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बरसाती सब्जियों की तैयार करें नर्सरी
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कृषि विश्वविद्यालय में कार्यशाला को संबोधित करते डा.यूएस गौतम।
- फोटो : BANDA
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बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसमी पौधे और बरसाती सब्जियों की नर्सरी तैयार करने की सलाह दी है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि बरसाती टमाटर, बैगन और मिर्च की नर्सरी के लिए जून के अंत तक बुआई कर लें। रोगों के नियंत्रण के लिए खरपतवार प्रबंधन अवश्य करें। वर्षा जल के लिए खेतों की गहरी जुताई करें और मृदा कंपोस्ट मिलाएं।
उन्होंने कहा कि हरी खाद के लिए मूंग, सनई, ढैंचा आदि बुआई के लिए मौजूदा समय मुफीद है। जैविक नियंत्रण के लिए बैसिलस थूरिनजिएसिंस (बीटी) एक किलो या एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेअर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
कद्दू वर्गीय सब्जियों में मक्खी के नियंत्रण के लिए मिथाइल यूजीनाल, इथाइल एल्कोहल, मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी के 4.6.1 के बने घोल में प्लाईवुड के टुकडों को शोधित कर लगाने से मक्खी प्लाई वुड के टुकड़ों पर आकर्षित होती है। जिसे एकत्र करके नष्ट किया जा सकता हैं। बेर, आंवला, नीबू को गर्मी से बचाने के लिए 3-4 दिनों के अंतराल में सिंचाई की करें।
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उन्होंने कहा कि हरी खाद के लिए मूंग, सनई, ढैंचा आदि बुआई के लिए मौजूदा समय मुफीद है। जैविक नियंत्रण के लिए बैसिलस थूरिनजिएसिंस (बीटी) एक किलो या एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेअर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
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कद्दू वर्गीय सब्जियों में मक्खी के नियंत्रण के लिए मिथाइल यूजीनाल, इथाइल एल्कोहल, मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी के 4.6.1 के बने घोल में प्लाईवुड के टुकडों को शोधित कर लगाने से मक्खी प्लाई वुड के टुकड़ों पर आकर्षित होती है। जिसे एकत्र करके नष्ट किया जा सकता हैं। बेर, आंवला, नीबू को गर्मी से बचाने के लिए 3-4 दिनों के अंतराल में सिंचाई की करें।
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