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दस रुपये का सिक्का लेने से इंकार करने पर होगी जेल
Updated Fri, 21 Jul 2017 01:21 AM IST
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10 रुपये का सिक्का
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अगर आपने भारतीय प्रचलित मुद्रा दस रुपये का सिक्का लेने से इंकार किया तो जेल की हवा खाना पड़ सकती है। बैंक प्रबंधन ने कहा है कि भारतीय करेंसी लेने से मना करना जघन्य अपराध है। ऐसे मामले में लोग सीधे संबंधित थाना में परिवाद दर्ज करा सकते हैं।
एक बार फिर बाजार में दुकानदार दस रुपये के सिक्के लेने से इंकार करने लगे हैं, इस पर आए दिन विवाद हो रहे हैं। आटो वालों से कहासुनी होने लगी है। अफवाह फैलाई जा रही है कि यह सिक्का बंद हो गया है। हकीकत में 10 रुपये का कोई भी सिक्का बंद नहीं हुआ है। सब्जी मंडी में इन सिक्कों का आदान-प्रदान बड़ी संख्या में हो रहा है। उधर, बैंकों ने कहा है कि दस रुपये का सिक्का कोई नकली नहीं है और ना ही बंद किया गया है। इसलिए इसे लेने से मना करने वालोें पर मुकदमा दर्ज हो सकता है।
दुकानदारों पर लगा ढेर
दस रुपये का सिक्का भारी होता है, इसलिए ज्यादातर लोग इसे लेने से बचते हैं। बाजारों में दस रुपये वाला सिक्का दुकानदार आपस में ही सर्कुलेट कर रहे हैं। वे सौ, दो सौ और पांच रुपये के पैकेट बनाकर आपस में आदान-प्रदान करते हैं।
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सभी सिक्के मान्य
दो प्रकार के दस रुपये के सिक्के बाजार में मौजूद हैं। एक पर रुपये का चिह्न अंकित है, तो दूसरे पर दस रुपया लिखा है। लोग इस पर असली-नकली होने का भ्रम फैला रहे हैं। एसबीआई के मुख्य प्रबंधक सुनील शर्मा ने बताया कि भारतीय टक्साल से जारी सभी सिक्के वैध हैं, इन्हें लेने से इंकार करना जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।
इंकार करना पड़ सकता है भारी
भारतीय मुद्रा लेने से मना करना आप पर भारी पड़ सकता है। एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारी आरके गौड़ बताते हैं कि इसकी लिखित शिकायत संबंधित थाना में दर्ज कराई जा सकती है। क्योंकि प्रचलित मुद्रा लेने से मना करना अथवा तिरस्कार करना आईपीसी धारा 124 ए में आता है। परिवादकर्ता संबंधित थाना में दुकानदार के खिलाफ इस धारा में मुकदमा दर्ज करा सकता है।
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अगर आपने भारतीय प्रचलित मुद्रा दस रुपये का सिक्का लेने से इंकार किया तो जेल की हवा खाना पड़ सकती है। बैंक प्रबंधन ने कहा है कि भारतीय करेंसी लेने से मना करना जघन्य अपराध है। ऐसे मामले में लोग सीधे संबंधित थाना में परिवाद दर्ज करा सकते हैं।
एक बार फिर बाजार में दुकानदार दस रुपये के सिक्के लेने से इंकार करने लगे हैं, इस पर आए दिन विवाद हो रहे हैं। आटो वालों से कहासुनी होने लगी है। अफवाह फैलाई जा रही है कि यह सिक्का बंद हो गया है। हकीकत में 10 रुपये का कोई भी सिक्का बंद नहीं हुआ है। सब्जी मंडी में इन सिक्कों का आदान-प्रदान बड़ी संख्या में हो रहा है। उधर, बैंकों ने कहा है कि दस रुपये का सिक्का कोई नकली नहीं है और ना ही बंद किया गया है। इसलिए इसे लेने से मना करने वालोें पर मुकदमा दर्ज हो सकता है।
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दुकानदारों पर लगा ढेर
दस रुपये का सिक्का भारी होता है, इसलिए ज्यादातर लोग इसे लेने से बचते हैं। बाजारों में दस रुपये वाला सिक्का दुकानदार आपस में ही सर्कुलेट कर रहे हैं। वे सौ, दो सौ और पांच रुपये के पैकेट बनाकर आपस में आदान-प्रदान करते हैं।
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सभी सिक्के मान्य
दो प्रकार के दस रुपये के सिक्के बाजार में मौजूद हैं। एक पर रुपये का चिह्न अंकित है, तो दूसरे पर दस रुपया लिखा है। लोग इस पर असली-नकली होने का भ्रम फैला रहे हैं। एसबीआई के मुख्य प्रबंधक सुनील शर्मा ने बताया कि भारतीय टक्साल से जारी सभी सिक्के वैध हैं, इन्हें लेने से इंकार करना जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।
इंकार करना पड़ सकता है भारी
भारतीय मुद्रा लेने से मना करना आप पर भारी पड़ सकता है। एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारी आरके गौड़ बताते हैं कि इसकी लिखित शिकायत संबंधित थाना में दर्ज कराई जा सकती है। क्योंकि प्रचलित मुद्रा लेने से मना करना अथवा तिरस्कार करना आईपीसी धारा 124 ए में आता है। परिवादकर्ता संबंधित थाना में दुकानदार के खिलाफ इस धारा में मुकदमा दर्ज करा सकता है।