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नगर निगम का टैक्स देते हो तो ही सुनेंगे शिकायत
Updated Wed, 14 Jun 2017 06:13 PM IST
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बरेली।
नगर निगम में टैक्स न देने वाले लोगों को अब नई मुसीबत से गुजरना पड़ेगा। शहर का भला नहीं सोच रहे हैं तो आपका भला भी निगम नहीं सोचेगा। नवनियुक्त नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव ने इस मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने निर्देश जारी किए हैं कि शिकायताें का निस्तारण चाहने वाले लोग अपने साथ टैक्स जमा करने के बाद जो आईडी नंबर मिलता है उसे साथ लेकर आएं। इससे इन इलाकों पर निगम अच्छे से ध्यान दे सकेगा। जहां के लोग टैक्स देने में आनाकानी करते हैं, उनकी शिकायतों के निस्तारण का नंबर बाद में आएगा। इस नियम को और सख्ती से लागू करने के लिए बोर्ड में प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।
नगर निगम के अंतर्गत आने वाली सीमा की कुल आबादी करीब नौ से दस लाख है। इसमें करदाताओं की संख्या करीब 45 हजार के आसपास है। करदाताओं की कम संख्या की वजह से निगम को साल में गृह और जल कर से 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय नहीं होती है। जबकि हर साल करीब तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक का बजट निगम में पास किया जाता है। नगर आयुक्त ने अब टैक्स न देने वालों से निपटने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि शहर में अनाधिकृत कालोनियों में रहने वाले हजाराें लोग टैक्स नहीं देते हैं और समस्या की शिकायत करने में आगे हैं। इनकी समस्या का निस्तारण करने के चक्कर में वे लोग उपेक्षित रह जाते हैं जो टैक्स देते हैं। इसलिए अब उनकी समस्या पहले सुनी जाएगी जो टैक्स देते हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ और कानपुर ने इस नियम के तहत काम करना शुरू कर दिया है।
यह है आईडी नंबर
टैक्स जमा करने पर एक आईडी नंबर जेनरेट होता है। इस नंबर से ही हर बार टैक्स जमा किया जाता है। जब कभी आपको अपने इलाके की समस्या की शिकायत करनी हो तो यह आईडी नंबर देना होगा। अगर टैक्स जमा करते होंगे तो समस्या का निस्तारण प्राथमिकता पर होगा।
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टैक्स का हाल
शहर आबादी 10 लाख
कर के दायरे में 1.5 लाख लोग
करदाता 45 हजार
2013- 14 में वसूली 20 करोड़ रुपये
2014-15 में वसूली 22 करोड़ रुपये
2015-16 में वसूली 24.5 करोड़ रुपये
2016-17 में वसूली 32 करोड़ रुपये से अधिक
(नोट- यह वसूली का आंकड़ा है, जबकि लक्ष्य हर साल 45 करोड़ रुपये से अधिक रहा है।)
शहर में कई अनाधिकृत कालोनियां हैं जहां लोग सुविधाएं नगर निगम की ले रहे हैं, लेकिन टैक्स नहीं देते। ऐसे लोग अब अगर निगम आएं तो आईडी नंबर लेते आएं। इनकी समस्या का निस्तारण जल्दी होगा। यह नियम लखनऊ और कानपुर में लागू है। इसे और सख्त करने की भी कोशिश की जाएगी। -आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
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नगर निगम में टैक्स न देने वाले लोगों को अब नई मुसीबत से गुजरना पड़ेगा। शहर का भला नहीं सोच रहे हैं तो आपका भला भी निगम नहीं सोचेगा। नवनियुक्त नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव ने इस मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने निर्देश जारी किए हैं कि शिकायताें का निस्तारण चाहने वाले लोग अपने साथ टैक्स जमा करने के बाद जो आईडी नंबर मिलता है उसे साथ लेकर आएं। इससे इन इलाकों पर निगम अच्छे से ध्यान दे सकेगा। जहां के लोग टैक्स देने में आनाकानी करते हैं, उनकी शिकायतों के निस्तारण का नंबर बाद में आएगा। इस नियम को और सख्ती से लागू करने के लिए बोर्ड में प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।
नगर निगम के अंतर्गत आने वाली सीमा की कुल आबादी करीब नौ से दस लाख है। इसमें करदाताओं की संख्या करीब 45 हजार के आसपास है। करदाताओं की कम संख्या की वजह से निगम को साल में गृह और जल कर से 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय नहीं होती है। जबकि हर साल करीब तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक का बजट निगम में पास किया जाता है। नगर आयुक्त ने अब टैक्स न देने वालों से निपटने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि शहर में अनाधिकृत कालोनियों में रहने वाले हजाराें लोग टैक्स नहीं देते हैं और समस्या की शिकायत करने में आगे हैं। इनकी समस्या का निस्तारण करने के चक्कर में वे लोग उपेक्षित रह जाते हैं जो टैक्स देते हैं। इसलिए अब उनकी समस्या पहले सुनी जाएगी जो टैक्स देते हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ और कानपुर ने इस नियम के तहत काम करना शुरू कर दिया है।
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यह है आईडी नंबर
टैक्स जमा करने पर एक आईडी नंबर जेनरेट होता है। इस नंबर से ही हर बार टैक्स जमा किया जाता है। जब कभी आपको अपने इलाके की समस्या की शिकायत करनी हो तो यह आईडी नंबर देना होगा। अगर टैक्स जमा करते होंगे तो समस्या का निस्तारण प्राथमिकता पर होगा।
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टैक्स का हाल
शहर आबादी 10 लाख
कर के दायरे में 1.5 लाख लोग
करदाता 45 हजार
2013- 14 में वसूली 20 करोड़ रुपये
2014-15 में वसूली 22 करोड़ रुपये
2015-16 में वसूली 24.5 करोड़ रुपये
2016-17 में वसूली 32 करोड़ रुपये से अधिक
(नोट- यह वसूली का आंकड़ा है, जबकि लक्ष्य हर साल 45 करोड़ रुपये से अधिक रहा है।)
शहर में कई अनाधिकृत कालोनियां हैं जहां लोग सुविधाएं नगर निगम की ले रहे हैं, लेकिन टैक्स नहीं देते। ऐसे लोग अब अगर निगम आएं तो आईडी नंबर लेते आएं। इनकी समस्या का निस्तारण जल्दी होगा। यह नियम लखनऊ और कानपुर में लागू है। इसे और सख्त करने की भी कोशिश की जाएगी। -आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त