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दावे बड़े, तैयारियां कुछ नहीं

Thu, 01 Apr 2021 11:19 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 01 Apr 2021 11:19 PM IST
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बांदा। गर्मी शुरू होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया। मच्छर जनित रोगों का खतरा मंडराने लगा है। खासकर डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा ज्यादा है, लेकिन मच्छरों से निपटने के लिए मलेरिया विभाग फिलहाल तैयार नहीं हैं। नगर पालिका की फागिंग कागजों में हो रही। हैरत की बात यह है कि अब तक न फागिंग का रोस्टर बना और न ही लार्वा निरोधी दवाओं का छिड़काव शुरू हुआ है।
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मच्छरों के पनपने के लिए 30 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान मुफीद माना जाता है। ज्यादा सर्दी और गर्मी में मच्छर सुस्त रहते हैं, लेकिन सर्दी का मौसम विदा होने और गर्मी शुरू होने पर मच्छरों की संख्या में बेहद इजाफा हो गया। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप तेज हो जाता है। मौजूदा समय में जिले का तापमान लगभग 39 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। ऐसे में मच्छरों की संख्या में एकदम इजाफा हो रहा है। मच्छर जनित रोगों का खतरा मंडराने लगा है। अस्पतालों में इक्का-दुक्का मलेरिया बुखार के मरीजों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया।
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हालांकि, अभी डेंगू और चिकनगुनिया का खतरा नहीं बढ़ा। फाइलेरिया परजीवी की यहां संभावना बेहद कम होने से फिलहाल खतरा नाम मात्र का है। मच्छरों की बढ़ती संख्या को काबू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका फिलहाल तैयार नहीं हैं। मलेरिया विभाग का कहना है कि जहां डेंगू-मलेरिया के पॉजिटिव केस मिलते हैं, वहां फागिंग कराई जाती है। दूसरी तरफ नगर पालिका का दावा है कि प्रतिदिन डेढ़ घंटे फागिंग कराई जा रही है। इसके बावजूद मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो रहा।
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पॉजिटिव केस मिलने पर कराते फागिंग
मलेरिया विभाग की तरफ से नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में फागिंग तभी कराई जाती है, जब डेंगू व मलेरिया के पॉजिटिव केस सामने आते हैं। इसके अलावा फागिंग कराने के लिए नगर पालिका/नगर पंचायतों की जिम्मेदारी है। फिलहाल संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा है।

- लाल साहब सिंह, सहायक मलेरिया अधिकारी, बांदा।
इंसेट---
पालिका की एक ही मशीन चल रही है। अब तक 10 से 12 वार्डों में फागिंग हो चुकी है। प्रतिदिन फागिंग में 50 लीटर डीजल, 12 लीटर पेट्रोल की खपत हो रही है। डेढ़ घंटे ही फागिंग मशीन चल पा रही है। मच्छरों का अधिक प्रकोप होने पर फागिंग और तेज कराई जाएगी। फागिंग रोस्टर के बारे में नहीं बता सके।
- ओमवीर सिंह, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका, बांदा।
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