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फूलों की होली व मयूर नृत्य देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Mon, 24 Oct 2016 11:55 PM IST
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फूलों की होली देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
- फोटो : अमर उजाला
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देवा महोत्सव के ऑडिटोरियम में सोमवार की शाम लोक नृत्य की रंगोली के नाम रही। कथक एवं पारंपरिक लोकनृत्य के सामंजस्य व कलाकारों का नृत्य देख सभी मंत्रमुग्ध हो गए। मशहूर कथक नृत्यांगना गीतांजली शर्मा एवं ग्रुप द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विवाह गीत, मयूर नृत्य व फूलों की होली लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।
सांस्कृतिक मंच पर धमाकेदार एक से बढ़कर एक गीताें व नृत्य की प्रस्तुति ने वातावरण कान्हामय कर दिया। प्रियंका सिंह, सरिता पाल, सुष्मिता मिश्रा, दीप्ती कुमारी आदि नृत्यांगनाओं के विवाह गीत, मंडप, मेंहदी, भांवर, विदाई, नकटा, सोहर एवं नृत्य ने खूब समां बांधा।
हरे बांस छाए.., हरयाली के गोरे-गोर हाथ.., मनभांवर सिया जी के संग.., अरी-अरी बेटी प्यारी रानी.., कउने देश का गजरा.., ऐसे बरखा में बदरिया घनघोर.. गीतों पर नृत्यांगनाआें व कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भावनृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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जुग-जुग जियो हो ललनवा.. सोहर की खूब सराहना हुई। नृत्यांगनाओं ने जब मयूर नृत्य प्रस्तुत किया तो पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लोग अपने स्थानों से खड़े हो मयूर नृत्य देखने लगे।
नृत्य के दौरान रंग-बिरंगी लाइटिंग के बीच नृत्यांगनाओं की आभा देखते ही बन रही थी। नृत्यांगनाओं ने कथक नृत्य के जरिए गीतों के भावों को प्रकट किया। इस दौरान कथक नृत्य देख भीड़ से भरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नृत्यांगनाओं की हर मोहक प्रस्तुति ने लोगों एकटक देखने को मजबूर कर दिया।
वहीं डॉ. मालविका ने गजल प्रस्तुत कर लोगाें का मनजीत लिया। कथक नृत्यांगना एवं बृजगीतों की मशहूर कलाकार गीतांजली शर्मा की फूलों की होली ने खूब समा बांधा। भावपूर्ण कलात्मक नृत्य व फूलों की होली से वातावरण कान्हामय हो गया। देर शाम तक चले कार्यक्रम में मनोहारी भावपूर्ण नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया।
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सांस्कृतिक मंच पर धमाकेदार एक से बढ़कर एक गीताें व नृत्य की प्रस्तुति ने वातावरण कान्हामय कर दिया। प्रियंका सिंह, सरिता पाल, सुष्मिता मिश्रा, दीप्ती कुमारी आदि नृत्यांगनाओं के विवाह गीत, मंडप, मेंहदी, भांवर, विदाई, नकटा, सोहर एवं नृत्य ने खूब समां बांधा।
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हरे बांस छाए.., हरयाली के गोरे-गोर हाथ.., मनभांवर सिया जी के संग.., अरी-अरी बेटी प्यारी रानी.., कउने देश का गजरा.., ऐसे बरखा में बदरिया घनघोर.. गीतों पर नृत्यांगनाआें व कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भावनृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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जुग-जुग जियो हो ललनवा.. सोहर की खूब सराहना हुई। नृत्यांगनाओं ने जब मयूर नृत्य प्रस्तुत किया तो पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लोग अपने स्थानों से खड़े हो मयूर नृत्य देखने लगे।
नृत्य के दौरान रंग-बिरंगी लाइटिंग के बीच नृत्यांगनाओं की आभा देखते ही बन रही थी। नृत्यांगनाओं ने कथक नृत्य के जरिए गीतों के भावों को प्रकट किया। इस दौरान कथक नृत्य देख भीड़ से भरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नृत्यांगनाओं की हर मोहक प्रस्तुति ने लोगों एकटक देखने को मजबूर कर दिया।
वहीं डॉ. मालविका ने गजल प्रस्तुत कर लोगाें का मनजीत लिया। कथक नृत्यांगना एवं बृजगीतों की मशहूर कलाकार गीतांजली शर्मा की फूलों की होली ने खूब समा बांधा। भावपूर्ण कलात्मक नृत्य व फूलों की होली से वातावरण कान्हामय हो गया। देर शाम तक चले कार्यक्रम में मनोहारी भावपूर्ण नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया।