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कुपोषण मिटाने में मदद करेगा यूनिसेफ

Wed, 24 Jul 2019 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2019 11:45 PM IST
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UNICEF to help eradicate malnutrition
कलक्ट्रेट में बैठक संबोधित करतीं यूनिसेफ की चीफ रूथरियानो। - फोटो : BANDA
बांदा। जिले में बड़ी संख्या में कुपोषित बच्चे पाए जाने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। इसके लिए यूनिसेफ और बांदा जिला प्रशासन के बीच समझौता हुआ है। गुरुवार को फिलीपींस से आईं यूनिसेफ की चीफ रूथरियानो और डीएम ने एमओयू (मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) यानी समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। हाल ही में यूनिसेफ ने यहां सर्वे कराया था। इसमें पांच साल तक के लगभग 12 हजार बच्चे कुपोषित मिले थे।
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बुंदेलखंड खासकर बांदा में कुपोषण का शिकंजा कसा हुआ है। बड़ी तादाद में बच्चे कुपोषित हैं। यूनिसेफ ने इसी वर्ष अप्रैल तक सर्वे में 5 साल तक के 2,60,314 बच्चों में 11,985 बच्चे कुपोषित पाये थे। 6649 बच्चे सूखा रोग से पीड़ित थे। पिछले हफ्ते यूनिसेफ की 20 सदस्यीय टीम यहां आई थी। नरैनी व बड़ोखर ब्लाक क्षेत्रों के कई गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर कुपोषित बच्चों की जानकारी ली। कई बच्चों का वजन कराया था।
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बुधवार को यूनिसेफ की चीफ रूथरियानो अपने सहयोगियों के साथ फिर बांदा आईं। कलक्ट्रेट सभागार में डीएम हीरालाल के साथ बैठक कर कुपोषण से निपटने के लिए संयुक्त कार्ययोजना पर चर्चा की। साथ ही यूनिसेफ चीफ और डीएम ने एमओयू (समझौता पत्र) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में यूनिसेफ के सहयोग से जिले को सात सेक्टर में बांटकर विभिन्न प्रकार की 43 गतिविधियों पर काम किया जाएगा।
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डीएम ने कहा कि कुपोषण बेहद गंभीर समस्या है, लेकिन खुशी की बात यह है कि यूनिसेफ जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था इसके निदान में मददगार बनी है। बताया कि छह माह में सामुदायिक सहभागिता से जिले के चार हजार बच्चों को कुपोषण मुक्त किया गया है। अब यूनिसेफ के साथ नई कार्य योजना से और बेहतर कार्य होगा।
यूनिसेफ चीफ रूथरियानो ने प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के विकास और उनके अधिकारों को लागू करने के लिए कार्य योजना बनाई गई है। जन सहयोग से इसे सफल किया जाएगा। यूनिसेफ के स्टेट हेड/प्रोग्राम मैनेजर अमित मल्होत्रा ने बताया कि बांदा मॉडल को प्रदेश के 7 अति पिछड़े जिलों में लागू किया जाएगा।

बताया कि बांदा की नरैनी तहसील में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसके अच्छे नतीजे आए हैं। जिले में लगभग 20 हजार बच्चे कुपोषण ग्रस्त हैं। 6 माह में 4000 बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाई गई है। बैठक का संचालन जिला अथ एवं संख्याधिकारी संजीव बघेल ने किया। सीएमओ डॉ. संतोष कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी, परियोजना निदेशक और उप सूचना निदेशक भूपेंद्र सिंह यादव भी मौजूद रहे।
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