जेल में फर्जी मंत्री इकबाल को पीटा
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बाराबंकी। फर्जी मंत्री इकबाल के दिन खराब चल रहे। अहमदपुर टोल प्लाजा पर फायरिंग व जानलेवा हमले में फजीहत के बाद अब जेल में भी इकबाल को दुर्दशा झेलनी पड़ रही है। सोमवार रात सोने के लिए रौब गांठने पर सजायाफ्ता कैदियों ने इकबाल की जमकर धुनाई कर दी। हैरत की बात यह कि बीस मिनट कैदियों ने बेखौफ बैरक में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, मगर कोई उसे बचाने आगे नहीं आया। सूचना पर जेल अफसर मौके पर पहुंचते तब तक इकबाल के कपड़े फट गए। फिलहाल अफसरों ने बीच-बचाव कर झगड़ा शांत कराया। हालांकि, जेल अधीक्षक ने कहासुनी की बात तो स्वीकारी, मगर मारपीट से इंकार किया है।
बताते चले कि जैदपुर थाना क्षेत्र मेें अहमदपुर टोल प्लाजा पर बीते 8 जून को हुए विवाद व फायरिंग कर दहशत फैलाने के मामले में लखनऊ के नख्खास निवासी फर्जी मंत्री इकबाल को पुलिस ने बीते 18 जून को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमला, जान से मारने की धमकी, बलवा व सेवन क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट समेत कई धारा में रिपोर्ट दर्ज है। इकबाल को लखनऊ से पकड़ा गया था। जेल के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो जेल में निरुद्ध इकबाल के साथी रिजवान व जोगिंदर को दूसरी बैरक में रखा गया है। जबकि, इकबाल को कारागार के बैरक नंबर 14 बी में बंद किया गया था, मगर अचानक सुविधा के नाम पर इकबाल को वीआईपी मानी जाने वाली बैरक 9 में सजायाफ्ता कैदियों के साथ शिफ्ट कर दिया गया। सोमवार रात जेल बंद होने के बाद 11 बजे कैदी सोने की तैयारी कर रहे थे। तभी सोने को लेकर इकबाल की सजायाफ्ता कैदियों से कहासुनी हो गई। इकबाल ने कैदियों पर अपनी पहुंच का रौब गांठते हुए कुछ अपशब्द कहे जिस पर कैदी इकबाल पर टूट पड़े और बीस मिनट तक बैरक में इकबाल को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। खास बात यह कि इस दौरान इकबाल को बचाने कोई आगे नहीं आया। सूचना पर जेल अफसर मौके पर पहुंचते तब तक इकबाल के कपड़े फट गए। फिलहाल अफसरों ने बीच-बचाव कर झगड़ा शांत कराया।
बड़े अफसर के इशारे पर की गई धुनाई!
जेल में इकबाल की पिटाई सुनियोजित तो नहीं थी जिस तरह 14 नंबर बैरक से इकबाल को सुविधा दिलाने के नाम पर अचानक नौ नंबर वीआईपी बैरक में सजायाफ्ता कैदियों के साथ बंद किया गया। उससे साजिश की बू आ रही है। चर्चा है कि जिले के एक बड़े अफसर के इशारे पर इकबाल के साथ अभद्रता की गई है। दरअसल, जिन कैदियों ने इकबाल के साथ अभद्रता की है, वह अपने अच्छे आचरण के कारण ही बाराबंकी जिला जेल में लंबरदार की भूमिका में हैं। यह कैदी जेल प्रशासन के सबसे ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं। नियमानुसार जिला जेल में उन्हीं सजायाफ्ता कैदियों को रुकने की इजाजत मिलती है जिन पर जेल प्रशासन मुहर लगाता है। अन्य सजायाफ्ता बंदियों को वाराणसी सेंट्रल जेल स्थानांतरित कर दिया जाता है।
बदलते रहे बैरक
सूत्रों की मानें तो इकबाल को जेल में कैदियों द्वारा सोमवार रात पिटाई करने के बाद इकबाल को रात में जेल की दूसरी बैरक में रखा गया। इसके बाद मंगलवार सुबह एक बार फिर इकबाल को उसी बैरक में भेज दिया गया। इसके बाद मंगलवार को इकबाल से मिलने जब उसके परिवारीजन व अधिवक्ता पहुंचे तो इसकी जानकारी उनको दी गई।
जेल में निरुद्ध इकबाल को बैरक नंबर 14 बी में रखा गया है। सोमवार रात इकबाल व कुछ कैदियों से मामूली कहासुनी हो गई थी। जेल में इकबाल के साथ मारपीट जैसी कोई बात नहीं हुई है।
- अशोक सागर, जेल अधीक्षक