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Banda News: विद्यालय में नहीं था फायर फाइटिंग सिस्टम, आने-जाने का एक रास्ता
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= हॉस्टल के बगल में बनी मिली रसोई, सीएफओ ने टीम के साथ किया था निरीक्षण, मिली थी कमियां
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। आवासीय विद्यालय में 234 बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। विद्यालय में न तो फायर फाइटिंग सिस्टम था और न ही आने-जाने के रास्ते अलग-अलग थे। हालात यह थे कि 34 बच्चों को जिन हाॅस्टल में रखा गया था उसके बगल में ही रसोई बनी हुई थी और यहीं पर गैस से खाना पकाया जाता था।
नियमों के अनुसार किसी भी शैक्षिक संस्थान या अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम किए जाते हैं। इमारत में फायर अलार्म, आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक सिस्टम को स्थापित कराना पड़ता है। इसके साथ ही आपातकाल में निकलने के लिए एक अलग रास्ता, पानी का इंतजाम, अग्निशमन गाड़ियों के पहुंचने का रास्ता आदि शामिल है। इसी तरह से जहां पर छात्र पढ़ते हो या रहते हों, उसके पास रसोई घर नहीं होना चाहिए। सीएफओ बांदा की टीम ने जब बुधवार को आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया तो वहां कई कमियां मिली। सबसे बड़ी कमी तो यह थी कि विद्यालय में आग बुझाने का कोई भी सिस्टम नहीं लगाया गया था और न ही अग्निशमन यंत्र रखे गए थे। दो सिलिंडर थे जरूर लेकिन वह निक्रिष्य पाए गए। हॉस्टल से सटी हुई रसोई मिली और विद्यालय में आने व जाने का केवल एक ही गेट था। इसके साथ ही जिस जगह पर विद्यालय स्थित है। वह बेहद ही संकरा इलाका है। विद्यालय की ओर से अग्निशमन विभाग की ओर से वर्ष 2009 में एनओसी ली गई थी।फिलहाल सीएफओ की ओर से सात दिन का समय देकर सुरक्षा मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि 17 अगस्त के हादसे के बाद से विद्यालय बंद है और यहां शिक्षण कार्य भी ठप हो गया है।
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= हॉस्टल के बगल में बनी मिली रसोई, सीएफओ ने टीम के साथ किया था निरीक्षण, मिली थी कमियां
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। आवासीय विद्यालय में 234 बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। विद्यालय में न तो फायर फाइटिंग सिस्टम था और न ही आने-जाने के रास्ते अलग-अलग थे। हालात यह थे कि 34 बच्चों को जिन हाॅस्टल में रखा गया था उसके बगल में ही रसोई बनी हुई थी और यहीं पर गैस से खाना पकाया जाता था।
नियमों के अनुसार किसी भी शैक्षिक संस्थान या अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम किए जाते हैं। इमारत में फायर अलार्म, आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक सिस्टम को स्थापित कराना पड़ता है। इसके साथ ही आपातकाल में निकलने के लिए एक अलग रास्ता, पानी का इंतजाम, अग्निशमन गाड़ियों के पहुंचने का रास्ता आदि शामिल है। इसी तरह से जहां पर छात्र पढ़ते हो या रहते हों, उसके पास रसोई घर नहीं होना चाहिए। सीएफओ बांदा की टीम ने जब बुधवार को आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया तो वहां कई कमियां मिली। सबसे बड़ी कमी तो यह थी कि विद्यालय में आग बुझाने का कोई भी सिस्टम नहीं लगाया गया था और न ही अग्निशमन यंत्र रखे गए थे। दो सिलिंडर थे जरूर लेकिन वह निक्रिष्य पाए गए। हॉस्टल से सटी हुई रसोई मिली और विद्यालय में आने व जाने का केवल एक ही गेट था। इसके साथ ही जिस जगह पर विद्यालय स्थित है। वह बेहद ही संकरा इलाका है। विद्यालय की ओर से अग्निशमन विभाग की ओर से वर्ष 2009 में एनओसी ली गई थी।फिलहाल सीएफओ की ओर से सात दिन का समय देकर सुरक्षा मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि 17 अगस्त के हादसे के बाद से विद्यालय बंद है और यहां शिक्षण कार्य भी ठप हो गया है।
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