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दिल्ली से आए क्वारंटीन मजदूर की अस्पताल में मौत
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बांदा। 20 दिन पूर्व दिल्ली से आए प्रवासी मजदूर की यहां नरैनी सीएचसी में क्वारंटीन किए जाने के कुछ ही देर बाद मौत हो गई। उसकी उम्र लगभग 25 वर्ष थी। दिल्ली से आने के बाद बीमार पड़ गया था। मंगलवार को जिला अस्पताल लाए जाने पर उसे क्वारंटीन में नरैनी सीएचसी भेज दिया गया। वहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए उसका नमूना नहीं लिया। सीएमओ और सीएचसी अधीक्षक दोनों ने ही अलग-अलग दलीलें दीं।
बिसंडा पीएचसी व थाना क्षेत्र अंतर्गत सिकलोढ़ी गांव निवासी बलवीर (25) पुत्र रामऔतार सिंह दिल्ली में पेंटिंग का कार्य करता था। लॉकडाउन में 20 दिन पूर्व वह दिल्ली से घर आ गया था। यहां आने के बाद वह बीमार पड़ गया। मंगलवार को परिजन उसे जिला अस्पताल लाए।
यहां से कोरोना की जांच के लिए नरैनी सीएचसी रेफर कर दिया गया। वहां क्वारंटीन किए जाने के कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है। शव का कोरोना सैंपल नहीं भेजा गया। मृतक के भाई प्रदीप सिंह ने बताया कि बलवीर टीबी का रोगी था। प्रदीप ने आरोप लगाया कि वहां डाक्टरों ने बलवीर को छुआ तक नहीं और क्वारंटीन कमरे में बंद कर दिया। डाक्टरों के इस रवैये पर हंगामा करने के बाद उसे बाहर निकाला, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
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उधर, सीएचसी चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस राजपूत ने बताया कि रात को आने की वजह से उसका सैंपल नहीं लिया जा सका। बुधवार को नमूना भेजने की तैयारी थी, लेकिन उसकी मौत हो गई। दूसरी तरफ सीएमओ डॉ. संतोष कुमार ने दलील दी कि नमूना भेजकर जांच रिपोर्ट के इंतजार में शव और सड़ जाता। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। सीएमओ बोले- हर किसी की कोरोना जांच जरूरी नहीं है।
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बिसंडा पीएचसी व थाना क्षेत्र अंतर्गत सिकलोढ़ी गांव निवासी बलवीर (25) पुत्र रामऔतार सिंह दिल्ली में पेंटिंग का कार्य करता था। लॉकडाउन में 20 दिन पूर्व वह दिल्ली से घर आ गया था। यहां आने के बाद वह बीमार पड़ गया। मंगलवार को परिजन उसे जिला अस्पताल लाए।
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यहां से कोरोना की जांच के लिए नरैनी सीएचसी रेफर कर दिया गया। वहां क्वारंटीन किए जाने के कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है। शव का कोरोना सैंपल नहीं भेजा गया। मृतक के भाई प्रदीप सिंह ने बताया कि बलवीर टीबी का रोगी था। प्रदीप ने आरोप लगाया कि वहां डाक्टरों ने बलवीर को छुआ तक नहीं और क्वारंटीन कमरे में बंद कर दिया। डाक्टरों के इस रवैये पर हंगामा करने के बाद उसे बाहर निकाला, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
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उधर, सीएचसी चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस राजपूत ने बताया कि रात को आने की वजह से उसका सैंपल नहीं लिया जा सका। बुधवार को नमूना भेजने की तैयारी थी, लेकिन उसकी मौत हो गई। दूसरी तरफ सीएमओ डॉ. संतोष कुमार ने दलील दी कि नमूना भेजकर जांच रिपोर्ट के इंतजार में शव और सड़ जाता। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। सीएमओ बोले- हर किसी की कोरोना जांच जरूरी नहीं है।