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तीन चरित्रों में जीवन जी रहे लोग

Sun, 11 Oct 2015 11:54 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा Updated Sun, 11 Oct 2015 11:54 PM IST
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Those three characters are living life

बांदा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नरेश कुमार ने कहा

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कि आज लोग तीन तरह का चरित्र अपना कर जीवन जी रहे हैं। पहला वह जो दोस्तों को दिखाते हैं, दूसरा वह जो समाज को दिखा रहे हैं और तीसरा चरित्र वह है जो हम ही जानते हैं।

उन्होंने कहा कि अपनी इच्छाओं को सीमित रखते हुए दूसरों के लिए वही पसंद करें जो अपने लिए पसंद करते हैं।
सीजेएम शनिवार की शाम जिला अस्पताल में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस में आयोजित गोष्ठी में बोल रहे थे। इसका आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में किया गया था।

अध्यक्षता करते हुए कहा कि बच्चों के तनाव को समझें और उसे दूर करने की कोशिश करें, ताकि बच्चों में मानसिक रोग पैदा न हो। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) मोहम्मद अहमद खां ने कहा कि अगर हमारे विचार अच्छे हों तो मानसिक बीमारियां हो ही नहीं सकतीं।

ईमानदारी दिमागी सेहत की बुनियादी शर्त है। जिला अस्पताल की मानसिक रोग काउंसलर डा. रिजवाना हाशमी ने कहा कि ज्यादातर बीमारियां मनो शारीरिक है। डा. हरदयाल ने बीमारियों को वर्गीकृत करते हुए जानकारी दी।

डा. एबी कटियार ने कहा कि हमें इस बात पर अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहिए कि हम समाज को क्या दे रहे हैं? तभी हमारा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। विधिक सेवा प्राधिकरण के संधिकर्ता डा. जनार्दन त्रिपाठी ने कहा कि पारिवारिक संबंधों में बिखराव पैदा हुआ है।

ईमानदारी घटी है। संचालन नरेंद्र कुमार मिश्रा ने किया। गोष्ठी में डा. एसएस गुप्ता, डा. एसके वाजपेयी भी शामिल रहे।

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