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अवैध निर्माण पर बीडीए की ताबड़तोड़ छापामारी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Tue, 15 May 2018 01:22 AM IST
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मॉडल टाउन-स्टेडियम रोड पर सील बिल्डिंग के अवैध निर्माण पर कार्रवाई न होने से बीडीए उपाध्यक्ष का पारा चढ़ गया। सिस्टम के नाकारापन पर गुस्साए बीडीए उपाध्यक्ष ने जेई, एई और एक्सईएन से पूछा कि शराब कारोबारी के घर में ‘बार’ चलाने के लिए बनने वाली बिल्डिंग का निर्माण सील होने के बाद भी कैसे होता रहा। उनके रहते घर में ‘बार’ चलाने के लिए बिल्डिंग की कंपाउंडिंग नहीं हो सकती। हालांकि इंजीनियरों और स्टाफ ने बीडीए उपाध्यक्ष को बहुत समझाने की कोशिश की कि बिल्डिंग का आवासीय नक्शा 2005 में ही मंजूर हो चुका है। इसे कंपाउंड करके ‘बार’ चलाने के लिए कामर्शियल बनाना है। इसके लिए शराब कारोबारी सब कुछ करने को तैयार हैं।
अमर उजाला ने मॉडल टाउन-स्टेडियम रोड पर निर्माणाधीन ‘बार’ बिल्डिंग सील होने के बावजूद बन जाने का समाचार 14 मई के अंक में प्रकाशित किया था। ‘बार’ बिल्डिंग का आवासीय नक्शा वर्ष 2005 में बीडीए से स्वीकृत कराया गया था। तब इसमें कारोबारी का परिवार रहता था। बीडीए इंजीनियरों की मानें तो बिल्डिंग में लंबे समय से कोई नहीं रह रहा। कारोबारी आवासीय बिल्डिंग को ‘बार’ में तब्दील कर शराब का कारोबार करना चाहते हैं। प्राधिकरण के नियमानुसार आवासीय भवन को किसी अन्य काम में प्रयोग करने के लिए सबसे पहले उसका लैंडयूज (भू-उपयोग) बदलवाना अनिवार्य है, लेकिन शराब कारोबारी ने बिना लैंडयूज बदलवाए आवासीय नक्शे का सहारा लेकर पुरानी बिल्डिंग परिसर में ही ‘बार’ चलाने के लिए बिना व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत कराए नई बिल्डिंग बना डाली। इस काम में बीडीए के छोटे-बड़े इंजीनियरों ने कारोबारी की पूरी मदद की, इसलिए बिल्डिंग दो बार सील होने के बावजूद बनती चली गई। अब बिल्डिंग का निर्माण पूरा हो चुका है। पूरी प्लानिंग के तहत शराब कारोबारी ने ‘बार’ बिल्डिंग की कंपाउंडिंग के लिए आवेदन कर दिया है। इंजीनियर तो कारोबारी का इस तरह से पक्ष लेकर कह रहे हैं कि कंपाउंडिंग की फीस भी आवेदन के साथ आ गई है। अब दो-चार दिन में कंपाउंडिंग करा ही दीजिए। बीडीए उपाध्यक्ष डा. सुरेंद्र कुमार ने इंजीनियरों और स्टाफ के सब तर्कों को खारिज करते हुए कह दिया कि उनके रहते घर में ‘बार’ चलाने के लिए कामर्शियल बिल्डिंग निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। न ही वह प्राधिकरण के नियम विरुद्ध किसी तरह बिल्डिंग की कंपाउंडिंग होने देंगे।
स्टेडियम रोड पर जो बिल्डिंग बनी है, उसे सील किया गया था। उसका आवासीय नक्शा स्वीकृत है। मेरे रहते बिल्डिंग की नियम विरुद्ध कंपाउंडिंग किसी भी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी। - डॉ. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
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अमर उजाला ने मॉडल टाउन-स्टेडियम रोड पर निर्माणाधीन ‘बार’ बिल्डिंग सील होने के बावजूद बन जाने का समाचार 14 मई के अंक में प्रकाशित किया था। ‘बार’ बिल्डिंग का आवासीय नक्शा वर्ष 2005 में बीडीए से स्वीकृत कराया गया था। तब इसमें कारोबारी का परिवार रहता था। बीडीए इंजीनियरों की मानें तो बिल्डिंग में लंबे समय से कोई नहीं रह रहा। कारोबारी आवासीय बिल्डिंग को ‘बार’ में तब्दील कर शराब का कारोबार करना चाहते हैं। प्राधिकरण के नियमानुसार आवासीय भवन को किसी अन्य काम में प्रयोग करने के लिए सबसे पहले उसका लैंडयूज (भू-उपयोग) बदलवाना अनिवार्य है, लेकिन शराब कारोबारी ने बिना लैंडयूज बदलवाए आवासीय नक्शे का सहारा लेकर पुरानी बिल्डिंग परिसर में ही ‘बार’ चलाने के लिए बिना व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत कराए नई बिल्डिंग बना डाली। इस काम में बीडीए के छोटे-बड़े इंजीनियरों ने कारोबारी की पूरी मदद की, इसलिए बिल्डिंग दो बार सील होने के बावजूद बनती चली गई। अब बिल्डिंग का निर्माण पूरा हो चुका है। पूरी प्लानिंग के तहत शराब कारोबारी ने ‘बार’ बिल्डिंग की कंपाउंडिंग के लिए आवेदन कर दिया है। इंजीनियर तो कारोबारी का इस तरह से पक्ष लेकर कह रहे हैं कि कंपाउंडिंग की फीस भी आवेदन के साथ आ गई है। अब दो-चार दिन में कंपाउंडिंग करा ही दीजिए। बीडीए उपाध्यक्ष डा. सुरेंद्र कुमार ने इंजीनियरों और स्टाफ के सब तर्कों को खारिज करते हुए कह दिया कि उनके रहते घर में ‘बार’ चलाने के लिए कामर्शियल बिल्डिंग निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। न ही वह प्राधिकरण के नियम विरुद्ध किसी तरह बिल्डिंग की कंपाउंडिंग होने देंगे।
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स्टेडियम रोड पर जो बिल्डिंग बनी है, उसे सील किया गया था। उसका आवासीय नक्शा स्वीकृत है। मेरे रहते बिल्डिंग की नियम विरुद्ध कंपाउंडिंग किसी भी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी। - डॉ. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
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