखंड डिपो के एआरएम पीके सिंह ने बताया कि अधिकांश बसों ने निर्धारित से ज्यादा फेरे लगाए। उनके डिपो की बसों के 70 फेरे ज्यादा रहे। देर रात आरएम राजीव चौहान ने भी वर्कशॉप में बस संचालन की समीक्षा की। एआरएम पीके सिंह ने बताया कि निगम ने अपने स्टाफ के लिए प्रोत्साहन योजना लागू कर दी है जो दिवाली बाद तक चलेगी। इन दिनों में लगातार ड्यूटी करने वाले स्टाफ को अलग से धनराशि मिलेगी। फिलहाल स्टाफ की छुट्टी रद्द कर दी हैं।
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फिर भी परेशान रहे यात्री
यात्रियों में सर्वाधिक भीड़ उर्स में शामिल होकर लौटने वालों की रही। इसके अलावा दिवाली की छुट्टी पर घरों को लौट रहे लोग भी थे। बसों की संख्या बढ़ाने और लाउडस्पीकर से लगातार घोषणा के बाद भी तमाम मुसाफिरों को अपने रूट की बसों के इंतजार में खड़े रहना पड़ा। बस लगते ही भर जाती थी। इसके चलते लोग खिड़कियों से बैग सीट पर फेंककर अंदर घुस रहे थे।
ऑटो वालों ने वसूला दोहरा किराया
उर्स के बाद भीड़ बाहर निकली तो ऑटो रिक्शा वालों ने भी किराया डेढ़ से दोगुना कर दिया। अयूब खां चौराहे से सेटेलाइट या जंक्शन के बीस रुपये तक वसूले गए। ई रिक्शा कम दिखे तो पैर वाले रिक्शे अधिकांश रास्तों पर लोगों को गंतव्य तक पहुंचाते दिखे।
निजी बसों की चांदी, छत पर बैठाए यात्री
सेटेलाइट स्टैंड के बराबर बसें लगाकर प्राइवेट बस चालकों ने भी उर्स के मौके पर मोटा मुनाफा कमाया। कई मुसाफिर तो वोल्वो और डीलक्स श्रेणी की इन बसों में रोडवेज के धोखे में बैठे तो कुछ को मजबूरी में बैठना पड़ा। इनमें से कई बसों में यात्रियों को छतों पर बैठाया गया। घर जाने की जल्दी में लोगों ने जान जोखिम में डालकर यात्रा की।
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पुराने बस अड्डे को बरेली डिपो और सेटेलाइट बस अड्डे को रुहेलखंड डिपो संचालित करता है। सोमवार को भीड़ के चलते पुराने बस अड्डे से बसों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद अस्थायी ऑफिस बनाकर बरेली डिपो को भी एक दिन के लिए सेटेलाइट बस स्टैंड से संचालित किया गया। बरेली डिपो की करीब 130 बसों का संचालन यहीं से हुआ। इनमें अधिकांश बसें दिल्ली रूट की थीं। सामान्य दिनों में 107 बसें चलाने वाले रुहेलखंड डिपो ने मुसाफिरों की भीड़ देखकर सोमवार को 115 बसें चलाईं। अधिकांश बसें लखनऊ, कानपुर आदि रूट पर चलाई गईं।
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70 फेरे बढ़ाए, स्टाफ की छुट्टियां रद्द
परिवहन निगम के अधिकारियों ने भीड़ को देखते हुए बसों के फेरे बढ़ाए। रुहेलखंड डिपो के एआरएम पीके सिंह ने बताया कि अधिकांश बसों ने निर्धारित से ज्यादा फेरे लगाए। उनके डिपो की बसों के 70 फेरे ज्यादा रहे। देर रात आरएम राजीव चौहान ने भी वर्कशॉप में बस संचालन की समीक्षा की। एआरएम पीके सिंह ने बताया कि निगम ने अपने स्टाफ के लिए प्रोत्साहन योजना लागू कर दी है जो दिवाली बाद तक चलेगी। इन दिनों में लगातार ड्यूटी करने वाले स्टाफ को अलग से धनराशि मिलेगी। फिलहाल स्टाफ की छुट्टी रद्द कर दी हैं।
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फिर भी परेशान रहे यात्री
यात्रियों में सर्वाधिक भीड़ उर्स में शामिल होकर लौटने वालों की रही। इसके अलावा दिवाली की छुट्टी पर घरों को लौट रहे लोग भी थे। बसों की संख्या बढ़ाने और लाउडस्पीकर से लगातार घोषणा के बाद भी तमाम मुसाफिरों को अपने रूट की बसों के इंतजार में खड़े रहना पड़ा। बस लगते ही भर जाती थी। इसके चलते लोग खिड़कियों से बैग सीट पर फेंककर अंदर घुस रहे थे।
ऑटो वालों ने वसूला दोहरा किराया
उर्स के बाद भीड़ बाहर निकली तो ऑटो रिक्शा वालों ने भी किराया डेढ़ से दोगुना कर दिया। अयूब खां चौराहे से सेटेलाइट या जंक्शन के बीस रुपये तक वसूले गए। ई रिक्शा कम दिखे तो पैर वाले रिक्शे अधिकांश रास्तों पर लोगों को गंतव्य तक पहुंचाते दिखे।
निजी बसों की चांदी, छत पर बैठाए यात्री
सेटेलाइट स्टैंड के बराबर बसें लगाकर प्राइवेट बस चालकों ने भी उर्स के मौके पर मोटा मुनाफा कमाया। कई मुसाफिर तो वोल्वो और डीलक्स श्रेणी की इन बसों में रोडवेज के धोखे में बैठे तो कुछ को मजबूरी में बैठना पड़ा। इनमें से कई बसों में यात्रियों को छतों पर बैठाया गया। घर जाने की जल्दी में लोगों ने जान जोखिम में डालकर यात्रा की।