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Barabanki News: गाजे-बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा
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बाराबंकी शहर में सोमवार को भगवान चन्द्रप्रभु व भगवान पार्श्वनाथ की जन्म जयंती के अवसर पर निकाली ?
- फोटो : BARABANKI
बाराबंकी। आर्यिका ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में भगवान चंद्रप्रभु व पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक दिगंबर जैन मंदिर में धूमधाम से मनाया गया। सोमवार को सुबह 10 बजे दिगंबर जैन मंदिर से गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई जो नागेश्वरनाथ, सट्टी बाजार, घंटाघर व छाया चौराहे होते हुए पुन: मंदिर पहुुंची।
घोड़े, बग्घी व गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा में श्रद्धालु भावपूर्ण नृत्य करते हुए आगे बढ़ते रहे। शोभायात्रा में कलाकारों ने राधा-कृष्ण, मयूर नृत्य किया तो जयकारों संग श्रद्धालु भी झूमते नजर आए। सिर पर साफा बांधे महिलाएं स्कूटी से आगे चल रही थीं। रास्ते में जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा से सड़क गुलाब व गेंदा की पंखुड़ियों से पट गई। शोभायात्रा निकलने वाले मार्ग में जैन श्रद्धालुओं ने अपने घर के सामने रंगोली बनाई और पार्श्वनाथ की आरती उतारी।
चंदना मति माताजी व स्वामी रविंद्र कीर्ति ने कहा कि भारत की संस्कृति अहिंसा की संस्कृति है। हमें यह संस्कार दिया गया है। हमें किसी भी जीव को हिंसा के माध्यम से परेशान नहीं करना है। चाहे वह हिंसा किसी भी रूप में हो, चाहे शारीरिक, मानसिक व शाब्दिक आदि।
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जैन धर्म की शोभायात्रा है और श्याम प्रभु की भी पालकी यात्रा है, परंतु यह संस्कार ही है कि दोनों समाज आपस में सामंजस्य मिलाकर काम कर रहे हैं। इस मौके पर दीपचंद गंगवाल, अंकुर जैन, कमलेश जैन, महावीर गंगवाल, निर्मल बाकलीवाल, सौरभ जैन, विजय जैन आदि मौजूद रहे।
घर के बाहर बनाई रंगोली, उतारी आरती
फतेहपुर (बाराबंकी)। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ एवं आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु के जन्म कल्याणक महोत्सव पर सोमवार को श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आयोजन हुुआ। सुबह सात बजे से भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक व विश्व कल्याणकारी शांतिधारा की गई। इसके बाद भगवान की प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ बड़ा जैन मंदिर से महावीर मार्ग से होते हुए श्री महावीर जैन चैत्यालय ले जाया गया, जहां सभी ने अपने-अपने घरों के बाहर रंगोली बनाकर जिनेंद्र भगवान की आरती उतारी। इस मौके पर प्रांशु जैन, आलोक जैन, पवन जैन, लल्ला जैन, जयंत जैन, विजय जैन, ऋषभ जैन आदि मौजूद रहे।
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घोड़े, बग्घी व गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा में श्रद्धालु भावपूर्ण नृत्य करते हुए आगे बढ़ते रहे। शोभायात्रा में कलाकारों ने राधा-कृष्ण, मयूर नृत्य किया तो जयकारों संग श्रद्धालु भी झूमते नजर आए। सिर पर साफा बांधे महिलाएं स्कूटी से आगे चल रही थीं। रास्ते में जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा से सड़क गुलाब व गेंदा की पंखुड़ियों से पट गई। शोभायात्रा निकलने वाले मार्ग में जैन श्रद्धालुओं ने अपने घर के सामने रंगोली बनाई और पार्श्वनाथ की आरती उतारी।
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चंदना मति माताजी व स्वामी रविंद्र कीर्ति ने कहा कि भारत की संस्कृति अहिंसा की संस्कृति है। हमें यह संस्कार दिया गया है। हमें किसी भी जीव को हिंसा के माध्यम से परेशान नहीं करना है। चाहे वह हिंसा किसी भी रूप में हो, चाहे शारीरिक, मानसिक व शाब्दिक आदि।
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जैन धर्म की शोभायात्रा है और श्याम प्रभु की भी पालकी यात्रा है, परंतु यह संस्कार ही है कि दोनों समाज आपस में सामंजस्य मिलाकर काम कर रहे हैं। इस मौके पर दीपचंद गंगवाल, अंकुर जैन, कमलेश जैन, महावीर गंगवाल, निर्मल बाकलीवाल, सौरभ जैन, विजय जैन आदि मौजूद रहे।
घर के बाहर बनाई रंगोली, उतारी आरती
फतेहपुर (बाराबंकी)। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ एवं आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु के जन्म कल्याणक महोत्सव पर सोमवार को श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आयोजन हुुआ। सुबह सात बजे से भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक व विश्व कल्याणकारी शांतिधारा की गई। इसके बाद भगवान की प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ बड़ा जैन मंदिर से महावीर मार्ग से होते हुए श्री महावीर जैन चैत्यालय ले जाया गया, जहां सभी ने अपने-अपने घरों के बाहर रंगोली बनाकर जिनेंद्र भगवान की आरती उतारी। इस मौके पर प्रांशु जैन, आलोक जैन, पवन जैन, लल्ला जैन, जयंत जैन, विजय जैन, ऋषभ जैन आदि मौजूद रहे।

बाराबंकी के फतेहपुर कस्बे में भगवान चन्द्रप्रभु व भगवान पार्श्वनाथ की जन्म जयंती के अवसर पर निक?- फोटो : BARABANKI