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सरकारी मंसूबे पर फिरा पानी
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- फोटो : BANDA
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बांदा। लगभग दो अरब रुपये की लागत से जनपद में लगाए गए 656 सरकारी नलकूपों से 65 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का सरकारी मंसूबा पूरा नहीं हो पा रहा। तेजी से गिरे भूजल स्तर और नलकूपों के रखरखाव में लापरवाही से बमुश्किल 25 फीसदी नलकूप ही पर्याप्त मात्रा में पानी दे रहे हैं।
इससे ज्यादातर की क्षमता 50 फीसदी घट गई है। जिले के 25 नलकूप फेल हो चुके हैं, जबकि 22 नलकूप कई तकनीकी खराबियों से बंद हैं। नलकूप विभाग के अनुसार, एक नलकूप से 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल सिंचित होने का मानक है। अधिकांश किसान प्राइवेट नलकूपों से कीमत देकर सिंचाई के लिए पानी खरीदते हैं। जहां प्राइवेट नलकूप नहीं हैं वहां की फसल बारिश के भरोसे रह गई है। उधर, जिलेभर के सरकारी नलकूपों की बदहाल स्थित से किसान पूरी तरह से मायूस हो रखे हैं। किसानों का कहना है कि महंगी सिंचाई से उनकी फसल की लागत भी काफी ज्यादा आ रही है। साथ ही सरकारी महकमे द्वारा नलकूपों को ठीक न कराने से स्थित और भी विकट हो रखी है। किसानों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन ने खराब सरकारी नलकूपों को शीघ्र ही सही कराने की मांग की है।
कुल नलकूप-656
यात्रिक दोष से खराब नलकूप-8
विद्युत दोष से खराब नलकूप-14
कुल सिंचित क्षेत्रफल-65,600 हजार हेक्टेयर
मौजूदा समय में सिंचित क्षेत्रफल-32 हजार हेक्टेयर
मानक-प्रति नलकूप सिंचित रकबा-100 हेक्टेयर
वर्तमान में प्रति नलकूप सिंचित रकबा-50 हेक्टेयर
इंसेट---
केस-एक
फोटो परिचय-2-राजेंद्र तिवारी।
तिंदवारी में नलकूप 105 की चार साल में ही क्षमता घटकर 50 फीसदी रह गई है। अब यह खराब होकर बंद हो गया है। विभाग कोई सुध नहीं ले रहा। गेहूं को दूसरा और तीसरा पानी न मिलने से दाना पतला हो गया। उत्पादन भी आधा रह गया। नलकूप चालक के निधन के बाद आपरेटर की नियुक्ति नहीं हुई।
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-राजेंद्र तिवारी, किसान
इंसेट---
केस-दो
फोटो परिचय-3-गजेंद्र सिंह।
नलकूप 18 बिछवाही (जसपुरा) 2016 में लगा था। सरकारी नलकूप से 25 हेक्टेअर सिंचाई नहीं हो रही है। पिछले माह नलकूप ने पानी देना बंद कर दिया। सिंचाई के अभाव में गेहूं की फसल पर असर पड़ा है। आपरेटर रिबोर की जरूरत बता रहा है।
-गजेंद्र सिंह चौहान, किसान
इंसेट---
यांत्रिक खराबी से बंद नलकूप
जौरही गांव के नलकूप 287 व 259, जसपुरा में नलकूप 18 व गौरीकलां में नलकूप 40, तिलौसा में नलकूप 225, बरौली आजम में नलकूप 164, भड़ौली में नलकूप 109 बंद पड़े हैं। यहां पंप सेट की खराबी दूर नहीं की जा सकी।
इंसेट---
विद्युत दोष से बंद नलकूप---
नलकूप-106 फतपुरवा, 107-गड़रिया, 177-गौरीखुर्द, 47-चंदवारा, 49-बीरा, 12-अलिहा, 18-बिछवाही, 232-सादीमदनपुर, 105-तिंदवारी, 171-बरेठी कलां।
इंसेट---
ब्लाकवार नलकूपों की स्थिति---
ब्लाक नलकूप खराब
नरैनी 02 00
महुआ 43 01
बडोखर खुर्द 111 03
जसपुरा 131 07
बबेरू 109 02
बिसंडा 35 01
कमासिन 61 03
तिंदवारी 164 05
योग- 656 22
इंसेट---
भूजल स्तर गिरने से नलकूपों की क्षमता दिन-प्रतिदिन घट रही है। कम भूजल स्तर पर मोटर पर लोड पड़ता है। इससे अक्सर मोटर फुंक रही हैं। बीते साल 1139 बार नलकूपों की यांत्रिक गड़बड़ी ठीक कराई गई थी। मेंटीनेंस के लिए प्रति नलकूप 38 हजार रुपये मिलते हैं। विभाग के पास 17 में मात्र दो मिस्त्री हैं। ऐसे में रिपेयरिंग का काम प्राइवेट मिस्त्रियों से कराया जाता है।
