{"_id":"6ab2ba67787233a7240ab34b","slug":"the-trauma-center-is-ailing-it-needs-treatment-from-the-government-banda-news-c-12-1-knp1100-1659060-2026-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: ट्राॅमा सेंटर बीमार... इसको इलाज चाहिए सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: ट्राॅमा सेंटर बीमार... इसको इलाज चाहिए सरकार
विज्ञापन
फोटो-14-ट्राॅमा सेंटर में टूटे बेड के पहिए के नीचे लगाई गई ईंट। अमर उजाला
बांदा। गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज और बेहतर सुविधाएं देने के लिए बनाया गया ट्राॅमा सेंटर खुद ही बीमार नजर आ रहा है। मंगलवार को पड़ताल के दौरान कहीं बेड पर चादर नहीं थी।
वेंटीलेटर वाले बेड के टूटे पहियों के नीचे ईंटें लगाकर काम चलाया जा रहा था। गैलरी में रखी बेंचों पर भी चादरें गायब थीं। हवा के लिए तीमारदार को घर से पंखा लाना पड़ा। वहीं, पलंग के ऊपर मरीज तो नीचे कुत्ता बैठा मिला।
ट्राॅमा सेंटर में मंगलवार को 20 बेड पर सफेद, 11 पर नारंगी चादरें मिलीं जबकि पांच बेड पर चादर ही नहीं थी। एक बेड का गद्दा भी फटा मिला। सोमवार को सफेद और मंगलवार को नारंगी चादर बिछाने का नियम है। ऐसे में स्पष्ट था कि 20 बेड की चादरें बदली ही नहीं गईं। जगह-जगह गंदगी के ढेर नजर आए।
विज्ञापन
कमरा नंबर तीन में भर्ती कटरा निवासी शहजादे खान के बेड तक कमरे में लगा पंखा हवा नहीं पहुंचा पा रहा था। ऐसे में उनकी बेटी नाजो को घर से पंखा लाना पड़ा। नाजो ने बताया कि मरीज को सोमवार को भर्ती कराया गया था, लेकिन इसके बाद बेड की चादर बदलने कोई नहीं आया।
वहीं, इमरजेंसी में बेड के नीचे कुत्ते बैठे मिले। गंभीर हालत में आने वाले मरीजों के आसपास कुत्तों की मौजूदगी से संक्रमण और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
-- -
एक स्ट्रेचर मरीजों के लिए, दूसरा कूलर का स्टैंड
ट्राॅमा सेंटर के बाहर मरीजों के लिए महज एक स्ट्रेचर उपलब्ध है। दूसरा स्ट्रेचर चौकी में कूलर रखने के स्टैंड के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को अस्पताल लाने के दौरान स्ट्रेचर की जरूरत होती है, लेकिन यहां एक स्ट्रेचर से ही काम चलाया जा रहा है।
-- -
तीमारदारों को खींचना पड़ रहा स्ट्रेचर
गंभीर हालत में ट्राॅमा सेंटर पहुंचने वाले मरीजों को स्ट्रेचर तक पहुंचाने में भी स्टाफ का पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता। तीमारदार ही मरीजों को संभालकर अंदर ले जाते और स्ट्रेचर खींचते नजर आते हैं। भर्ती मरीजों को बाथरूम जाने में भी परेशानी होती है। कई बार तीमारदार न होने पर मरीज खुद ही हाथ में ड्रिप लेकर चलते दिखाई देते हैं।
-- -
सफाई के दावों की भी खुली पोल
ट्राॅमा सेंटर के बाथरूम पर लगी वर्कशीट में 21 सितंबर को केवल एक बार सफाई किए जाने का अपडेट दर्ज था जबकि नियमानुसार यहां तीन बार सफाई होनी चाहिए। ऐसे में गंदगी के बीच मरीजों के इलाज और संक्रमण से बचाव की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जगह-जगह बायो मेडिकल वेस्ट और गंदगी भी पसरी थी।
-- -
तीन चिकित्सकों की तैनाती, 150 से अधिक आते हैं मरीज
ट्रॉमा सेंटर में 24 घंटे में 150 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से 40 को भर्ती करने की व्यवस्था है। अन्य को गंभीर हालत होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इन मरीजों के लिए तीन चिकित्सकों के साथ ही करीब 40 का स्टाफ है। चिकित्सक और स्टाफ तीन शिफ्टों में काम करता है। ऐसे में एक शिफ्ट में एक चिकित्सक और करीब 13 का स्टाफ रहता है।
-- -
वर्जन
ट्रॉमा सेंटर में बेहतर व्यवस्थाएं करने का प्रयास किया जाता है। कई बार मरीज और तीमारदारों के कारण बेडशीट बदलने में परेशानी होती है। सफाई भी नियमित कराने के निर्देश दिए गए हैं। मरीजों का दबाव इतना अधिक है कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखना चुनौती होता है। फिर भी जो भी संसाधन और स्टाफ है, उससे काम चलाया जा रहा है। -डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस
