फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Urdu Makhdoom Rabbani echoed with poems

शायरों के कलामों से गूंजा उर्से मखदूम रब्बानी

Sun, 17 Jan 2021 11:23 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2021 11:23 PM IST
विज्ञापन
Urdu Makhdoom Rabbani echoed with poems
बांदा। मखदूम रब्बानी के उर्स में शनिवार की रात आखिरी दिन नातिया और मनकबती मुशायरा हुआ। इसके पूर्व फातेहा, कुरान ख्वानी और दरगाह में चादर व गुल पोशी हुई।
विज्ञापन

अलीगंज स्थित रब्बानी आवास में मुशायरे में सज्जादानशीन सैय्यद खुश्तर रब्बानी ने शेर पढ़ा, तेरे दिवानों की तौकीर देखकर खुश्तर, खिरद के होशोहवास अब ठिकाने आए हैं।
विज्ञापन

फखरे आलम ने कहा, बुझा के शम्मे अना और नफरतों की दिए, चिरागे हुस्न अकीदत जलाने आए हैं। गौहर रब्बानी ने पढ़ा, वो किसलिए किसी नियामत के वास्ते तरसे, जिसपे आपका फैजान झूम के बरसे। डा. खालिद इजहार ने शेर कहा, मुझे भी मिल गया है मेरे पीर का दामन, इजहार अब मेरे भी दिन सुहाने आए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शमीम बांदवी ने पढ़ा, महक रहा है चमनजार उस गुलेतर से, किताबे हक जो सुनता रहा कटे सर से। सदारत कर रहे अमजद रब्बानी सहित अनवर बांदवी, वाकिफ सईद वारसी, सईद इटावी, नजरे आलम, वली, रहबर, सरवर, गुलजार, शरीफ, रईस, नवाब असर, मुनव्वर, मीर रब्बानी, नूर मोहम्मद, अकबर रब्बानी, अशअर रब्बानी, जाहिद रब्बानी, असगर रब्बानी ने भी शेर सुनाए। दुआ और सलाम के साथ उर्स का समापन हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed