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बीमार की नहीं, सरकारी आंकड़ों की सेहत सुधारने पर सबका जोर

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Sun, 09 Dec 2018 01:48 AM IST
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बरेली। गन्ना विभाग के प्रमुख सचिव और शासन से नामित नोडल अफसर संजय भूसरेड्डी ने योगी सरकार की विकास योजनाओं की समीक्षा की। सीएम पोर्टल पर निस्तारित शिकायतों की स्थिति, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल निगम, पीडब्ल्यूडी, राशन, धान खरीद, गन्ना खरीद, नहर, सिंचाई समेत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं पर अफसरों से सवाल किए। कुछ अफसरोें को खराब प्रदर्शन पर खरीखोटी सुनाई तो कई पर चुटीले व्यंग्य करके माहौल को हल्का भी बनाए रखा। अधिकांश विभागों की गहन जानकारी रखने वाले प्रमुख सचिव गन्ना के तमाम सवालों पर अफसर जवाब नहीं दे पाए और बगलें झांकने लगे।
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अपराधियों में न पुलिस का डर न कानून का
विकास भवन सभागार में शनिवार शाम छह से नौ बजे तक हुई समीक्षा में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर प्रमुख सचिव ने कहा कि अपराधियों में न पुलिस का डर है, न ही कानून का। शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं पर काम नहीं हो रहा। एसएसपी को इंगित कर कहा- आप लोगों ने क्या मजाक बना रखा है। बरेली में सांप्रदायिक झगड़े भी हो चुके हैं। नब्बे दिन में चार्जशीट दाखिल होने के सवाल पर जब एसएसपी कोई जवाब नहीं दे पाए तो प्रमुख सचिव ने कहा- जाइए पता करके आइए, फिर हमें बताइए। राजस्व वाद निपटाने में एसडीएम रुचि नहीं लेते। सीएम पोर्टल पर शिकायतें लंबित रखने की आदत है। तीन महीने में एसडीएम के ट्रांसफर हो जाते हैं। तब वह मामले दूसरे एसडीएम के जिम्मे आ जाते हैं। यह नहीं चलेगा। अगर सीएम पोर्टल की शिकायतेें समय से न निपटीं तो कार्रवाई की जाएगी। केवल आंकड़े दुरुस्त रखने से काम नहीं चलेगा। अफसर एयर कंडीशन से निकलकर जनता के बीच जाएं और वहां प्रैक्टिकली समस्याओं को हल करें।

सबसे बुरा हाल स्वास्थ्य विभाग का
एंटी रेबीज वैक्सीन और एंबुलेंस की अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए भुसरेड्डी ने कहा कि सबसे बुरा हाल स्वास्थ्य विभाग का है। एंबुलेंस नहीं चल रहीं। टीवी पर ट्रैक्टर से मरीज ले जाने का लाइव चलते सबने देखा, यह शर्म की बात है। एंटी रेबीज वैक्सीन या दवाइयां जब खत्म हो जाती हैं, तब डिमांड भेजी जाती है। उनको आने में महीना भर लग जाता है। तब तक मरीज चक्कर लगाते रहते हैं। हर माह की एक तारीख को दवाइयों की डिमांड भेजें। प्रमुख सचिव ने सीएमओ से 3.55 करोड़ रुपये से उपकरण खरीदने के लिए 10 आइटमों की डिटेल रविवार तक देने को कहा। बोले, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को कंप्यूटर आपरेटर चला रहा है। पूरा विभाग गूगल पर डलवाइए। खुद मोबाइल पर सब कुछ 24 घंटे देखिए। कंप्यूटर आपरेटर के भरोसे रहना छोड़िए।

केमिकल कम, तेल ज्यादा रखते हैं
नगर निगम के लोग नाले-नालियां साफ नहीं करते। इस वजह से डेंगू, मलेरिया फैलता है। फॉगिंग के नाम पर मिट्टी का तेल ज्यादा रखते हैं, केमिकल कम। फागिंग में केवल धुआं दिखता है। मच्छर नहीं भागते। स्वास्थ्य विभाग के अफसर केवल बिल्डिंग बनवाते रहते हैं, इसका डीएम, सीडीओ तक को पता नहीं होता। 300 बेड, 100 बेड और 50 बेड के अस्पताल चलाने के लिए स्टाफ नहीं है। क्या जो बिल्डिंग बन चुकी हैं, उसकी सूचना सरकार को दी गई। प्रमुख सचिव ने डीएम से कहा कि वह अस्पताल का गहन निरीक्षण करें। आउटसोर्सिंग की टेंडर प्रक्रिया सोनभद्र से मंगवा लें।
 

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