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एक करोड़ का नाश्ता, शिक्षकों कोे नकारा
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:44 PM IST
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शिक्षकों की शिकायत के बाद कुलपति पहुंचे मूल्यांकन केंद्र
-शिक्षकों ने घटिया क्वालिटी का नाश्ता देने की शिकायत की थी
-कुलपति बोले, अच्छी क्वालिटी का नाश्ता उपलब्ध कराया जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मूल्यांकन को आए परीक्षकों द्वारा घटिया नाश्ते की शिकायत करने के बाद कुलपति गुरुवार को सभी मूल्यांकन केंद्रों का निरीक्षण करने पहुंचे। कैंटीन भी देखी और जो नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा था उसे भी देखा। कुलपति ने निर्देश दिए कि परीक्षकों को अच्छी क्वालिटी का नाश्ता दिया जाए।
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में हर साल मूल्यांकन में आने वाले परीक्षकों के नाश्ते पर एक करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह पैसा एक तरह से परीक्षकों का ही होता है। एक शिक्षक चालीस हजार रुपये की कॉपियाें का मूल्यांकन कर सकता है। इसका पांच फीसदी हिस्सा टीचर वेलफेयर फंड में जाता है। यही पैसा परीक्षकों के नाश्ते पर खर्च होता। एक शिक्षक पर दो पालियों में साठ रुपये का नाश्ता दिया जाता है। इस बार नाश्ता विश्वविद्यालय की कैंटीन से दिया जा रहा है। परीक्षक कई दिन से इसका विरोध कर रहे हैं। बुधवार को कई सेंटरों के परीक्षक चीफ कोआर्डिनेटर प्रोफेसर एके सरकार से शिकायत की थी। कुलपति को भी शिकायत की थी। कुलपति ने कोआर्डिनेटर से कहा कि उनको नाश्ता का पैसा नहीं दिया जा सकता। परीक्षकों को अब घटिया क्वालिटी का नाश्ता नहीं दिया जाएगा।
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-शिक्षकों ने घटिया क्वालिटी का नाश्ता देने की शिकायत की थी
-कुलपति बोले, अच्छी क्वालिटी का नाश्ता उपलब्ध कराया जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मूल्यांकन को आए परीक्षकों द्वारा घटिया नाश्ते की शिकायत करने के बाद कुलपति गुरुवार को सभी मूल्यांकन केंद्रों का निरीक्षण करने पहुंचे। कैंटीन भी देखी और जो नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा था उसे भी देखा। कुलपति ने निर्देश दिए कि परीक्षकों को अच्छी क्वालिटी का नाश्ता दिया जाए।
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में हर साल मूल्यांकन में आने वाले परीक्षकों के नाश्ते पर एक करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह पैसा एक तरह से परीक्षकों का ही होता है। एक शिक्षक चालीस हजार रुपये की कॉपियाें का मूल्यांकन कर सकता है। इसका पांच फीसदी हिस्सा टीचर वेलफेयर फंड में जाता है। यही पैसा परीक्षकों के नाश्ते पर खर्च होता। एक शिक्षक पर दो पालियों में साठ रुपये का नाश्ता दिया जाता है। इस बार नाश्ता विश्वविद्यालय की कैंटीन से दिया जा रहा है। परीक्षक कई दिन से इसका विरोध कर रहे हैं। बुधवार को कई सेंटरों के परीक्षक चीफ कोआर्डिनेटर प्रोफेसर एके सरकार से शिकायत की थी। कुलपति को भी शिकायत की थी। कुलपति ने कोआर्डिनेटर से कहा कि उनको नाश्ता का पैसा नहीं दिया जा सकता। परीक्षकों को अब घटिया क्वालिटी का नाश्ता नहीं दिया जाएगा।
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