- ज्ञानेश कुमार, अधिशासी अभियंता, नलकूप, बांदा
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इससे ज्यादातर की क्षमता 50 फीसदी घट गई है। जिले के 25 नलकूप फेल हो चुके हैं, जबकि 22 नलकूप कई तकनीकी खराबियों से बंद हैं। नलकूप विभाग के अनुसार, एक नलकूप से 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल सिंचित होने का मानक है। अधिकांश किसान प्राइवेट नलकूपों से कीमत देकर सिंचाई के लिए पानी खरीदते हैं। जहां प्राइवेट नलकूप नहीं हैं वहां की फसल बारिश के भरोसे रह गई है। उधर, जिलेभर के सरकारी नलकूपों की बदहाल स्थित से किसान पूरी तरह से मायूस हो रखे हैं। किसानों का कहना है कि महंगी सिंचाई से उनकी फसल की लागत भी काफी ज्यादा आ रही है। साथ ही सरकारी महकमे द्वारा नलकूपों को ठीक न कराने से स्थित और भी विकट हो रखी है। किसानों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन ने खराब सरकारी नलकूपों को शीघ्र ही सही कराने की मांग की है।
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कुल नलकूप-656
यात्रिक दोष से खराब नलकूप-8
विद्युत दोष से खराब नलकूप-14
कुल सिंचित क्षेत्रफल-65,600 हजार हेक्टेयर
मौजूदा समय में सिंचित क्षेत्रफल-32 हजार हेक्टेयर
मानक-प्रति नलकूप सिंचित रकबा-100 हेक्टेयर
वर्तमान में प्रति नलकूप सिंचित रकबा-50 हेक्टेयर
इंसेट---
केस-एक
फोटो परिचय-2-राजेंद्र तिवारी।
तिंदवारी में नलकूप 105 की चार साल में ही क्षमता घटकर 50 फीसदी रह गई है। अब यह खराब होकर बंद हो गया है। विभाग कोई सुध नहीं ले रहा। गेहूं को दूसरा और तीसरा पानी न मिलने से दाना पतला हो गया। उत्पादन भी आधा रह गया। नलकूप चालक के निधन के बाद आपरेटर की नियुक्ति नहीं हुई।
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-राजेंद्र तिवारी, किसान
इंसेट---
केस-दो
फोटो परिचय-3-गजेंद्र सिंह।
नलकूप 18 बिछवाही (जसपुरा) 2016 में लगा था। सरकारी नलकूप से 25 हेक्टेअर सिंचाई नहीं हो रही है। पिछले माह नलकूप ने पानी देना बंद कर दिया। सिंचाई के अभाव में गेहूं की फसल पर असर पड़ा है। आपरेटर रिबोर की जरूरत बता रहा है।
-गजेंद्र सिंह चौहान, किसान
इंसेट---
यांत्रिक खराबी से बंद नलकूप
जौरही गांव के नलकूप 287 व 259, जसपुरा में नलकूप 18 व गौरीकलां में नलकूप 40, तिलौसा में नलकूप 225, बरौली आजम में नलकूप 164, भड़ौली में नलकूप 109 बंद पड़े हैं। यहां पंप सेट की खराबी दूर नहीं की जा सकी।
इंसेट---
विद्युत दोष से बंद नलकूप---
नलकूप-106 फतपुरवा, 107-गड़रिया, 177-गौरीखुर्द, 47-चंदवारा, 49-बीरा, 12-अलिहा, 18-बिछवाही, 232-सादीमदनपुर, 105-तिंदवारी, 171-बरेठी कलां।
इंसेट---
ब्लाकवार नलकूपों की स्थिति---
ब्लाक नलकूप खराब
नरैनी 02 00
महुआ 43 01
बडोखर खुर्द 111 03
जसपुरा 131 07
बबेरू 109 02
बिसंडा 35 01
कमासिन 61 03
तिंदवारी 164 05
योग- 656 22
इंसेट---
भूजल स्तर गिरने से नलकूपों की क्षमता दिन-प्रतिदिन घट रही है। कम भूजल स्तर पर मोटर पर लोड पड़ता है। इससे अक्सर मोटर फुंक रही हैं। बीते साल 1139 बार नलकूपों की यांत्रिक गड़बड़ी ठीक कराई गई थी। मेंटीनेंस के लिए प्रति नलकूप 38 हजार रुपये मिलते हैं। विभाग के पास 17 में मात्र दो मिस्त्री हैं। ऐसे में रिपेयरिंग का काम प्राइवेट मिस्त्रियों से कराया जाता है।
- ज्ञानेश कुमार, अधिशासी अभियंता, नलकूप, बांदा