फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   मंत्री जी फटकार के बावजूद ब्लाकों में अटके हजारों पेंशन फार्म

मंत्री जी फटकार के बावजूद ब्लाकों में अटके हजारों पेंशन फार्म

Tue, 06 Feb 2018 10:00 AM IST
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:00 AM IST
विज्ञापन
मंत्री जी फटकार के बावजूद ब्लाकों में अटके हजारों पेंशन फार्म
==फोटो===
विज्ञापन

कम नहीं हो रही पेंशन की टेंशन
मंत्री की फटकार भी बेअसर


- अक्षम बुजुर्गों को भी दौड़ा रहा समाज कल्याण विभाग
- संतोष गंगवार भी उठा चुके विभाग के काम पर सवाल


अमर उजाला ब्यूरो

बरेली।
दूर-दराज के इलाकों से पेंशन की आस में विकास भवन पहुंचने वाले बुजुर्ग और गरीबों की टेंशन कम होती नहीं दिख रही। शरीर से लाचार, पैसों से तंगहाल, इन लोगों के हालात पर समाज कल्याण विभाग के कारिंदों को रहम नहीं आता। जिला मुख्यालय से लेकर ब्लाक दफ्तरों में पेंशन के हजारों फार्म पेंडिंग हैं। मगर कोई न कोई खामी बताकर आवेदकों को दौड़ाया जा रहा है। इनमें से कोई चलने में अक्षम है तो उधारी लेकर जिला मुख्यालय तक दौड़ रहा है। मगर समाज कल्याण के कर्मचारियों को इनके हालात पर तरस नहीं आता। जिले के प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक की बैठक में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने भी इस विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई थी, मगर यहां अब भी कोई सुधार नहीं दिखाई देता।

ब्लाकों में लंबित हैं हजारों पेंशन फार्म
समाज कल्याण विभाग के ब्लाक कार्यालयों में भी वृद्घावस्था पेंशन के हजारों पेंशन फार्म लंबित हैं। वहां भी सहायक समाज कल्याण अधिकारी लाभार्थियों को कोई न कोई बहाना बताकर टरका रहे हैं। समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित का कहना है कि तीन साल से पेंशन के 4600 फार्म पेंडिंग थे। इनमें अब केवल आठ सौ से एक हजार फार्म ही बाकी हैं। इसमें लोगों ने या तो नाम-पते गलत भरे हैं या फिर उनके बैंक एकाउंट नंबर में त्रुटि है।
विज्ञापन



समाज कल्याण दफ्तर में आए लोगों से बातचीत

तीन साल से पेंशन मांग रहे 74 साल के रामप्रताप
- ढकनी गांव के 74 वर्षीय रामप्रताप तीन साल से वृद्घावस्था पेंशन के लिए भटक रहे हैं। कमाई का कोई जरिया नहीं है, इसलिए उम्र के आखिरी पड़ाव में समाज कल्याण की पेंशन पाने के लिए दौड़ रहे हैं। वह जब भी बाबुओं से मिलते हैं तो हर बार ही कोई न कोई बहाना बताकर बाद में आने के लिए बोल दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


किराया देने के लिए हर बार मांगना पड़ता उधार
- राजूपुर के रघुनाथ वृद्घावस्था पेंशन के लिए विकास भवन में न जाने कितने चक्कर काट चुके हैं। बताया कि गांव से बरेली तक आने के लिए 60 रुपये का किराया लगता है। जेब में इतने पैसे भी नहीं होते। इसलिए पड़ोसी या रिश्तेदार से रुपये मांग कर आना पड़ता है।


बहू को आर्थिक मदद के लिए चक्कर लगा रही महिला
गंगापुर की रहने वाली शकुंतला अपनी बहू को पारिवारिक लाभ की धनराशि दिलाने के लिए समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट रही हैं। उनका कहना है कि किसी बाबू से कुछ भी कहो लेकिन कोई कुछ न सुनने को तैयार है और न ही कोई यह बताता है कि उसकी बहू को कब तक आर्थिक मदद मिल जाएगी।


स्कॉलरशिप फार्म की नहीं संभल रही खामी
बड़ा बाजार निवासी राजीव गुप्ता ने बताया कि उनकी बेटी पॉलीटेक्निक कर रही है। समाज कल्याण से स्कॉलरशिप पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन भरा था। इसमें कुछ खामी रह गई है। समाज कल्याण के बाबुओं से कई बार कहने के बावजूद दिक्कत नहीं खत्म हो रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed