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कि सानों का मेला लगाकर खर्च किए 58 लाख
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बांदा। बुंदेलखंड में किसानों के अच्छे दिन लाने की सरकारी कवायदों में सरकार का पैसा खूब खप रहा है। किसानों के दिन जहां के तहां हैं। इसकी ताजा बानगी दो माह पूर्व यहां कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय किसान मेला है। मेले में मात्र 6827 किसान ही पंजीकृत हुए, जबकि खर्च 58 लाख रुपये किया गया है। यानि एक किसान पर करीब साढ़े आठ सौ रुपये औसतन खर्च हुआ।
बीस से 22 फरवरी तक यहां कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय किसान मेला 2020-21 आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेश सरकार के मंत्री सहित अफसर भी शरीक हुए। मेले के आयोजन में खर्च हुई कुल धनराशि की सूचना आईटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ला ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी/मेला आयोजक सचिव नरेंद्र सिंह द्वारा दी गई सूचना में बताया गया कि तीन दिवसीय मेले में 6827 किसान पंजीकृत हुए।
यह भी कहा कि लगभग इतने ही अपंजीकृत किसान भी रहे। इनमें उत्तर प्रदेश और पंजाब के किसान थे। मेले के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने 15 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा 43 लाख रुपये विश्वविद्यालय ने खर्च किए, यानि कुल 58 लाख रुपये खर्च हुए। यह भी बताया कि मेले में कुल 153 स्टॉल लगाए गए थे। किसानों ने खेती-किसानी की विभिन्न जानकारियां लीं।
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इंसेट---
मदवार खर्च बताने से काटी कन्नी
जनसूचना में कुलदीप शुक्ल ने विश्वविद्यालय से खर्च का मदवार ब्योरा मांगा था। पूछा था कि किस मद में कितना बजट स्वीकृत हुआ या खर्च हुआ। जन सूचना अधिकारी मदवार सूचना देने में कन्नी काट गए। कुल खर्च बता दिया। जन सूचना अधिकारी ने दावा किया कि मेले में किसानों को कृषि विकास के अतुलनीय लाभ व जानकारियां प्राप्त हुईं।
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बीस से 22 फरवरी तक यहां कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय किसान मेला 2020-21 आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेश सरकार के मंत्री सहित अफसर भी शरीक हुए। मेले के आयोजन में खर्च हुई कुल धनराशि की सूचना आईटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ला ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी/मेला आयोजक सचिव नरेंद्र सिंह द्वारा दी गई सूचना में बताया गया कि तीन दिवसीय मेले में 6827 किसान पंजीकृत हुए।
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यह भी कहा कि लगभग इतने ही अपंजीकृत किसान भी रहे। इनमें उत्तर प्रदेश और पंजाब के किसान थे। मेले के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने 15 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा 43 लाख रुपये विश्वविद्यालय ने खर्च किए, यानि कुल 58 लाख रुपये खर्च हुए। यह भी बताया कि मेले में कुल 153 स्टॉल लगाए गए थे। किसानों ने खेती-किसानी की विभिन्न जानकारियां लीं।
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मदवार खर्च बताने से काटी कन्नी
जनसूचना में कुलदीप शुक्ल ने विश्वविद्यालय से खर्च का मदवार ब्योरा मांगा था। पूछा था कि किस मद में कितना बजट स्वीकृत हुआ या खर्च हुआ। जन सूचना अधिकारी मदवार सूचना देने में कन्नी काट गए। कुल खर्च बता दिया। जन सूचना अधिकारी ने दावा किया कि मेले में किसानों को कृषि विकास के अतुलनीय लाभ व जानकारियां प्राप्त हुईं।