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डॉक्टर जांच ही गलत करेंगे तो कैसे रुकेंगी मलेरिया से मौतें
Updated Thu, 04 Oct 2018 12:05 AM IST
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मलेरिया पर तमाम प्रयासों के बावजूद काबू न हो पाने में सीएचसी और पीएचसी के स्टाफ की लापरवाही भी बड़ा कारण है। ज्वाइंट डायरेक्टर (हेल्थ) डॉ. सीपी अग्रवाल ने बुधवार को बहेड़ी सीएचसी पर डॉक्टरों को तमिलनाडु की आरडीटी किट से मरीजों की गलत जांच करते पकड़ा। तीन केस की लगातार गलत जांच देखकर जेड़ी भड़क गए। उन्होंने डॉक्टर और फार्मासिस्ट से नाराजगी जताई और फिर उन्हें खुद मरीजों की जांच आरडीटी किट से करके दिखाई। यह लापरवाही मेडिकल स्टाफ को आरडीटी किट के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देने के बावजूद सामने आई है।
सीएचसी पर पहुंचे जेडी को हालात चौंकाने वाले मिले। फैल्सीपेरम की नई किट से गलत तरीके से जांच होते पाई गई। खून के नमूने लेने और उसे किट में जांच के लिए इस्तेमाल करने का तरीका गलत पाया। उन्होंने पूछा कितने मरीजों की गलत जांच कर डाली। इसके बाद उन्होंने आरडीटी किट का सही इस्तेमाल करके स्टाफ को सिखाया। ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ डॉ. सीपी अग्रवाल को बहेड़ी सीएचसी पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिलीं। मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी जा रही थीं। जेडी ने मौके पर ही एक गर्भवती महिला को आयरन और ग्लूकोज बाहर से लिखे जाने पर डॉ. गुंजन और डॉ. हरीश राठौर को फटकार लगाई। ओपीडी के रजिस्टर में भी दवाओं का उपयोग नहीं लिखा जा रहा था। जेडी ने सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला को फोन कर कहा- जब दवाएं बाहर से ही लिखनी हैं तो सरकारी अस्पताल का क्या फायदा। यहां न्यू बॉर्न सिक यूनिट चलती नहीं मिली, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद थे। तमाम गड़बड़ियों के बाद उन्होंने संचारी रोग पखवाड़ा की विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद रुबेला कैंपेन को लेकर भी डायरेक्शन दिए गए। उन्होंने इस बाबत रिपोर्ट एडी (हेल्थ) को सौंपी है।
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सीएचसी पर पहुंचे जेडी को हालात चौंकाने वाले मिले। फैल्सीपेरम की नई किट से गलत तरीके से जांच होते पाई गई। खून के नमूने लेने और उसे किट में जांच के लिए इस्तेमाल करने का तरीका गलत पाया। उन्होंने पूछा कितने मरीजों की गलत जांच कर डाली। इसके बाद उन्होंने आरडीटी किट का सही इस्तेमाल करके स्टाफ को सिखाया। ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ डॉ. सीपी अग्रवाल को बहेड़ी सीएचसी पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिलीं। मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी जा रही थीं। जेडी ने मौके पर ही एक गर्भवती महिला को आयरन और ग्लूकोज बाहर से लिखे जाने पर डॉ. गुंजन और डॉ. हरीश राठौर को फटकार लगाई। ओपीडी के रजिस्टर में भी दवाओं का उपयोग नहीं लिखा जा रहा था। जेडी ने सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला को फोन कर कहा- जब दवाएं बाहर से ही लिखनी हैं तो सरकारी अस्पताल का क्या फायदा। यहां न्यू बॉर्न सिक यूनिट चलती नहीं मिली, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद थे। तमाम गड़बड़ियों के बाद उन्होंने संचारी रोग पखवाड़ा की विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद रुबेला कैंपेन को लेकर भी डायरेक्शन दिए गए। उन्होंने इस बाबत रिपोर्ट एडी (हेल्थ) को सौंपी है।
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