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रेलवे स्टेशनों पर फिर मिलेगी कुल्हड़ वाली चाय
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रेलवे स्टेशनों पर फिर मिलेगी कुल्हड़ वाली चाय
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। उत्तर रेलवे के स्टेशनों से गुजरने वाले यात्रियों को कुल्हड़ में चाय और मिट्टी के बर्तनों में खाना दिया जाएगा। यहां के स्टेशनों पर नाश्ते की व्यवस्था भी ईको फ्रेंडली बर्तनों में होगी। प्रोजेक्ट ठीकठाक रहा तो देश के सभी स्टेशनों पर इसे लागू किया जाएगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल की सिफारिश के बाद फिलहाल यह योजना दिल्ली के बाद अब वाराणसी और रायबरेली के स्टेशनों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होने जा रही है। कुम्हारों से संपर्क के बाद जल्द ही बरेली में यह योजना लागू कर दी जाएगी। यहां बता दें कि मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के सुझाव पर किया जा रहा है। इससे टेराकोटा उत्पादकों और कुम्हारों को खासा लाभ होगा।
उत्तर रेलवे अपने सभी स्टेशनों को प्लास्टिक फ्री करने जा रहा है। रेलवे के सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में वाराणसी और लखनऊ डिवीजन में मिट्टी के बर्तन का प्रयोग करने के लिए रेलवे बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है। इसके बाद बरेली व अन्य स्टेशन प्लास्टिक फ्री किए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक उत्तर रेलवे के सभी स्टेशनों पर प्लास्टिक और कागज का प्रयोग पूरी तौर से प्रतिबंधित होगा। रेलवे बोर्ड के मुताबिक उन्होंने यह फैसला पर्यावरण को ध्यान में रखकर लिया है। यहां बता दें कि बरेली जंक्शन से रोजाना 175 ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें से काफी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलीथिन आदि स्टेशन पर गिराया जाता है।
वहीं आईआरसीटीसी के अधिकारियों के मुताबिक पेंट्रीकार और आईआरसीटीसी के होटलों में भी जल्द ही खानपान की पैकिंग में बदलाव दिखेगा। अधिकारियों के मुताबिक रोजाना 20 लाख रुपये से ज्यादा के एल्युमिनियम रेपर खाना और नाश्ते की पैकिंग में खर्च होते हैं, लेकिन जल्द ही यह सब पैकिंग बदलकर ईको फ्रेंडली हो जाएंगी। खाना भी ईको फ्रेंडली प्लेटों में परोसा जाएगा। हालांकि सबसे पहले यह बदलाव देश की महत्वपूर्ण ट्रेनों में देखने को मिलेगा।
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15 साल बाद फिर होगी कुल्हड़ों की वापसी
15 साल पहले तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने कुल्हड़ में चाय देने की व्यवस्था कराई थी, इससे कुम्हारों के दिन तो बहुर गए, लेकिन कुल्हड़ का चलन ज्यादा दिन नहीं टिक सका। दरअसल, वेंडरों को कुल्हड़ की कीमत से घाटा होने लगा। कुछ महीने चलने के बाद यह प्रोजेक्ट बंद हो गया।
बिजली के चाक भी मिल सकते हैं कुम्हारों को
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक आमतौर पर कुम्हार एक दिन में बमुश्किल 100 कुल्हड़ बना पाता है, जो कि स्थानीय स्टेशनों की जरूरत के मुताबिक काफी कम साबित होंगे। इसलिए रेलवे चयनित कुम्हारों को बिजली के चाक भी मुहैया करा सकता है, जिससे वह एक दिन में 600 से अधिक कुल्हड़ बना सकेंगे। इसके अलावा खादी ग्रामोद्योग रेलवे के वेंडरों को पत्तियों से बनाए कप, प्लेट और पेपर के थैले भी उपलब्ध कराए जाने पर विचार चल रहा है। इससे यात्रियों को सामान बेचने में वेंडरों को सहूलियत होगी, क्योंकि स्टेशन पर पॉलीथिन भी प्रतिबंधित है।
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उत्तर रेलवे अपने सभी स्टेशनों को प्लास्टिक फ्री करने जा रहा है। रेलवे के सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में वाराणसी और लखनऊ डिवीजन में मिट्टी के बर्तन का प्रयोग करने के लिए रेलवे बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है। इसके बाद बरेली व अन्य स्टेशन प्लास्टिक फ्री किए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक उत्तर रेलवे के सभी स्टेशनों पर प्लास्टिक और कागज का प्रयोग पूरी तौर से प्रतिबंधित होगा। रेलवे बोर्ड के मुताबिक उन्होंने यह फैसला पर्यावरण को ध्यान में रखकर लिया है। यहां बता दें कि बरेली जंक्शन से रोजाना 175 ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें से काफी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलीथिन आदि स्टेशन पर गिराया जाता है।
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वहीं आईआरसीटीसी के अधिकारियों के मुताबिक पेंट्रीकार और आईआरसीटीसी के होटलों में भी जल्द ही खानपान की पैकिंग में बदलाव दिखेगा। अधिकारियों के मुताबिक रोजाना 20 लाख रुपये से ज्यादा के एल्युमिनियम रेपर खाना और नाश्ते की पैकिंग में खर्च होते हैं, लेकिन जल्द ही यह सब पैकिंग बदलकर ईको फ्रेंडली हो जाएंगी। खाना भी ईको फ्रेंडली प्लेटों में परोसा जाएगा। हालांकि सबसे पहले यह बदलाव देश की महत्वपूर्ण ट्रेनों में देखने को मिलेगा।
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15 साल बाद फिर होगी कुल्हड़ों की वापसी
15 साल पहले तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने कुल्हड़ में चाय देने की व्यवस्था कराई थी, इससे कुम्हारों के दिन तो बहुर गए, लेकिन कुल्हड़ का चलन ज्यादा दिन नहीं टिक सका। दरअसल, वेंडरों को कुल्हड़ की कीमत से घाटा होने लगा। कुछ महीने चलने के बाद यह प्रोजेक्ट बंद हो गया।
बिजली के चाक भी मिल सकते हैं कुम्हारों को
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक आमतौर पर कुम्हार एक दिन में बमुश्किल 100 कुल्हड़ बना पाता है, जो कि स्थानीय स्टेशनों की जरूरत के मुताबिक काफी कम साबित होंगे। इसलिए रेलवे चयनित कुम्हारों को बिजली के चाक भी मुहैया करा सकता है, जिससे वह एक दिन में 600 से अधिक कुल्हड़ बना सकेंगे। इसके अलावा खादी ग्रामोद्योग रेलवे के वेंडरों को पत्तियों से बनाए कप, प्लेट और पेपर के थैले भी उपलब्ध कराए जाने पर विचार चल रहा है। इससे यात्रियों को सामान बेचने में वेंडरों को सहूलियत होगी, क्योंकि स्टेशन पर पॉलीथिन भी प्रतिबंधित है।