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Banda News: पैरोल पर छूटे सात बंदी फिर घूम कर नहीं लौटे
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फोटो- 01 बांदा जेल का मुख्य द्वार। संवाद
- तीन साल से फरार चल रहे हैं जघन्य अपराधी, जेल प्रशासन का दावा-कई बार भेजे गए नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। कोरोना काल में पैरोल पर रिहा किए गए सात बंदी अब तक जेल वापस नहीं लौटे हैं। ये अपराधी लूट, हत्या, चोरी और अपहरण जैसे संगीन अपराधों में लिप्त थे और तीन साल से फरार चल रहे हैं। जेल प्रशासन द्वारा बार-बार नोटिस भेजे जाने और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखे जाने के बावजूद पुलिस अभी तक इन बंदियों को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है।
कोरोना महामारी के दौरान जेलों में भीड़ कम करने और संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से, कई राज्यों में कैदियों को पैरोल पर रिहा किया गया था। बांदा जिला कारागार से भी वर्ष 2022 में विभिन्न चरणों में कुल 64 बंदियों को पैरोल पर रिहा किया गया था। इनमें से अधिकांश बंदी, यानी 57, नियत समय पर जेल लौट आए थे। हालांकि, सात बंदी ऐसे हैं जिन्होंने अपनी पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद जेल में आत्मसमर्पण नहीं किया और वे फरार हो गए। जेल से फरार हुए सात बंदी विभिन्न संगीन अपराधों में दोषी पाए गए थे।
जेल प्रशासन का दावा है कि इन फरार बंदियों को वापस लाने के लिए मशक्कत की है। बंदियों को वापस जेल लौटने के लिए कई नोटिस भेजे गए लेकिन उनका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद जेल प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक को भी पत्र लिखा है। इसके बावजूद, पुलिस अभी तक इन सात फरार बंदियों में से किसी को भी पकड़ने में सफल नहीं हुई है।
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सूची और पैरोल समाप्ति की तारीखें
नाम
स्थान
पैरोल समाप्ति
अपराध
सुनील कैरी बिसंडा 13 नवंबर 2022
380, 411
लुस्सु सोनार गली अतर्रा 13 नवंबर 2022
363, 366
सुग्रीव पडेरी पैलानी 15 मार्च 2022
452, 306
विमलेश बांसी सिर्द्धातनगर 13 नवंबर 2022
धारा-3
सुनील कुमार रेउना (कानपुर)
13 नवंबर 2022 414, 177
रामरतन
किरन कालेज (बांदा)
15 मार्च 2022
304, 506
देवीदयाल
चिल्ली (बांदा)
15 मार्च 2022
304, 506
संभावित खतरे और चिंता का विषय
इन फरार बंदियों का समाज में रहना एक गंभीर चिंता का विषय है। ये सभी अपराधी लूट, हत्या, चोरी और अपहरण जैसे जघन्य अपराधों में लिप्त रहे हैं। इनके बाहर रहने से इन अपराधों में वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम जनता की सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है।
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वर्जन-
पैरोल खत्म होने के बाद वापस जेल न आने वाले बंदियों के परिजनों को नोटिस भेजा गया। पुलिस को भी ऐसे बंदियों को पकड़ने के लिए कई बार सूची भेजी गई है।-आलोक कुमार, जेलर, बांदा
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वर्जन-
जेल प्रशासन ने अभी तक पैरोल में छूटे बंदियों के वापस न आने की सूचना नहीं दी है। सूचना मिलती तो पकड़ा जाता। यदि ऐसा है तो जेल प्रशासन से संपर्क करेंगे।-शिवलाल, अपर पुलिस अधीक्षक
मंडल कारागार में बंदियों की संख्या बढ़ी, बनेंगी चार नई हाईटेक बैरकें
बांदा। मंडल कारागार में बंदियों की बढ़ती संख्या और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक बैरकों का निर्माण करा रही है। यहां 30-30 बंदियों की क्षमता वाली चार बैरकें बनाई जा रही हैं। इन बैरकों का उद्देश्य बंदियों की बढ़ती संख्या और सुरक्षा को अभेद्य बनाना है।
बैरकों के निर्माण पर चार करोड़ 43 लाख रुपये की लागत आएगी। यह कार्य उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। निर्माण कार्य लगभग बीस फीसदी तक पूरा हो गया है। इसे अक्टूबर दो हजार छब्बीस तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन बैरकों के बनने से बंदियों का दबाव कम होगा। संवेदनशील अपराधियों के लिए अलग और सुरक्षित स्थान सुनिश्चित होगा। दो मंजिला दो भवन बनाए जा रहे हैं जिनमें ये चार बैरकें होंगी। बैरकों के बाहर एक सर्कल वॉल में पचासी मीटर का नया निर्माण भी सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।
यूपीआरएनएसएस के अपर परियोजना प्रबंधक आयुष सोमवंशी ने निर्माण कार्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंडल कारागार बांदा में चार बैरकों का निर्माण जारी है। लगभग बीस फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया गया है। वर्तमान में दीवारों का निर्माण कार्य चल रहा है। बंदियों के नहाने के लिए एक अलग प्लेटफॉर्म भी बनाया जा रहा है। इन बैरकों का निर्माण बंदियों की बढ़ती संख्या से उत्पन्न दबाव को कम करेगा। यह संवेदनशील अपराधियों को अलग और सुरक्षित जगह प्रदान करेगा। पचासी मीटर की सर्कल वॉल का निर्माण सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाएगा। इससे जेल में बंदियों को रहने में असुविधा नहीं होगी। सरकार का लक्ष्य जेलों को आधुनिक और सुरक्षित बनाना है।
