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विवि को मालूम नहीं, एजेंसी ने सौ रुपये ज्यादा वसूल ली फीस
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बरेली। इस बार विश्वविद्यालय के परीक्षा फॉर्म में तमाम गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। ताजा मामला एमएड का सामने आया है। विश्वविद्यालय की जानकारी के बगैर एजेंसी ने परीक्षा फॉर्म के सौ रुपये ज्यादा वसूल लिए। हालांकि, एजेंसी ने इसका ठीकरा बैंक पर फोड़ा। अब बैंक से रिकॉर्ड मांगा गया है। मंगलवार को बरेली कॉलेज के विद्यार्थियों ने मामले में परीक्षा नियंत्रक का घेराव किया।
एमएड के छात्रों की शिकायत थी कि तीन दिन में तीन बार परीक्षा फीस बदली। किसी विद्यार्थी से 1750 तो किसी से 2650 और कुछ विद्यार्थियों से 2750 रुपये फीस ले ली। परीक्षा नियंत्रक का कहना था कि परीक्षा फीस 1750 रुपये है, लेकिन इसमें विकास और अन्य शुल्क जुड़ा है, लेकिन सब फीस मिलाकर 2650 रुपये बनती है। विद्यार्थियों का कहना था कि कइयों से 2750 रुपये फीस ली गई। दरअसल, एमएड की फीस में ही गड़बड़ी हो गई। बरेली कॉलेज ने विकास शुल्क पहले ही वसूल लिया। करीब नौ सौ रुपये एडमिशन के दौरान कॉलेज ने लिया जबकि वो फीस परीक्षा शुल्क में जुड़नी चाहिए। हैरानी इस बात पर रही कि सौ रुपये कैसे बढ़ गए। परीक्षा नियंत्रक ने एजेंसी से बात की तो उन्होंने इसका जिम्मेदार बैंक को बताया। विश्वविद्यालय की अनुमति के बगैर ही छात्रों से सौ रुपये ज्यादा वसूली की जा रही है। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने बताया कि बैंक से रिकॉर्ड मांगे हैं कि आखिर सौ रुपये किस बात के ज्यादा कट रहे हैं। वहीं, विकास शुल्क कॉलेज से वापस लेने का कहा गया है।
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एमएड के छात्रों की शिकायत थी कि तीन दिन में तीन बार परीक्षा फीस बदली। किसी विद्यार्थी से 1750 तो किसी से 2650 और कुछ विद्यार्थियों से 2750 रुपये फीस ले ली। परीक्षा नियंत्रक का कहना था कि परीक्षा फीस 1750 रुपये है, लेकिन इसमें विकास और अन्य शुल्क जुड़ा है, लेकिन सब फीस मिलाकर 2650 रुपये बनती है। विद्यार्थियों का कहना था कि कइयों से 2750 रुपये फीस ली गई। दरअसल, एमएड की फीस में ही गड़बड़ी हो गई। बरेली कॉलेज ने विकास शुल्क पहले ही वसूल लिया। करीब नौ सौ रुपये एडमिशन के दौरान कॉलेज ने लिया जबकि वो फीस परीक्षा शुल्क में जुड़नी चाहिए। हैरानी इस बात पर रही कि सौ रुपये कैसे बढ़ गए। परीक्षा नियंत्रक ने एजेंसी से बात की तो उन्होंने इसका जिम्मेदार बैंक को बताया। विश्वविद्यालय की अनुमति के बगैर ही छात्रों से सौ रुपये ज्यादा वसूली की जा रही है। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने बताया कि बैंक से रिकॉर्ड मांगे हैं कि आखिर सौ रुपये किस बात के ज्यादा कट रहे हैं। वहीं, विकास शुल्क कॉलेज से वापस लेने का कहा गया है।
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