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अस्पताल में भी डेंगू और मलेरिया का खतरा
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 08 Sep 2016 11:23 PM IST
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अस्पताल में मच्छरदानी लगाकर मच्छरों से बचाव करते मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। घर और गली-कूचों में गंदगी और जलभराव से पनप रहे मच्छर डेंगू और मलेरिया फैला रहे हैं। इनसे पीड़ित मरीज अस्पताल जा रहे हैं, लेकिन अस्पताल में घर और गली से ज्यादा गंदगी और मच्छर हों तो मरीज का क्या होगा? डेंगू से हो रही मौतों और मरीजों की मची हायतौबा के बीच जिला अस्पताल में सफाई के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। मच्छरों से परेशान मरीज मच्छरदानी और क्वाइल जलाकर रात काट रहे हैं।
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जिले में डेंगू से करीब एक दर्जन लोगों की जान जा चुकी है। सौ से अधिक डेंगू के मरीज सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। कई मरीज कानपुर में भर्ती हैं। जिला अस्पताल में डेंगू के लिए अलग वार्ड तो बना दिया गया, पर मच्छरों से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए। अस्पताल परिसर में गंदगी की भरमार है। मरीज और तीमारदार रात पर मच्छर से परेशान रहते हैं।
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ऐसे में यहां भर्ती मरीजों और तीमारदारों को भी डेंगू और मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है। ट्रामा सेंटर से लेकर वार्डों तक गंदगी की भरमार है। बर्न वार्ड के सामने गंदगी का ढेर है। शौचालयों की दुर्गंध जीना दुश्वार कर रही है। वार्डों के ठीक पिछवाड़े मर्च्युरी की तरफ कूड़े के अंबार लगे हैं। स्वाइन फ्लू वार्ड के गंदा पानी भरा है। उसमें मच्छर पनप रहे हैं।
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अस्पताल में भी मरीजों और तीमारदारों के मच्छरों से सुरक्षित न होने के सवाल पर मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. किशोरीलाल का कहना है कि उनके स्तर से सफाई में कोई कमी नहीं रखी जा रही। दवा छिड़काव की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी की है। सीएमएस ने कहा कि उनकी जानकारी में अस्पताल में दवा का छिड़काव नहीं हुआ।
ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की कमी नहीं
बांदा। जिला अस्पताल में डेंगू और बुखार के मरीजों की भरमार है। इनमें कई को गंभीर बताकर कानपुर रेफर किया जा रहा है। दूसरी तरफ अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एसके वाजपेई का दावा है कि ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की कोई कमी नहीं है।
104 यूनिट आरबीसी और 250 यूनिट प्लाजमा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सितंबर में अब तक 32 यूनिट आरबीसी दिया जा चुका है। पिछले माह 143 यूनिट दिया गया था।
महंगी, फिर भी प्राइवेट पैथालॉजी पर भरोसा
बांदा। अस्पताल प्रशासन कुछ भी दावे करे, पर मरीजों को प्राइवेट पैथालॉजी पर कुछ ज्यादा ही भरोसा है। जिला अस्पताल की लैब में रियायती दरों पर हो रही जांच पर पूरा यकीन नहीं है। दूसरी वजह यह भी कि जिला अस्पताल के लैब पैथालॉजी में मलेरिया और प्लेटलेट्स की जांच के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।
रिपोर्ट मिलने में लगभग पूरा दिन बीत जाता है। दूसरी तरफ प्राइवेट पैथालॉजी में ब्लड लेने के मात्र दो घंटे बाद ही रिपोर्ट मिल जाती है। हालांकि यहां डेंगू जांच में 900 रुपये और मलेरिया कार्ड से जांच 250 रुपये और साधारण मलेरिया जांच के लिए 150 रुपये वसूले जाते हैं।
दस दिन बाद ही पैथालॉजी को क्लीनचिट
बांदा। डेंगू से ताबड़तोड़ मौतों और मरीजों की बढ़ती संख्या से घबराए स्वास्थ्य विभाग ने सील की गई पैथालॉजी को 10 दिन बाद पुन: चालू करने की अनुमति दे दी। उधर, पैथालॉजी संचालकों का कहना है कि अपनी जांच में डेंगू दर्शाने का खामियाजा भुगतना पड़ा है, जबकि जांच भरोसेमंद है।
डेंगू से मौतें और जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे मरीजों से घबराए प्रशासन ने पिछले माह निजी पैथालॉजी के विरुद्ध अचानक अभियान छेड़ दिया था। पैथालाजी में मरीजों के खून की जांच रिपोर्ट में डेंगू के लक्षण बताए गए थे, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग नकार रहा था। 28 अगस्त को इंदिरा नगर स्थित हाड़ा हाईटेक डायग्नोस्टिक सेंटर में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापामार कर कंप्लीट ब्लड काउंट मशीन को सील कर दिया था।
साथ ही स्पष्टीकरण मांगा था। अब सीएमओ ने छह सितंबर को जारी आदेश में कहा है कि पैथालॉजी संचालक कुंवर देवेंद्र सिंह द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के बाद उन्हें कड़ी चेतावनी जारी कर मशीन की सील तत्काल प्रभाव से खोलने की स्वीकृति दे दी गई है।