IVRI Bareilly: 134 साल का हुआ आईवीआरआई, जानिए लैब से संस्थान बनने तक का सफर और उपलब्धियां
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली 134 साल का हो गया है। लैब से संस्थान बनने तक के सफर में आईवीआरआई के नाम कई उपलब्धियां हैं।
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वैक्सीन और नई तकनीकी का ईजाद कर पशुओं को जानलेवा बीमारियों से निजात दिला रहे भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली 134 साल का हो गया है। इस लंबे सफर में आईवीआरआई के नाम कई उपलब्धियां है। संस्थान ने वर्चुअल पशु क्लीनिक भी शुरू किया है। इसके जरिए अब तक दस हजार पशुपालक परामर्श ले चुके हैं।
आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के निर्देशन में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रूपसी तिवारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुज चौहान, डॉ. उज्ज्वल कुमार डे और भारतीय कृषि सांख्यिकीय अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग के प्रमुख डॉ. सुदीप, आईटी डेवलपर डॉ. संजीव कुमार, डॉ. समीर श्रीवास्तव, केशव कांत ने ऑनलाइन वेटरनरी क्लीनिक एप फरवरी में तैयार किया था।
वैज्ञानिकों के मुताबिक दस हजार से ज्यादा पशुपालक सामान्य प्रसव, सर्जिकल, प्रजनन, परजीवी, डायग्नोस्टिक, पैथोलॉजी, प्रबंधन की समस्या समेत टीकाकरण और चारा संबंधित परामर्श ले चुके हैं। इससे पशुओं को पॉलीक्लीनिक लाने की जरूरत नहीं होती।
ऑनलाइन क्लीनिक पर आईवीआरआई के 72 वैज्ञानिक, चिकित्सक पंजीकृत हैं। परामर्श के लिए पशुपालकों को एप पर निशुल्क पंजीकरण करना होगा। फिर पशु श्रेणी पर क्लिक कर पशु की आयु, लिंग, वजन, संबंधित लक्षण समेत जानकारी भरनी होगी। पशुपालक सुबह नौ से शाम 5.30 बजे तक ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं।
कई वैक्सीन हो चुकीं रिलीजपशुओं को लंपी डिजीज से निजात के लिए आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने दूसरे संस्थानों के सहयोग से इसका टीका समेत टोलरेंट ओ एफएसडी वैक्सीन विकसित की। संस्थान से नॉवेल आहार संपूरक, ओवेरियन सिस्ट एबलेशन डिवाइस, ब्लूटंग के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी आधारित ब्लॉकिंग एलाइजा किट, मेसेनकाइमल स्टेम सेल कंडिशंड मीडिया आधारित फार्मूलेशन, हार्वेस्टिंग ऑफ चिकन स्किन फैट फ्रॉम पोल्ट्री स्लीव्स का प्रमाणीकरण, तकनीकी हस्तांतरण हुआ है।
पुणे में एक लैब से शुरू हुआ था आईवीआरआई
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान 1889 में पुणे में इंपीरियल बैक्टीरियोलॉजिकल लैब के रूप में शुरू हुआ था। पशुओं को रिंडरपेस्ट महामारी से निजात दिलाने में संस्थान का अहम योगदान रहा। कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक संस्थान में 71 नए डिप्लोमा, ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट, डिग्री कोर्स शुरू किए हैं। इसे ग्लोबल यूनिवर्सिटी बनाने का प्रयास है।
संस्थान की उपलब्धियां
- रिंडरपेस्ट बीमारी का उन्मूलन, एफएमडी वैक्सीन का विकास।
- पशुओं की टूटी हड्डी जोड़ने की तकनीक का विकास।
- फ्रैक्चर के इलाज के लिए स्टेम सेल चिकित्सा पद्धति का प्रयोग।
- उन्नत बोन फिक्सेटर तकनीक, लंपी डिजीज की वैक्सीन व अन्य।
इतिहास
1889 - इम्पीरियल बैक्टीरियोलॉजिकल लेबोरेटरी (आईबीएल) पुणे में स्थापित।
1893 - आईबीएल लैब मुक्तेश्वर कुमाऊं हिल्स उत्तराखंड में शिफ्ट।
1913 - आईवीआरआई की स्थापना इज्जतनगर बरेली में।
1940 - पॉल्ट्री में रानी खेत बीमारी रोकने के लिए पहली वैक्सीन बनी।
1947 - निदेशालय मुक्तेश्वर से आईवीआरआई इज्जतनगर में शिफ्ट।
1971 - आईवीआरआई के बेंगलुरू परिसर की स्थापना।