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सोनभद्र के ग्रामीणों ने कायम की मिसाल: 38 गांव के लोगों ने बचाया 2070 हेक्टेयर जंगल, शिफ्ट में देते हैं पहरा
Tue, 13 Oct 2026 05:21 AM IST
Digvijay Singh
कौशलेंद्र पांडेय,अमर उजाला, वाराणसी
कौशलेंद्र पांडेय,अमर उजाला, वाराणसी
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 13 Oct 2026 05:21 AM IST
सार
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के आदिवासी पर्यावरण प्रहरी बन जंगल बचाने की मुहिम से जुटे हैं। 15 साल पहले शुरू हुई मुहिम से 38 गांवों के 3500 से ज्यादा ग्रामीण जुड़ चुके हैं और उन्होंने 2070 हेक्टेयर जंगल का संरक्षण किया है।
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ग्रामीणों ने कायम की मिसाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के आदिवासी पर्यावरण प्रहरी बन जंगल बचाने की मुहिम से जुटे हैं। 15 साल पहले शुरू हुई मुहिम से 38 गांवों के 3500 से ज्यादा ग्रामीण जुड़ चुके हैं और उन्होंने 2070 हेक्टेयर जंगल का संरक्षण किया है।
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जंगल की निगरानी के लिए गांवों में वन विभाग के वाचर के साथ तीन-तीन ग्रामीण शिफ्ट में पहरा देते हैं। चरवाहे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल देते हैं। रास्तों पर बैरियर लगाए गए हैं। अवैध कटान होने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचते हैं और पेड़ काटने वालों को कुल्हाड़ी छोड़ने की चेतावनी देते हैं। ग्रामीणों की सख्त पहरेदारी से पेड़ों की अवैध कटान रुकी है। दुद्धी ब्लॉक के कर्री गांव में करीब 300 परिवार हैं। यहां के 80 परिवार वन संरक्षण के कार्य से जुड़े हैं। ग्राम स्वराज समिति की ओर से वर्ष 2011 में गांव में 20 हेक्टेयर जंगल से शुरू हुई मुहिम का दायरा बढ़कर 185 हेक्टेयर तक पहुंच गया।
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पहाड़ी इलाकों में लौटी हरियाली
वीरान हो चुकी पहाड़ियों पर ग्रामीणों के प्रयास से हरियाली लौट रही है। जंगल से ग्रामीणों को चूल्हे के लिए ईंधन, पशुओं के लिए चारा और आंधी में टूट कर गिरी पेड़ों की टहनियों से घरों के लिए उपयोगी लकड़ी मिलती है। नए पौधों को नुकसान से बचाने के लिए पौधरोपण वाले क्षेत्र में पांच साल तक मवेशियों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। हालांकि, अवैध कटान का खतरा बना रहता है।
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कहीं इमारती लकड़ियां तो कहीं फलदार पौधे
कर्री गांव के जंगल में सागौन, खैर, शीशम, सिरस, अरुण, कंजी, सेमिया, सहिजन, आंवला और बांस सहित कई प्रजातियों के पेड़ हैं। कोन ब्लॉक के पिपरहर क्षेत्र में भरहुल और सिद्धा के पेड़ों का संरक्षण किया गया है। जुगैल क्षेत्र में साखू, सागौन और कहुआ सहित इमारती लकड़ियों वाले जंगल सुरक्षित किए गए हैं।