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तराई में उफान मार रहा नेपाली पानी
Updated Sun, 26 Aug 2018 12:06 AM IST
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नेपाल के पानी से तराई मेें फिर मंडराया संकट
बाराबंकी। नेपाल के बैराजों से लगातार पानी छोड़ने की वजह से घाघरा नदी उफान मार रही है। नेपाल ने एक बार फिर नदी में 2.87 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा है जिससे तराई के हालात और बिगड़ने की आशंका है।
नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 61 सेमी ऊपर बह रहा है। इसके अभी और बढ़ने के आसार भी हैं। वहीं, एक माह से तटबंधों पर गुजर-बसर कर रही तीन दर्जन गांवों की 70 हजार आबादी की मुसीबतें दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं।
नेपाल पिछले तीन दिन के अंदर घाघरा नदी में सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ चुका है। शनिवार को फिर 2.87 लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ दिया गया है जो रविवार दोपहर तक तराई में पहुंचकर हालात और बिगाडे़गा।
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तराई में पहले से ही नेपाली पानी उफान मार रहा है। जिसकी वजह से परसावल, नैपुरा, कमियार, बांसगांव, किठुली, कंचनापुर, सुंदरनगर समेत तीन दर्जन गांवों की करीब 70 हजार आबादी एक माह से हेतमापुर, एल्गिन चरसड़ी और अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर जीवन गुजार रही है।
नेपाल द्वारा लगातार पानी छोड़ने से तराई के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि, नदी का पानी कभी घट जाता है तो कभी बढ़ जाता है। इससे खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इधर दो दिन से हो रही बारिश ने भी बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारी बढ़ा दी है।
बाढ़ पीड़ित रामेश्वर का कहना है कि, प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। एक बार राहत सामग्री मिली थी इसके बाद कोई हाल लेने तक नहीं आया।
तटबंध पर बसे रमाशंकर का कहना है कि, संक्रामक रोगों ने पांव पसारने शुरू कर दिए है। लोग सर्दी जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं लेकिन समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
चिकित्सकों की टीम एक बार बंधे पर आई थी, इसके बाद दोबारा नजर नहीं आई। इससे पीड़ित निजी चिकित्सकों से उपचार करा रहे हैं।
इस बारे में एडीएम संदीप गुप्ता का कहना है कि, नेपाल के बैराजों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। इससे तराई के लोगों को खासी दिक्कतें हो रही हैं। तटबंधों पर बसे बाढ़ पीड़ितों को यथासंभव मदद दी जा रही है। नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 61 सेमी ऊपर है।
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बाराबंकी। नेपाल के बैराजों से लगातार पानी छोड़ने की वजह से घाघरा नदी उफान मार रही है। नेपाल ने एक बार फिर नदी में 2.87 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा है जिससे तराई के हालात और बिगड़ने की आशंका है।
नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 61 सेमी ऊपर बह रहा है। इसके अभी और बढ़ने के आसार भी हैं। वहीं, एक माह से तटबंधों पर गुजर-बसर कर रही तीन दर्जन गांवों की 70 हजार आबादी की मुसीबतें दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं।
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नेपाल पिछले तीन दिन के अंदर घाघरा नदी में सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ चुका है। शनिवार को फिर 2.87 लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ दिया गया है जो रविवार दोपहर तक तराई में पहुंचकर हालात और बिगाडे़गा।
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तराई में पहले से ही नेपाली पानी उफान मार रहा है। जिसकी वजह से परसावल, नैपुरा, कमियार, बांसगांव, किठुली, कंचनापुर, सुंदरनगर समेत तीन दर्जन गांवों की करीब 70 हजार आबादी एक माह से हेतमापुर, एल्गिन चरसड़ी और अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर जीवन गुजार रही है।
नेपाल द्वारा लगातार पानी छोड़ने से तराई के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि, नदी का पानी कभी घट जाता है तो कभी बढ़ जाता है। इससे खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इधर दो दिन से हो रही बारिश ने भी बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारी बढ़ा दी है।
बाढ़ पीड़ित रामेश्वर का कहना है कि, प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। एक बार राहत सामग्री मिली थी इसके बाद कोई हाल लेने तक नहीं आया।
तटबंध पर बसे रमाशंकर का कहना है कि, संक्रामक रोगों ने पांव पसारने शुरू कर दिए है। लोग सर्दी जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं लेकिन समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
चिकित्सकों की टीम एक बार बंधे पर आई थी, इसके बाद दोबारा नजर नहीं आई। इससे पीड़ित निजी चिकित्सकों से उपचार करा रहे हैं।
इस बारे में एडीएम संदीप गुप्ता का कहना है कि, नेपाल के बैराजों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। इससे तराई के लोगों को खासी दिक्कतें हो रही हैं। तटबंधों पर बसे बाढ़ पीड़ितों को यथासंभव मदद दी जा रही है। नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 61 सेमी ऊपर है।