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- तीन साल से फरार चल रहे हैं जघन्य अपराधी, जेल प्रशासन का दावा-कई बार भेजे गए नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। कोरोना काल में पैरोल पर रिहा किए गए सात बंदी अब तक जेल वापस नहीं लौटे हैं। ये अपराधी लूट, हत्या, चोरी और अपहरण जैसे संगीन अपराधों में लिप्त थे और तीन साल से फरार चल रहे हैं। जेल प्रशासन द्वारा बार-बार नोटिस भेजे जाने और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखे जाने के बावजूद पुलिस अभी तक इन बंदियों को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है।
कोरोना महामारी के दौरान जेलों में भीड़ कम करने और संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से, कई राज्यों में कैदियों को पैरोल पर रिहा किया गया था। बांदा जिला कारागार से भी वर्ष 2022 में विभिन्न चरणों में कुल 64 बंदियों को पैरोल पर रिहा किया गया था। इनमें से अधिकांश बंदी, यानी 57, नियत समय पर जेल लौट आए थे। हालांकि, सात बंदी ऐसे हैं जिन्होंने अपनी पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद जेल में आत्मसमर्पण नहीं किया और वे फरार हो गए। जेल से फरार हुए सात बंदी विभिन्न संगीन अपराधों में दोषी पाए गए थे।
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जेल प्रशासन का दावा है कि इन फरार बंदियों को वापस लाने के लिए मशक्कत की है। बंदियों को वापस जेल लौटने के लिए कई नोटिस भेजे गए लेकिन उनका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद जेल प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक को भी पत्र लिखा है। इसके बावजूद, पुलिस अभी तक इन सात फरार बंदियों में से किसी को भी पकड़ने में सफल नहीं हुई है।
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सूची और पैरोल समाप्ति की तारीखें
नाम
स्थान
पैरोल समाप्ति
अपराध
सुनील कैरी बिसंडा 13 नवंबर 2022
380, 411
लुस्सु सोनार गली अतर्रा 13 नवंबर 2022
363, 366
सुग्रीव पडेरी पैलानी 15 मार्च 2022
452, 306
विमलेश बांसी सिर्द्धातनगर 13 नवंबर 2022
धारा-3
सुनील कुमार रेउना (कानपुर)
13 नवंबर 2022 414, 177
रामरतन
किरन कालेज (बांदा)
15 मार्च 2022
304, 506
देवीदयाल
चिल्ली (बांदा)
15 मार्च 2022
304, 506
संभावित खतरे और चिंता का विषय
इन फरार बंदियों का समाज में रहना एक गंभीर चिंता का विषय है। ये सभी अपराधी लूट, हत्या, चोरी और अपहरण जैसे जघन्य अपराधों में लिप्त रहे हैं। इनके बाहर रहने से इन अपराधों में वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम जनता की सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है।
वर्जन-
पैरोल खत्म होने के बाद वापस जेल न आने वाले बंदियों के परिजनों को नोटिस भेजा गया। पुलिस को भी ऐसे बंदियों को पकड़ने के लिए कई बार सूची भेजी गई है।-आलोक कुमार, जेलर, बांदा
वर्जन-
जेल प्रशासन ने अभी तक पैरोल में छूटे बंदियों के वापस न आने की सूचना नहीं दी है। सूचना मिलती तो पकड़ा जाता। यदि ऐसा है तो जेल प्रशासन से संपर्क करेंगे।-शिवलाल, अपर पुलिस अधीक्षक
मंडल कारागार में बंदियों की संख्या बढ़ी, बनेंगी चार नई हाईटेक बैरकें
बांदा। मंडल कारागार में बंदियों की बढ़ती संख्या और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक बैरकों का निर्माण करा रही है। यहां 30-30 बंदियों की क्षमता वाली चार बैरकें बनाई जा रही हैं। इन बैरकों का उद्देश्य बंदियों की बढ़ती संख्या और सुरक्षा को अभेद्य बनाना है।
बैरकों के निर्माण पर चार करोड़ 43 लाख रुपये की लागत आएगी। यह कार्य उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। निर्माण कार्य लगभग बीस फीसदी तक पूरा हो गया है। इसे अक्टूबर दो हजार छब्बीस तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन बैरकों के बनने से बंदियों का दबाव कम होगा। संवेदनशील अपराधियों के लिए अलग और सुरक्षित स्थान सुनिश्चित होगा। दो मंजिला दो भवन बनाए जा रहे हैं जिनमें ये चार बैरकें होंगी। बैरकों के बाहर एक सर्कल वॉल में पचासी मीटर का नया निर्माण भी सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।
यूपीआरएनएसएस के अपर परियोजना प्रबंधक आयुष सोमवंशी ने निर्माण कार्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंडल कारागार बांदा में चार बैरकों का निर्माण जारी है। लगभग बीस फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया गया है। वर्तमान में दीवारों का निर्माण कार्य चल रहा है। बंदियों के नहाने के लिए एक अलग प्लेटफॉर्म भी बनाया जा रहा है। इन बैरकों का निर्माण बंदियों की बढ़ती संख्या से उत्पन्न दबाव को कम करेगा। यह संवेदनशील अपराधियों को अलग और सुरक्षित जगह प्रदान करेगा। पचासी मीटर की सर्कल वॉल का निर्माण सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाएगा। इससे जेल में बंदियों को रहने में असुविधा नहीं होगी। सरकार का लक्ष्य जेलों को आधुनिक और सुरक्षित बनाना है।