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कमीशनखोरी के चक्कर में लटकाए रखे बजट

Sun, 18 Feb 2018 10:00 AM IST
Updated Sun, 18 Feb 2018 10:00 AM IST
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कमीशनखोरी के चक्कर में लटकाए रखे बजट
बजट दबाए रखना फिर आनन-फानन में खर्च करना.. गड़बड़ तो है कुछ
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रूसा की ग्रांट आखिरी वक्त में हो रही खर्च, यूजीसी का भी आठ करोड़ बाकी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अफसर भी अब सरकारी ग्रांट में खेल करने में माहिर हो गए हैं। ग्रांट को दबाए रखना और फिर आखिरी वक्त में आनन-फानन में खर्च करना, उनकी आदत में शुमार हो गया है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से मिली करोड़ों की ग्रांट लैप्स होने के डर से अब खर्च की जा रही है लेकिन यूजीसी की ग्रांट को अभी तक छुआ नहीं गया है।
रूसा से आठ करोड़ की ग्रांट मिली थी, जिसमें साढ़े तीन करोड़ रुपये तो खर्च हो चुके हैं, लेकिन साढ़े चार करोड़ की ग्रांट अभी खर्च होनी है। हालांकि इसमें भी दो करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुका है। अब बाकी बजट अधिकारियों के लिए मुसीबत बन गया है। 31 जनवरी तक बजट खर्च करना है नहीं तो कुलसचिव पर कार्रवाई होगी। लैब और स्मार्ट क्लास के साथ डिपार्टमेंटल लाइब्रेरी की ग्रांट खर्च नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि विभागों की आपसी खींचतान और कमीशन के चक्कर में किताबों की खरीद प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। कुछ लोगों ने जानबूझकर प्रक्रिया लटकाई ताकि उनकी मंशा पूरी हो सके। हालांकि विभागों का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं, सप्लाई नहीं हुई इसलिए प्रक्रिया लंबी चली।
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ग्रांट स्वीकृत, प्रस्ताव के चक्कर में नहीं हुई खर्च
एमेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के लिए यूजीसी से शैक्षिक सत्र 2012-13 में आठ करोड़ की ग्रांट स्वीकृत हुई थी। इस ग्रांट का उपयोग विश्वविद्यालय के विकास और एकेडमिक सुधार के लिए किया जाना था। 2017 तक विश्वविद्यालय इस ग्रांट का एक फीसदी भी खर्च नहीं कर सका। हालांकि ग्रांट खर्च करने की सीमा अब 2019 तक बढ़ा दी गई है। सूत्रों की माने तो इस ग्रांट को आसानी से खर्च नहीं कर सकते इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन और विभाग प्रस्ताव भेजने से पीछे हट रहे हैं।
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वर्जन
बजट कब आया और क्यों खर्च नहीं हो पाया, इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। समय सीमा आई तो उसके भीतर ग्रांट खर्च करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। - एके अरविंद, कुलसचिव
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