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Banda News: जिले के दो कलेक्टरों ने पेश की नजीर

Wed, 23 Oct 2024 12:13 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Oct 2024 12:13 AM IST
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Two collectors of the district set an example
बांदा। जनपद ही नहीं बुंदेलखंड को पानी संकट से मुक्ति दिलाने में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा कलेक्टरों ने भी अहम भूमिका निभाई। पूर्व डीएम हीरालाल ने पांच वर्ष पहले जल संरक्षण की मुहिम छेड़ी और सीधे जनता से जुड़कर उन्हें पानी का महत्व बताया। वहीं पूर्व डीएम अनुराग पटेल ने भी पानी बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकी और मिसाल बने। दोनों को जल संरक्षण के लिए पुरस्कार भी मिले।
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पांच वर्ष पूर्व पहले भी जल संरक्षण को लेकर गोष्ठियां और चौपालें हुईं, पर जनता का इससे जुड़ाव नहीं हो पाया था। वहीं वर्ष 2018 में बांदा के डीएम बने हीरालाल ने जल संरक्षण के लिए नायाब तरीका निकाला। कहावत है कि प्रशासन चाह ले तो हर बात मुमकिन है। उनके नेतृत्व में जिले में युद्ध स्तर पर पानी सरंक्षण को लेकर काम हुआ। लोगों के साथ शासकीय, गैर शासकीय अमलों की एकजुटता ने इसकी नजीर पेश की। परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल करके बांदा जिले में ‘जल सरंक्षण अभियान’ को सफल बनाया। हीरालाल ने जल संरक्षण के लिए भूजल बढ़ाओ, भूजल बचाओ और इसके बाद कुआं तालाब जियाओ अभियान चलाया। गांव-गांव खुद पहुंचे और तालाबों और कुओं का पूजन कराया। गांवों में चौपाल लगाई। कुओं व तालाबों को साफ कर उनका पूजन किया गया। सभी हैंडपंप व कुओं में भूजल रिचार्ज के लिए शोकपिट बनवाए गए। सभी सरकारी कार्यालयों में उन्होंने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए। पूर्व डीएम हीरालाल की करीब डेढ़ साल की मुहिम में जनपद में जल स्तर में काफी सुधार हुआ।
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इसके बाद पूर्व डीएम अनुराग पटेल ने भी जल संरक्षण की मुहिम को अपने अंदाज में आगे बढ़ाया। उन्होंने जनता व जनप्रतिनिधियों को अपने साथ लिया और तसला सिर में रखकर मिट्टी ढोने से भी गुरेज नहीं किया। उनके पीछे कारवां चलता गया और कई तालाब व जल स्रोत अपना स्वरूप बदलते गए। उनके प्रयास से बांदा की 15 किलोमीटर लंबी चंद्रावल नदी तथा 123 बीघा वाली मरौली झील सहित 75 तालाबों को पुनर्जीवन मिल सका। जलकुंभी हटाओ-तलाब बचाओ अभियान के तहत 50 तालाबों को नया जीवन दिया। जलकुंभी से भरे तालाब को सहकर्मियों के साथ खुद साफ किया।
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