विज्ञापन
वेंटीलेटर वाले बेड के टूटे पहियों के नीचे ईंटें लगाकर काम चलाया जा रहा था। गैलरी में रखी बेंचों पर भी चादरें गायब थीं। हवा के लिए तीमारदार को घर से पंखा लाना पड़ा। वहीं, पलंग के ऊपर मरीज तो नीचे कुत्ता बैठा मिला।
विज्ञापन
ट्राॅमा सेंटर में मंगलवार को 20 बेड पर सफेद, 11 पर नारंगी चादरें मिलीं जबकि पांच बेड पर चादर ही नहीं थी। एक बेड का गद्दा भी फटा मिला। सोमवार को सफेद और मंगलवार को नारंगी चादर बिछाने का नियम है। ऐसे में स्पष्ट था कि 20 बेड की चादरें बदली ही नहीं गईं। जगह-जगह गंदगी के ढेर नजर आए।
विज्ञापन
कमरा नंबर तीन में भर्ती कटरा निवासी शहजादे खान के बेड तक कमरे में लगा पंखा हवा नहीं पहुंचा पा रहा था। ऐसे में उनकी बेटी नाजो को घर से पंखा लाना पड़ा। नाजो ने बताया कि मरीज को सोमवार को भर्ती कराया गया था, लेकिन इसके बाद बेड की चादर बदलने कोई नहीं आया।
वहीं, इमरजेंसी में बेड के नीचे कुत्ते बैठे मिले। गंभीर हालत में आने वाले मरीजों के आसपास कुत्तों की मौजूदगी से संक्रमण और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
एक स्ट्रेचर मरीजों के लिए, दूसरा कूलर का स्टैंड
ट्राॅमा सेंटर के बाहर मरीजों के लिए महज एक स्ट्रेचर उपलब्ध है। दूसरा स्ट्रेचर चौकी में कूलर रखने के स्टैंड के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को अस्पताल लाने के दौरान स्ट्रेचर की जरूरत होती है, लेकिन यहां एक स्ट्रेचर से ही काम चलाया जा रहा है।
तीमारदारों को खींचना पड़ रहा स्ट्रेचर
गंभीर हालत में ट्राॅमा सेंटर पहुंचने वाले मरीजों को स्ट्रेचर तक पहुंचाने में भी स्टाफ का पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता। तीमारदार ही मरीजों को संभालकर अंदर ले जाते और स्ट्रेचर खींचते नजर आते हैं। भर्ती मरीजों को बाथरूम जाने में भी परेशानी होती है। कई बार तीमारदार न होने पर मरीज खुद ही हाथ में ड्रिप लेकर चलते दिखाई देते हैं।
सफाई के दावों की भी खुली पोल
ट्राॅमा सेंटर के बाथरूम पर लगी वर्कशीट में 21 सितंबर को केवल एक बार सफाई किए जाने का अपडेट दर्ज था जबकि नियमानुसार यहां तीन बार सफाई होनी चाहिए। ऐसे में गंदगी के बीच मरीजों के इलाज और संक्रमण से बचाव की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जगह-जगह बायो मेडिकल वेस्ट और गंदगी भी पसरी थी।
तीन चिकित्सकों की तैनाती, 150 से अधिक आते हैं मरीज
ट्रॉमा सेंटर में 24 घंटे में 150 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से 40 को भर्ती करने की व्यवस्था है। अन्य को गंभीर हालत होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इन मरीजों के लिए तीन चिकित्सकों के साथ ही करीब 40 का स्टाफ है। चिकित्सक और स्टाफ तीन शिफ्टों में काम करता है। ऐसे में एक शिफ्ट में एक चिकित्सक और करीब 13 का स्टाफ रहता है।
वर्जन
ट्रॉमा सेंटर में बेहतर व्यवस्थाएं करने का प्रयास किया जाता है। कई बार मरीज और तीमारदारों के कारण बेडशीट बदलने में परेशानी होती है। सफाई भी नियमित कराने के निर्देश दिए गए हैं। मरीजों का दबाव इतना अधिक है कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखना चुनौती होता है। फिर भी जो भी संसाधन और स्टाफ है, उससे काम चलाया जा रहा है। -डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस

फोटो-14-ट्राॅमा सेंटर में टूटे बेड के पहिए के नीचे लगाई गई ईंट। अमर उजाला

फोटो-14-ट्राॅमा सेंटर में टूटे बेड के पहिए के नीचे लगाई गई ईंट। अमर उजाला

फोटो-14-ट्राॅमा सेंटर में टूटे बेड के पहिए के नीचे लगाई गई ईंट। अमर उजाला

फोटो-14-ट्राॅमा सेंटर में टूटे बेड के पहिए के नीचे लगाई गई ईंट। अमर उजाला