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गणतंत्र दिवस उपहार: देशभक्त अहलावत परिवार से नहीं अपना बंगला नहीं खाली कराएगी सेना
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बरेली। करीब 137 सालों के दौरान पांच पीढ़ियों से अहलावत परिवार का सेना से नाता रहा है। यह परिवार कई वर्षों से कैंट के बंगला नंबर 16 में रह रहे हैं जिसे खाली कराने के लिए कैंट बोर्ड कवायद कर रहा था, लेकिन सभासदों की ओर से सेना की सेवा में पांच पीढ़ियां देने वाले परिवार को इस मामले में जोर-शोर से राहत देने मांग उठाई इस मामले में एक कमेटी गठित कर कैंट बोर्ड ने बंगला खाली कराने का फैसला रद्द कर दिया। अब इसके बजाय किराया बढ़ाया जाएगा। इसके बाद जब तक चाहे अहलावत परिवार और इस बंगले में रहता रहेगा।
पिछले दिनों हुई बोर्ड बैठक में बंगला नंबर 16 का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। इस बंगले में रिटायर्ड सूबेदार बलवंत सिंह अहलावत का परिवार रह रहा है। सभासद वेद प्रकाश तनेजा ने दूसरे सभासदों के साथ पांच पीढ़ियों से सेना के जरिये देश की सेवा करने वाले परिवार को राहत की मांग की। इस पर बोर्ड अध्यक्ष बिग्रेडियर इंद्रजीत सिंह ने बंगला नियमानुसार खाली कराने को कहा। इस पर सभासदों ने विरोध करते हुए बंगला खाली कराए जाने के बजाय किराया बढ़ाने की मांग की। तर्क दिया कि बंगला खाली कराने से वर्षों देश के लिए अपना परिवार सेना को समर्पित करने वालों का निराशा होगी। इसके बाद बोर्ड ने बंगला खाली कराए जाने के बजाय कमेटी गठित कर किराया बढ़ाने को कहा है। बता दें कि बलवंत सिंह अहलावत वर्तमान में 3,300 रुपये किराया कैंट कार्यालय में जमा कर रहे हैं। सभासद वेद प्रकाश तनेजा के मुताबिक बोर्ड ने खाली कराने से इनकार किया है साथ ही, रियायती दर पर किराया बढ़ाने की संभावना जताई है।
दो युद्ध लड़ चुके हैं सूबेदार अहलावत
सेवानिवृत्त सूबेदार बलवंत सिंह अहलावत 1949 में पांच जाट में भर्ती हुए थे। उन्होंने चीन से 1962 और 1965 में हुए युद्ध में हिस्सा लिया। सेना की सेवा करने का जुनून इस कदर था कि वर्ष 1962 में हुए युद्ध में घायल होने के बाद बलवंत सिंह का दाहिना पैर काट दिया गया, फिर भी वह 1965 के युद्ध में सेना की सेवा करने शामिल हो गए। उनके बेटे बिग्रेडियर दीप सिंह अहलावत को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा जा चुका है और नाती यशदीप अहलावत हाल ही में लेफ्टीनेंट के पद पर सेना में शामिल हुए हैं। पिता रघुनाथ सिंह अहलावत और दादा संग्राम सिंह भी सेना में सेवा दे चुके हैं। शौर्य, साहस और पराक्रम से देश की सेवा करने वाले परिवार को अब कैंट बोर्ड सम्मान से नवाजेगा।
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पिछले दिनों हुई बोर्ड बैठक में बंगला नंबर 16 का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। इस बंगले में रिटायर्ड सूबेदार बलवंत सिंह अहलावत का परिवार रह रहा है। सभासद वेद प्रकाश तनेजा ने दूसरे सभासदों के साथ पांच पीढ़ियों से सेना के जरिये देश की सेवा करने वाले परिवार को राहत की मांग की। इस पर बोर्ड अध्यक्ष बिग्रेडियर इंद्रजीत सिंह ने बंगला नियमानुसार खाली कराने को कहा। इस पर सभासदों ने विरोध करते हुए बंगला खाली कराए जाने के बजाय किराया बढ़ाने की मांग की। तर्क दिया कि बंगला खाली कराने से वर्षों देश के लिए अपना परिवार सेना को समर्पित करने वालों का निराशा होगी। इसके बाद बोर्ड ने बंगला खाली कराए जाने के बजाय कमेटी गठित कर किराया बढ़ाने को कहा है। बता दें कि बलवंत सिंह अहलावत वर्तमान में 3,300 रुपये किराया कैंट कार्यालय में जमा कर रहे हैं। सभासद वेद प्रकाश तनेजा के मुताबिक बोर्ड ने खाली कराने से इनकार किया है साथ ही, रियायती दर पर किराया बढ़ाने की संभावना जताई है।
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दो युद्ध लड़ चुके हैं सूबेदार अहलावत
सेवानिवृत्त सूबेदार बलवंत सिंह अहलावत 1949 में पांच जाट में भर्ती हुए थे। उन्होंने चीन से 1962 और 1965 में हुए युद्ध में हिस्सा लिया। सेना की सेवा करने का जुनून इस कदर था कि वर्ष 1962 में हुए युद्ध में घायल होने के बाद बलवंत सिंह का दाहिना पैर काट दिया गया, फिर भी वह 1965 के युद्ध में सेना की सेवा करने शामिल हो गए। उनके बेटे बिग्रेडियर दीप सिंह अहलावत को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा जा चुका है और नाती यशदीप अहलावत हाल ही में लेफ्टीनेंट के पद पर सेना में शामिल हुए हैं। पिता रघुनाथ सिंह अहलावत और दादा संग्राम सिंह भी सेना में सेवा दे चुके हैं। शौर्य, साहस और पराक्रम से देश की सेवा करने वाले परिवार को अब कैंट बोर्ड सम्मान से नवाजेगा।
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