फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   बेटे का शव घर पर पड़ा था और बेसुध बेटी को कंधे पर लादकर अस्पताल दौड़ा पिता

बेटे का शव घर पर पड़ा था और बेसुध बेटी को कंधे पर लादकर अस्पताल दौड़ा पिता

Mon, 10 Sep 2018 02:18 AM IST
Updated Mon, 10 Sep 2018 02:18 AM IST
विज्ञापन
बेटे का शव घर पर पड़ा था और बेसुध बेटी को कंधे पर लादकर अस्पताल दौड़ा पिता
बरेली। यह इत्तफाक ही था कि अमर उजाला की टीम ने जैसे ही गांव बाड़ी नगला में कदम रखा वैसे ही गली में दौड़ते नजर आए रामौतार के चेहरे पर छायी बदहवासी ने साफ कर दिया कि गांव में क्या हालात हैं। रामौतार के कंधे पर निढाल सी हालत में उनकी 17 वर्षीय बेटी रेनू पड़ी थी, पीछे कुछ आसपड़ोस के भी लोग थे। पूछा तो पता लगा कि शुक्रवार को रामौतार की बड़ी बेटी 19 वर्षीय रोहणी की बुखार से मौत हुई थी और रविवार को सुबह उनके 14 वर्षीय बेटे सोनू ने भी दम तोड़ दिया। सोनू का अंतिम संस्कार कर पाते, इससे पहले ही छोटी बेटी रेनू की भी हालत बिगड़ गई तो बेटे का शव घर पर ही पड़ा छोड़ रामौतार ने बुखार से बेसुध हुई बेटी को कंधे पर लादा और दौड़ पड़े।
विज्ञापन

गांव बाड़ी नगला का जायजा लेने पर पता लगा कि गांव की करीब 80 फीसद आबादी बुखार से ग्रस्त है। कुछ लोग इलाज के लिए बुखारा मोड़ पर एक निजी अस्पताल पर आश्रित हैं तो कुछ लोग अपने बीमार परिजनों को लेकर जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगा रहे हैं। पास ही में क्यारा का सरकारी अस्पताल है, लेकिन लोगों को उस पर जरा भी भरोसा नहीं है। पहली वजह तो यह है कि वहां डॉक्टर मिलने की कोई गारंटी नहीं और दूसरी यह कि डॉक्टर मिल भी गए तो दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से ही खरीदनी पड़ेंगी। गांव के लोगों ने बताया कि पिछले सप्ताह शुरू हुए बुखार के प्रकोप ने चंद दिनों में ही पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया है। हालांकि मौत सिर्फ रामौतार के परिवार में ही हुई हैं। अमर उजाला टीम रामौतार के घर पहुंची तो वहां का भी नजारा द्रवित करने वाला था। बेटे की लाश पर रोती-बिलखती मां भी बुखार से बुरी तरह तप रही थी। खैर चार-पांच दिन में ही रामौतार के परिवार की सारी खुशियों को तबाह कर देने वाली किस्मत ने रविवार को उनका थोड़ा सा साथ दिया। बुखार पीड़ित बेटी को जिला मुख्यालय ले जाने की नौबत नहीं आई, पड़ोस के ही क्यारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम गांव पहुंच चुकी थी तो उसे गांव में ही इलाज मिल गया। मजदूरी करके परिवार पालने वाले रामौतार के भाई बैजनाथ के बेटे ललित की हालत भी बुखार से नाजुक बताई गई।
विज्ञापन


सरकारी अस्पताल में इलाज मिलता तो यह हालत न होती
बाड़ी नगला गांव की बुखार से पीड़ित 80 फीसदी आबादी इलाज के लिए आसपास के निजी डॉक्टरों के अलावा शहर के महंगे अस्पतालों तक दौड़ रही है, लेकिन पास ही क्यारा के सरकारी अस्पताल में उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है। रामौतार भी अपने बेटे सोनू को एंबुलेंस से बरेली लाया था लेकिन अस्पताल पहुंच पाने से पहले ही उसकी मौत हो गई। रामौतार के भतीजे ललित को बुखारा मोड़ के डीआर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ग्राम प्रधान लाल करण सिंह के मुताबिक गांव में न फागिंग हुई है न एंटी लार्वा का छिड़काव। गांव में बेतहाशा मच्छर हैं। गांव के तमाम लोग चनेहटी के बंगाली बाबा के पास इलाज को जाते है। क्यारा के सरकारी अस्पताल पर कम ही पहुंचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो घंटे में 70 मरीजों को दी दवा
गांव बाड़ी नगला में हालात बेकाबू होने के बाद रविवार को क्यारा सीएचसी की टीम डॉ. आदेश गंगवार की अगुवाई में पहुंची। दो घंटे में इस टीम ने बुखार के 70 मरीजों को दवा दी। आठ गंभीर मरीजों की स्लाइड बनाई गई। डॉ. आदेश के मुताबिक गांव में मलेरिया, टाइफाइड और डायरिया के मरीज ज्यादा हैं।

दहशत में पूरा गांव- फोटो
हर घर में दो से तीन लोग बुखार में है। पहली बार गांव में किसी की बुखार से मौत हुई है। लोग परेशान है। - रोशनलाल, ग्रामीण

यहां लोग खुद ही साफ सफाई में जुटे रहते हैं। लेकिन बुखार ने यहां सभी को गिरफ्त में लिया हुआ है। - नीरज पटेल, ग्रामीण
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed