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Banda News: दहेज हत्या में पति सहित तीन को कारावास
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बांदा। ससुरालीजनों द्वारा दहेज की मांग पूरी न होने और प्रताड़ित कर बहू की हत्या के आरोप में पति सहित तीन को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। घटना दस वर्ष पूर्व की है।
बिसंडा थानाक्षेत्र ग्राम पल्हरी निवासी विष्णु कुशवाहा ने वर्ष 2014 में जसपुरा थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने बतया कि पुत्री गोमती का विवाह वर्ष 2012 में थानाक्षेत्र के ग्राम रामपुर निवासी रामस्वरूप के पुत्र कुलदीप कुशवाहा के साथ किया था। विवाह के बाद जब पुत्री ससुराल गई तो पति, ससुर रामस्वरूप, सास सीताबाई, ननद अभिलाषा देवी, देवर पिंटू, रमेश व विक्रम दहेज में सोने की जंजीर व बाइक तथा 50 हजार रुपये की मांग करने लगे। मांग पूरी न करने पर पुत्री को मारपीट कर प्रताड़ित किया जाने लगा। मायके आकर पुत्री ने अपनी मां कुसमा, भाई राममनोहर व लक्ष्मण से इसकी शिकायत की।
बताया कि मांग पूरी न करने पर वह जान से मारने व दूसरी शादी की धमकी देते हैं। 28 जून 2014 को बेटी की ससुराल से उसकी मृत्यु होने की जानकारी प्राप्त हुई। मामले की जानकारी थाने में दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन सफलता न मिलने पर पुलिस अधीक्षक से मिल आपबीती सुनाकर न्याय की गुहार लगाई। बाद में पति सहित सात लोगों पर दहेज हत्या सहित सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान विवेचक ने ननद व देवरों को क्लीन चिट देते हुए एफआर लगा दी।
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पति, उसके पिता व मां के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने पति कुलदीप और उसके माता-पिता को दोषी करार देते सात-सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर 12 हजार रुपये का अर्थदंड भी आरोपित किया गया।
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बिसंडा थानाक्षेत्र ग्राम पल्हरी निवासी विष्णु कुशवाहा ने वर्ष 2014 में जसपुरा थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने बतया कि पुत्री गोमती का विवाह वर्ष 2012 में थानाक्षेत्र के ग्राम रामपुर निवासी रामस्वरूप के पुत्र कुलदीप कुशवाहा के साथ किया था। विवाह के बाद जब पुत्री ससुराल गई तो पति, ससुर रामस्वरूप, सास सीताबाई, ननद अभिलाषा देवी, देवर पिंटू, रमेश व विक्रम दहेज में सोने की जंजीर व बाइक तथा 50 हजार रुपये की मांग करने लगे। मांग पूरी न करने पर पुत्री को मारपीट कर प्रताड़ित किया जाने लगा। मायके आकर पुत्री ने अपनी मां कुसमा, भाई राममनोहर व लक्ष्मण से इसकी शिकायत की।
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बताया कि मांग पूरी न करने पर वह जान से मारने व दूसरी शादी की धमकी देते हैं। 28 जून 2014 को बेटी की ससुराल से उसकी मृत्यु होने की जानकारी प्राप्त हुई। मामले की जानकारी थाने में दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन सफलता न मिलने पर पुलिस अधीक्षक से मिल आपबीती सुनाकर न्याय की गुहार लगाई। बाद में पति सहित सात लोगों पर दहेज हत्या सहित सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान विवेचक ने ननद व देवरों को क्लीन चिट देते हुए एफआर लगा दी।
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पति, उसके पिता व मां के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने पति कुलदीप और उसके माता-पिता को दोषी करार देते सात-सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर 12 हजार रुपये का अर्थदंड भी आरोपित किया गया।