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यूपी-एमपी के बीच तीन नबंबर को होगा पानी का बंटवारा

Mon, 19 Oct 2015 11:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Mon, 19 Oct 2015 11:23 PM IST
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UP - MP will be the water divide between the three Nbnbr

बांदा। बांधों के पानी के बंटवारे को लेकर यूपी और

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एमपी के अधिकारी तीन नवंबर को छतरपुर (एमपी) में संयुक्त बैठक करेंगे। दोनों राज्यों के बीच रनगवां बांध के पानी में बंटवारे का अनुपात 35 और 15 फीसदी है। उधर, बुंदेलखंड के महत्वपूर्ण बांध गंगऊ, रनगवां और बरियारपुर में पानी का भीषण संकट है। तीनों बांध डेड स्टोर की स्थिति में हैं।

चित्रकूटधाम मंडल और खासकर बांदा को गंगऊ, रनगवां और बरियारपुर बांधों से सिंचाई के लिए पूरे साल पानी मिलता है। हालांकि ये तीनों बांध मध्य प्रदेश के इलाके में हैं, लेकिन इनका रखरखाव यूपी का सिंचाई विभाग करता है। रनगवां बांध का पानी यूपी और एमपी के बीच बंटवारा होता है।

यह कई दशकों से चला आ रहा है। हर साल बारिश के बाद इस बांध मेें जितना भी पानी उपलब्ध होता है, उसमें 35 और 15 अनुपात में दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग के अधिकारी संयुक्त बैठक कर बंटवारा करते हैं। इस वर्ष यह बैठक तीन नंबर को छतरपुर (एमपी) में हो रही है।

सिंचाई विभाग तृतीय प्रखंड, बांदा अधिशासी अभियंता योगेश रावल ने यहां के केन कैनाल अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर बैठक की सूचना भेजी है। कहा है कि रनगवां बांध के पानी के बंटवारे के अनुबंध के लिए यह बैठक तीन नवंबर को सुबह 11 बजे होगी। मध्य प्रदेश की ओर से इस बैठक में वहां के अधीक्षण यंत्री (जल संसाधन, मंडल छतरपुर) भाग लेंगे।

उधर, हालात यह हैं कि यूपी-एमपी भले ही पानी का बंटवारा कर लें, लेकिन जब बांध में पानी ही नहीं है तो दोनों सूबों के हिस्से में आएगा क्या? रनगवां बांध में इस समय नाम मात्र को तलहटी में पानी है।

सोमवार को इस बांध में मात्र 975 एमसीएफटी (वर्ग घन फिट) पानी था। सिंचाई विभाग हर वर्ष 15 अक्तूबर को बांधों के फाटक खड़े कर देता था, लेकिन अबकी बांधों में पानी न होने से अब तक फाटक खड़े नहीं किए गए हैं।

सूखती फसलों को कुछ सहारा देने और अतर्रा में केन नहर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए सिंचाई विभाग ने मंगलवार को गंगऊ बांध से बचा-खुचा 500 क्यूसिक पानी छोड़ दिया। इस पानी से अतर्रा ब्रांच केन नहर सात दिन चलेगी। पानी का यह जुगाड़ करने के लिए सिंचाई विभाग के अभियंताओं को गंगऊ बांध की तलहटी पर बने स्लूस गेट खोलने पड़े हैं।

गंगऊ से चला यह पानी बुधवार को बारियारपुर और बृहस्पतिवार को अतर्रा नहर में आ जाएगा। गंगऊ बांध से रबी फसल की सिंचाई के लिए 674 क्यूसिक पानी के साथ केन नहर चलाई जानी थी, लेकिन बांध में पानी न होने से यह नहीं हो सका। गंगऊ में मात्र 203.19 एमसीएफटी पानी है, जबकि नहर के संचालन में एक दिन के लिए 216 एमसीएफटी पानी की जरूरत पड़ती है।

इस बारे मेें केन कैनाल डिवीजन (सिंचाई विभाग) अधिशासी अभियंता ओपी मौर्या का कहना है कि उपलब्ध पानी को यथा संभव कोशिश कर नहर में चलाया जा रहा है। किसान पानी का दुरुपयोग न करे।

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