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‘डैमेज कंट्रोल’ की कवायद तो नहीं वाल्मीकि आश्रम में पूजा
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विशंभर प्रसाद निषाद।
- फोटो : BANDA
बांदा। चित्रकूट के जिस आश्रम में महर्षि वाल्मीकि ने रामायण लिखी थी, वहां अब गोरखनाथ पीठ के महंत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई इबारत लिखी है। वाल्मीकि आश्रम में कोई मुख्यमंत्री पहली बार आया है।
योगी के इस आश्रम में आगमन और पूजा पाठ को लेकर सियासी कयासबाजियां भी शुरू हो गई हैं। सियासी नजरिए से देखने वालों का मानना है कि हाल ही में हाथरस आदि कुछ जगहों पर वाल्मीकि वर्ग के साथ हुई गंभीर आपराधिक घटनाओं से वाल्मीकि समाज के खफा होने के पैदा खतरे के मद्देनजर सीएम की यह डैमेज कंट्रोल कवायद है।
अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सीएम योगी इसके पूर्व पांच बार धर्म नगरी चित्रकूट आ चुके हैं। एक भी बार महर्षि वाल्मीकि के आश्रम लालापुर नहीं गए, जबकि तीन बार उन्होंने चित्रकूट में रात्रि विश्राम भी किया। लेकिन शुक्रवार को सिर्फ लालापुर आए। यहां वाल्मीकि आश्रम में पूजा-पाठ और भ्रमण किया। लगभग दो घंटे लालापुर में बिताए।
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साथ ही यह भी एक तथ्य है कि कोई मुख्यमंत्री इसके पूर्व महर्षि वाल्मीकि आश्रम शायद नहीं आया। शुक्रवार को महर्षि जयंती भी थी। इस विशेष मौके पर मुख्यमंत्री का महर्षि आश्रम के दौरे का यह अर्थ भी निकाला जा रहा है कि वाल्मीकि समाज को पटाने और उनकी नाराजगी दूर करने की कवायद है।
हाथरस की घटना पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने का मौका हाथ से नहीं जाने दिया। सरकार की चौतरफा घेराबंदी और फजीहत की। ऐसे में प्रदेश में खासी तादाद में आबाद वाल्मीकि समाज के खफा हो जाने का खतरा मंडराते देख इसे संभालने के लिए शायद सीएम योगी खुद आगे आए।
आश्रम में हाजिरी से नहीं होगा डैमेज कंट्रोल
बांदा। राज्यसभा सांसद और सपा के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद का कहना है कि मुख्यमंत्री के महर्षि आश्रम आने से वाल्मीकि समाज का कोई भला होने वाला नहीं है।
मुख्यमंत्री को वाल्मीकि समाज से हमदर्दी थी तो उन्हें हाथरस जाना चाहिए था और जुल्म की शिकार बिटिया के परिवार से मिलना चाहिए था। आश्रम में हाजिरी देने से डैमेज कंट्रोल होने वाला नहीं है। सांसद ने कहा कि हाथरस की घटना में पीड़ितों को न्याय नहीं मिला। कोर्ट को दखल देना पड़ा। प्रदेश में अपराधों को खुलेआम बढ़ावा मिल रहा है। कई जिलों में बालिकाओं के साथ दरिंदगी हुई है।
चित्रकूट का प्रवेश द्वार है महर्षि आश्रम
बांदा। चित्रकूट जिले में नेशनल हाईवे पर स्थित लालापुर (बछेही) में महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी। इस आश्रम को चित्रकूट का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। यहां चंदेलकालीन आसंभरा देवी का भी मंदिर है।
कहा जाता है कि वनवास के समय श्रीराम ने यहां आकर महर्षि वाल्मीकि से अपने निवास के लिए स्थान पूछा था। महर्षि ने उन्हें चित्रकूट में रहने को कहा था। तुलसीदास ने मानस में इसका जिक्र किया है- चित्रकूट गिरि करहु निवासू, जहं तुम्हार सब भांति सुपासु।
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योगी के इस आश्रम में आगमन और पूजा पाठ को लेकर सियासी कयासबाजियां भी शुरू हो गई हैं। सियासी नजरिए से देखने वालों का मानना है कि हाल ही में हाथरस आदि कुछ जगहों पर वाल्मीकि वर्ग के साथ हुई गंभीर आपराधिक घटनाओं से वाल्मीकि समाज के खफा होने के पैदा खतरे के मद्देनजर सीएम की यह डैमेज कंट्रोल कवायद है।
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अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सीएम योगी इसके पूर्व पांच बार धर्म नगरी चित्रकूट आ चुके हैं। एक भी बार महर्षि वाल्मीकि के आश्रम लालापुर नहीं गए, जबकि तीन बार उन्होंने चित्रकूट में रात्रि विश्राम भी किया। लेकिन शुक्रवार को सिर्फ लालापुर आए। यहां वाल्मीकि आश्रम में पूजा-पाठ और भ्रमण किया। लगभग दो घंटे लालापुर में बिताए।
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साथ ही यह भी एक तथ्य है कि कोई मुख्यमंत्री इसके पूर्व महर्षि वाल्मीकि आश्रम शायद नहीं आया। शुक्रवार को महर्षि जयंती भी थी। इस विशेष मौके पर मुख्यमंत्री का महर्षि आश्रम के दौरे का यह अर्थ भी निकाला जा रहा है कि वाल्मीकि समाज को पटाने और उनकी नाराजगी दूर करने की कवायद है।
हाथरस की घटना पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने का मौका हाथ से नहीं जाने दिया। सरकार की चौतरफा घेराबंदी और फजीहत की। ऐसे में प्रदेश में खासी तादाद में आबाद वाल्मीकि समाज के खफा हो जाने का खतरा मंडराते देख इसे संभालने के लिए शायद सीएम योगी खुद आगे आए।
आश्रम में हाजिरी से नहीं होगा डैमेज कंट्रोल
बांदा। राज्यसभा सांसद और सपा के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद का कहना है कि मुख्यमंत्री के महर्षि आश्रम आने से वाल्मीकि समाज का कोई भला होने वाला नहीं है।
मुख्यमंत्री को वाल्मीकि समाज से हमदर्दी थी तो उन्हें हाथरस जाना चाहिए था और जुल्म की शिकार बिटिया के परिवार से मिलना चाहिए था। आश्रम में हाजिरी देने से डैमेज कंट्रोल होने वाला नहीं है। सांसद ने कहा कि हाथरस की घटना में पीड़ितों को न्याय नहीं मिला। कोर्ट को दखल देना पड़ा। प्रदेश में अपराधों को खुलेआम बढ़ावा मिल रहा है। कई जिलों में बालिकाओं के साथ दरिंदगी हुई है।
चित्रकूट का प्रवेश द्वार है महर्षि आश्रम
बांदा। चित्रकूट जिले में नेशनल हाईवे पर स्थित लालापुर (बछेही) में महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी। इस आश्रम को चित्रकूट का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। यहां चंदेलकालीन आसंभरा देवी का भी मंदिर है।
कहा जाता है कि वनवास के समय श्रीराम ने यहां आकर महर्षि वाल्मीकि से अपने निवास के लिए स्थान पूछा था। महर्षि ने उन्हें चित्रकूट में रहने को कहा था। तुलसीदास ने मानस में इसका जिक्र किया है- चित्रकूट गिरि करहु निवासू, जहं तुम्हार सब भांति सुपासु।

लालापुर में महर्षि वाल्मीकि आश्रम का प्रवेश द्वार।- फोटो : BANDA