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बुंदेली खनिज संपदा बालू ढुलान में रेलवे भी कूदा
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बांदा से रेलवे रैक में राजस्थान ले जाने के लिए डंप बालू।
- फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेली खनिज संपदा बालू ढुलान में अब रेलवे भी कूद पड़ा है। रेलवे प्रदेश के बाहर अन्य प्रांतों में बालू पहुंचाएगा। शुरुआत सोमवार से हो रही है। पहली रैक बालू लेकर राजस्थान जाएगी। भाड़े के लिए रेलवे ने अनुबंध किया है। अभी तक ट्रकों से ही बालू की ढुलान हो रही थी।
बालू का खनन केन, यमुना, बागै, बेतवा आदि नदियों से किया जा रहा है। साल-दर-साल खनन में भारी इजाफा हो रहा है। प्रदेश सरकार को रॉयल्टी के रूप में हर साल अरबों रुपये मिल रहे हैं। खदानों के पट्टे हथियाने में देश की बड़ी कंपनियां भी कूद पड़ी हैं।
प्रतिस्पर्धा में रॉयल्टी की दर 10 गुना तक बढ़ गई है। हजारों ट्रक रोजाना बांदा और हमीरपुर जिले की खदानों से पूरे प्रदेश में बालू ले जा रहे हैं। ओवरलोड और अवैध खनन की भरमार है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कई बार इस पर जांच और कार्रवाई के आदेश दे चुका है। सीबीआई जांच भी चल रही है, लेकिन राजस्व जुटाने की होड़ में नदियों से वैध और अवैध खनन नहीं थम रहा।
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बालू की ढुलान से कमाई के लिए अब रेलवे भी आगे आ गया है। रेलवे ने बुंदेलखंड की बालू भाड़े पर दूसरे प्रांतों में पहुंचाने के लिए अनुबंध किया है। इसकी शुरुआत बांदा रेलवे स्टेशन से हो रही है। यहां भारी मात्रा में बालू डंप की गई है। इसे मालगाड़ी से उदयपुर (राजस्थान) भेजा जा रहा है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक हरेक रैक में लगभग 70 टन बालू लोड होगी। पहली रैक सोमवार को यहां से रवाना होने की उम्मीद है।
बालू ढुलान चढ़ेगी और परवान
बांदा। मालगाड़ी से बालू ढुलान और परवान चढ़ सकती है। रेलवे से ढुलान में ओवरलोडिंग और सड़कों को नुकसान पहुंचने की शिकायतों में भी कमी आएगी। साथ ही ट्रकों की तुलना में रेलवे रैक में बालू की मात्रा ज्यादा लोड हो सकेगी। रेलवे सूत्रों के मुताबिक एक रैक में लगभग 70 टन बालू लोड की जाएगी। पहली खेप में 19 रैक बालू लेकर जाएगी।
ट्रकों से दोगुना लोड होगी रैकों में बालू
बांदा। ट्रकों के मुकाबले रेलवे रैक में बालू लगभग दोगुना लोड होगी। आमतौर पर 10 टायरा ट्रक में 30 घन मीटर के आसपास बालू लोड की जाती है। हालांकि यह ओवरलोड है। इसका वजन 45 टन के लगभग होता है, जबकि रैक में 70 टन बालू लोड होगी। यह 105 घन मीटर होती है।
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बालू का खनन केन, यमुना, बागै, बेतवा आदि नदियों से किया जा रहा है। साल-दर-साल खनन में भारी इजाफा हो रहा है। प्रदेश सरकार को रॉयल्टी के रूप में हर साल अरबों रुपये मिल रहे हैं। खदानों के पट्टे हथियाने में देश की बड़ी कंपनियां भी कूद पड़ी हैं।
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प्रतिस्पर्धा में रॉयल्टी की दर 10 गुना तक बढ़ गई है। हजारों ट्रक रोजाना बांदा और हमीरपुर जिले की खदानों से पूरे प्रदेश में बालू ले जा रहे हैं। ओवरलोड और अवैध खनन की भरमार है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कई बार इस पर जांच और कार्रवाई के आदेश दे चुका है। सीबीआई जांच भी चल रही है, लेकिन राजस्व जुटाने की होड़ में नदियों से वैध और अवैध खनन नहीं थम रहा।
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बालू की ढुलान से कमाई के लिए अब रेलवे भी आगे आ गया है। रेलवे ने बुंदेलखंड की बालू भाड़े पर दूसरे प्रांतों में पहुंचाने के लिए अनुबंध किया है। इसकी शुरुआत बांदा रेलवे स्टेशन से हो रही है। यहां भारी मात्रा में बालू डंप की गई है। इसे मालगाड़ी से उदयपुर (राजस्थान) भेजा जा रहा है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक हरेक रैक में लगभग 70 टन बालू लोड होगी। पहली रैक सोमवार को यहां से रवाना होने की उम्मीद है।
बालू ढुलान चढ़ेगी और परवान
बांदा। मालगाड़ी से बालू ढुलान और परवान चढ़ सकती है। रेलवे से ढुलान में ओवरलोडिंग और सड़कों को नुकसान पहुंचने की शिकायतों में भी कमी आएगी। साथ ही ट्रकों की तुलना में रेलवे रैक में बालू की मात्रा ज्यादा लोड हो सकेगी। रेलवे सूत्रों के मुताबिक एक रैक में लगभग 70 टन बालू लोड की जाएगी। पहली खेप में 19 रैक बालू लेकर जाएगी।
ट्रकों से दोगुना लोड होगी रैकों में बालू
बांदा। ट्रकों के मुकाबले रेलवे रैक में बालू लगभग दोगुना लोड होगी। आमतौर पर 10 टायरा ट्रक में 30 घन मीटर के आसपास बालू लोड की जाती है। हालांकि यह ओवरलोड है। इसका वजन 45 टन के लगभग होता है, जबकि रैक में 70 टन बालू लोड होगी। यह 105 घन मीटर होती है।