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बकरी पालन कर कई परिवारों को दे रहे रोजगार

Thu, 02 Jan 2020 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jan 2020 11:45 PM IST
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Providing employment to many families by goat rearing
बकरी पालन। - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड में किसानों और पशुपालकों का गायों से भले ही मोहभंग हो गया हो, पर महात्मा गांधी द्वारा कही गई ‘गरीब की गाय’ यानी बकरी पालन में रुझान बढ़ रहा है। इसकी बानगी जिले के छनेहरा लालपुर गांव में युवा और शिक्षित प्रगतिशील किसान असलम खां की आधुनिक बकरी यूनिट है। असलम खुद की आमदनी बढ़ाने के साथ बुंदेलखंड में बकरी पालन को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा उनके फार्म में तकरीबन 12 लोगों को रोजगार भी मिला है।
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बड़ोखर ब्लाक के छनेहरा लालपुर गांव स्थित बुंदेलखंड जैविक कृषि फार्म में आधुनिक बकरी पालन इकाई चल रही है। इसका संचालन मोहम्मद असलम और उनकी पत्नी आसमा खातून कर रहे हैं। असलम बताते हैं कि उन्होंने बकरी पालन की शुरुआत घरेलू और देशी तरीके से वर्ष 2005 में की थी। बकरियों को जंगल में चराते थे। रात में टिनशेड के नीचे रखते थे। अक्सर बकरियां बीमार हो जाती थी।
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गर्मियों में चारे की समस्या थी। इन्हीं हालात के बीच उन्होंने वर्ष 2005 से व्यवसायिक नजरिए से आधुनिक बकरी पालन शुरू किया। वर्ष 2017-18 में सीआईआरजी मथुरा से बकरी पालन की ट्रेनिंग ली। सीआईआरजी ने उन्हें बुंदेलखंड में मल्टी प्लायर फ्लाग स्कीम बरबरी नस्ल के लिए चयनित करके उनके फार्म में उन्नत नस्ल की बकरियों की इकाई स्थापित कराई। असलम बताते हैं कि मेहनत रंग लाई। उनके फार्म में स्टाल फीडिंग विधि से बकरी पालन किया जा रहा है। उन्नत नस्ल के बीजू बकरे और बकरियां बेची जा रही हैं। खरीददार पशुपालकों को बकरी पालन की विस्तृत जानकारी भी दी जाती है। इस समय उनके फार्म में करीब 30 बकरियां हैं।
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25 से 30 प्रतिशत लाभ
बांदा। असलम खां बताते हैं कि प्रति बकरी 600 से 700 रुपये मासिक खर्च आता है। उन्होंने कहा कि बकरी व्यवसाय में उन्हें 25 से 30 प्रतिशत नफा (लाभ) हो रहा है। कई लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इसके साथ ही बुंदेलखंड में बकरी पालन का रुझान बढ़ रहा है और नस्ल सुधर रही है।
बकरी की लेड़ी की खाद 10 रुपये किलो
बांदा। आम के आम, गुठलियों के भी दाम। बकरी पालन का यह भी अर्थ गणित है। असलम खां बताते हैं कि बकरी की मेंगनी (लेड़ी) की खाद 10 रुपये किलो बिकती है। साथ ही इससे वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार होती है। वे अपने फार्म में बकरियों की लेड़ी से वर्मी कंपोस्ट बनाकर कृषि फार्म में उपयोग कर रहे हैं। हाल के वर्षों में लगभग 20 क्विंटल बकरी की लेड़ी की खाद बेंच चुके हैं।

डीएम सहित कई विभागों ने किया सम्मानित
बांदा। छनेहरा लालपुर की आधुनिक बकरी इकाई सहित इस फर्म में मुर्गी, मछली पालन, बागवानी आदि के किए जा रहे कार्यों पर फार्म के संचालक असलम खां व उनकी पत्नी आसमा खातून को कृषि विभाग, डीएम, पशु चिकित्साधिकारी और जिला उद्यान अधिकारी प्रमाण/प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कर चुके है। डीएम हीरालाल, कृषि उप निदेशक एके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.आर्यन सिंह और जिला उद्यान अधिकारी परवेज खां ने दिसंबर में उन्हें प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया था।

किसान असलम।

किसान असलम।- फोटो : BANDA

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