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पीएम मोदी को हरिश्चंद्र की चिया की खेती अच्छी लगी
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बाराबंकी। देश की माटी के प्रति कर्नल हरिश्चंद्र के अनुराग व उनकी मेेेहनत को रविवार को पंख लगे जब पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में एक बार फिर से जिले का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने बाराबंकी का जिक्र करते हुए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में किसान हरिश्चंद्र की ‘चिया’ की खेती की सराहना की।
इसे लेकर जहां रिटायर्ड कर्नल काफी गदगद हैं, वहीं डीएम डॉ. आदर्श सिंह ने भी इसके लिए ट्वीट कर पीएम का आभार जताया। डीएम ने कहा कि डेढ़ वर्ष में यह चौथा अवसर है जब पीएम ने देश के साथ बाराबंकी की दास्तां साझा की।
अमेरिका व चीन में पैदा होने वाली चिया की खेती उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के अमसेरुवा गांव निवासी किसान हरिश्चंद्र ने शुरू की। आर्मी में 30 साल की सेवा के बाद दिसंबर 2015 में रिटायर्ड कर्नल हरिश्चंद्र सिंह गांव आए तो पहले उन्होंने एक साल तक राजधानी के एक कॉलेज में प्राइवेट नौकरी की। मगर, इस काम में उन्हें मजा नहीं आया। वापस गांव लौट आए और तीन एकड़ जमीन खरीदी अपने ढंग से अलग प्रकार की खेती शुुरू की।
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काला गेहूं, ड्रैगन फ्रूट, ग्रीन व रेड एप्पल और बेर की खेती शुरू की। इसी दौरान सुल्तानपुर में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी की नौकरी मिल गई। इसके बावजूद खेतीबाड़ी में कुछ अलग करने की उनकी इच्छा शक्ति को और बल मिल गया। उन्होंने अमेरिका व चीन में पैदा होनी वाली चिया का उत्पादन करने की ठानी। उन्होंने ऑनलाइन सात सौ ग्राम चिया सीड मंगाकर आधे एकड़ मेें बुआई कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए।
पीएम ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि भारत में चिया को ज्यादातर बाहर से मंगाया जाता है। स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े लोग इसे काफी महत्व देते हैं। दुनिया में इसकी काफी मांग भी है। ऐसे ही बाराबंकी के हरिश्चंद्र ने चिया की खेती शुरू की है इससे उनकी आय बढ़ेगी और यह खेती आत्मनिर्भर भारत अभियान में मदद भी करेगी।
कर्नल हरिश्चंद्र बताते हैं कि चिया (सुपर फूड) अलसी से सुपीरियर है। इसमें एंटी आक्सीडेंट पाए जाने से यह रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ एनर्जी बढ़ता है। ऐसे में नई पीढ़ी के लोग अमेरिका व चीन से ऑनलाइन मंगाकर चिया से खीर, हलवा आदि बनाकर प्रयोग करते हैं। विभिन्न कंपनियों का चिया सीड 12 सौ से दो हजार रुपये प्रति किलो तक मिलता है। रबी के सीजन में इसकी बुआई की जाती है।
फसल तैयार होने में चार माह का समय लगता है। इसमें लागत बहुत कम आती है और मुनाफा अधिक होता है। कर्नल हरिश्चंद्र बताते हैं कि आधा एकड़ में उनकी कुल लागत पांच हजार रुपये आई है जबकि 30 किलो सीड्स का उत्पादन होने से करीब 40 से 50 हजार का शुद्ध मुनाफा होगा। इसकी खेती के लिए जलवायु हल्की ठंडी अनुकूल है।
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इसे लेकर जहां रिटायर्ड कर्नल काफी गदगद हैं, वहीं डीएम डॉ. आदर्श सिंह ने भी इसके लिए ट्वीट कर पीएम का आभार जताया। डीएम ने कहा कि डेढ़ वर्ष में यह चौथा अवसर है जब पीएम ने देश के साथ बाराबंकी की दास्तां साझा की।
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अमेरिका व चीन में पैदा होने वाली चिया की खेती उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के अमसेरुवा गांव निवासी किसान हरिश्चंद्र ने शुरू की। आर्मी में 30 साल की सेवा के बाद दिसंबर 2015 में रिटायर्ड कर्नल हरिश्चंद्र सिंह गांव आए तो पहले उन्होंने एक साल तक राजधानी के एक कॉलेज में प्राइवेट नौकरी की। मगर, इस काम में उन्हें मजा नहीं आया। वापस गांव लौट आए और तीन एकड़ जमीन खरीदी अपने ढंग से अलग प्रकार की खेती शुुरू की।
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काला गेहूं, ड्रैगन फ्रूट, ग्रीन व रेड एप्पल और बेर की खेती शुरू की। इसी दौरान सुल्तानपुर में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी की नौकरी मिल गई। इसके बावजूद खेतीबाड़ी में कुछ अलग करने की उनकी इच्छा शक्ति को और बल मिल गया। उन्होंने अमेरिका व चीन में पैदा होनी वाली चिया का उत्पादन करने की ठानी। उन्होंने ऑनलाइन सात सौ ग्राम चिया सीड मंगाकर आधे एकड़ मेें बुआई कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए।
पीएम ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि भारत में चिया को ज्यादातर बाहर से मंगाया जाता है। स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े लोग इसे काफी महत्व देते हैं। दुनिया में इसकी काफी मांग भी है। ऐसे ही बाराबंकी के हरिश्चंद्र ने चिया की खेती शुरू की है इससे उनकी आय बढ़ेगी और यह खेती आत्मनिर्भर भारत अभियान में मदद भी करेगी।
कर्नल हरिश्चंद्र बताते हैं कि चिया (सुपर फूड) अलसी से सुपीरियर है। इसमें एंटी आक्सीडेंट पाए जाने से यह रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ एनर्जी बढ़ता है। ऐसे में नई पीढ़ी के लोग अमेरिका व चीन से ऑनलाइन मंगाकर चिया से खीर, हलवा आदि बनाकर प्रयोग करते हैं। विभिन्न कंपनियों का चिया सीड 12 सौ से दो हजार रुपये प्रति किलो तक मिलता है। रबी के सीजन में इसकी बुआई की जाती है।
फसल तैयार होने में चार माह का समय लगता है। इसमें लागत बहुत कम आती है और मुनाफा अधिक होता है। कर्नल हरिश्चंद्र बताते हैं कि आधा एकड़ में उनकी कुल लागत पांच हजार रुपये आई है जबकि 30 किलो सीड्स का उत्पादन होने से करीब 40 से 50 हजार का शुद्ध मुनाफा होगा। इसकी खेती के लिए जलवायु हल्की ठंडी अनुकूल है।