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तीरथपुर पूछा तो छा गई खामोशी
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बांदा : पाक की लाहौर जेल से रिहा होकर अपने गांव पचोखर आया रामबहादुर और ग्रामीण।
- फोटो : BANDA
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पचोखर (बांदा)। पाकिस्तान के लाहौर जेल से 12 साल बाद रिहा होकर अपने गांव पचोखर पहुंचे रामबहादुर ने घर पहुंचकर अपने पिता से तीरथपुर गांव के बारे में पूछा तो वहां खामोशी छा गए। अधिकारी भी एक-दूसरे को देखने लगे।
रामबहादुर से तीरथपुर गांव के बारे में पूछने का रहस्य जाना तो वह कुछ नहीं बता सका। तभी पिता गिल्ला ने बताया कि रामबहादुर कई साल पहले तीरथपुर (एमपी) से एक औरत को ले आया था। दो माह बाद ही वह चली गई थी।
इसी के बाद वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया था। इलाज के लिए प्रयागराज ले जाते समय ट्रक से कूद गया था। भाई की हाथ की नस काट दी थी। फिर एक सुबह साइकिल से निकल गया तो फिर नहीं लौटा।
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एलआईयू से जानकारी मिली कि रामबहादुर पाकिस्तान जेल में बंद है। उधर, 15 साल बाद घर लौटे रामबहादुर से मिलने के लिए उसकी बहन रानी और रानी बाई को बेसब्री से इंतजार था। घर आते ही दोनों बहनें उससे लिपट गईं।
खास बात यह है कि रक्षाबंधन पर राखी न बांध पाने पर बहनें हरितालिका तीज पर भाइयों की कलाई में राखी बांधती हैं। इसी के तहत दोनों बहनों ने रामबहादुर की कलाई भी राखी से सजा दी।
हालांकि, खाली हाथ आए रामबहादुर उन्हें उपहार में कुछ नहीं दे सका। अलबत्ता पैर छूकर उनसे आशीर्वाद मांगा। वहीं, जिला प्रशासन ने रामबहादुर को सीधे परिजनों के सुपुर्द नहीं किया। पहले बबेरू एसडीएम के यहां पेश कर उसके बयान दर्ज कराए गए।
इसके बाद अतर्रा थाने में आमद दर्ज कराई गई। फिर नायब तहसीलदार और दरोगा ने परिजनों के हवाले किया। साथ ही परिजनों और पूर्व प्रधान लवकुश त्रिपाठी के सत्यापन रिपोर्ट में हस्ताक्षर बनवाए।
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रामबहादुर से तीरथपुर गांव के बारे में पूछने का रहस्य जाना तो वह कुछ नहीं बता सका। तभी पिता गिल्ला ने बताया कि रामबहादुर कई साल पहले तीरथपुर (एमपी) से एक औरत को ले आया था। दो माह बाद ही वह चली गई थी।
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इसी के बाद वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया था। इलाज के लिए प्रयागराज ले जाते समय ट्रक से कूद गया था। भाई की हाथ की नस काट दी थी। फिर एक सुबह साइकिल से निकल गया तो फिर नहीं लौटा।
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एलआईयू से जानकारी मिली कि रामबहादुर पाकिस्तान जेल में बंद है। उधर, 15 साल बाद घर लौटे रामबहादुर से मिलने के लिए उसकी बहन रानी और रानी बाई को बेसब्री से इंतजार था। घर आते ही दोनों बहनें उससे लिपट गईं।
खास बात यह है कि रक्षाबंधन पर राखी न बांध पाने पर बहनें हरितालिका तीज पर भाइयों की कलाई में राखी बांधती हैं। इसी के तहत दोनों बहनों ने रामबहादुर की कलाई भी राखी से सजा दी।
हालांकि, खाली हाथ आए रामबहादुर उन्हें उपहार में कुछ नहीं दे सका। अलबत्ता पैर छूकर उनसे आशीर्वाद मांगा। वहीं, जिला प्रशासन ने रामबहादुर को सीधे परिजनों के सुपुर्द नहीं किया। पहले बबेरू एसडीएम के यहां पेश कर उसके बयान दर्ज कराए गए।
इसके बाद अतर्रा थाने में आमद दर्ज कराई गई। फिर नायब तहसीलदार और दरोगा ने परिजनों के हवाले किया। साथ ही परिजनों और पूर्व प्रधान लवकुश त्रिपाठी के सत्यापन रिपोर्ट में हस्ताक्षर बनवाए।

बांदा : रामबहादुर के पैर छूता उसका भाई मैकू। संवाद- फोटो : BANDA

बांदा : रामबहादुर के स्वागत पर पूजा का थाल लिए मां कुसुमा।- फोटो : BANDA