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भूखी भटक रही गायें खा रहीं को मिल रहे डंडे
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 30 Jan 2016 11:52 PM IST
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बांदा। अन्ना गायों पर आए दिन आंसू बहाने वाले अगर
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इनकी हमदर्दी में आगे न आए तो बुंदेलखंड में बड़ी संख्या में गायों की अकाल
से मौत होना तय है। कहीं ये भूख से मरेंगी तो कहीं चारे की तलाश में रेल
की चपेट में आकर कटेंगी।
कुछ गौ सेवक किसानों ने अन्ना गायों को बाड़ा बनाकर रोक लिया है, लेकिन उनके सामने चारे का संकट है। इनसे हमदर्दी रखने वाले लोग मदद कर दें तो बेसहारा जानवरों को भुखमरी से बचाया जा सकता है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में अन्ना मवेशियों की तादाद 2,58,447 हो गई है। दैवी आपदा की मार से जूझ रहे बुंदेलखंड में खेती के लिए अन्ना प्रथा बड़ी चुनौती बन गई है।
कड़ाके की ठंड में रात-दिन किसान खेतों में डेरा डालकर अन्ना मवेशियों से अपनी फसलों की रखवाली कर रहे हैं। ठंड से कई किसानों की मौत भी हो चुकी है।
पिछले कुछ वर्षों से बुंदेलखंड और खासकर चित्रकूटधाम मंडल में अन्ना मवेशियों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या गायों की है। शहर से लेकर गांवों तक अन्ना गायों की बाढ़ आ गई है।
सूखे से जूझ रहे पशुपालकों और किसानों ने इन्हें छुट्टा छोड़ दिया है। भूख से परेशान गायें बाजारों में इधर-उधर मुंह मारती हैं तो लाठी-डंडों की मार सहनी पड़ती है।
सड़कों पर यह ट्रैफिक के लिए खतरा और समस्या बन रही हैं। चारे के लिए भटकती इन गायों को अक्सर जान गंवानी पड़ रही है।
हाल ही में ऐसी ही एक घटना में बांदा रेलवे स्टेशन से चंद कदम दूर केन नदी रेलवे पुल के पास भटक रही एक दर्जन गायें ट्रेन की चपेट में आ गईं। 10 की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गईं।
कुछ गौ सेवक किसानों ने अन्ना गायों को बाड़ा बनाकर रोक लिया है, लेकिन उनके सामने चारे का संकट है। इनसे हमदर्दी रखने वाले लोग मदद कर दें तो बेसहारा जानवरों को भुखमरी से बचाया जा सकता है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में अन्ना मवेशियों की तादाद 2,58,447 हो गई है। दैवी आपदा की मार से जूझ रहे बुंदेलखंड में खेती के लिए अन्ना प्रथा बड़ी चुनौती बन गई है।
कड़ाके की ठंड में रात-दिन किसान खेतों में डेरा डालकर अन्ना मवेशियों से अपनी फसलों की रखवाली कर रहे हैं। ठंड से कई किसानों की मौत भी हो चुकी है।
पिछले कुछ वर्षों से बुंदेलखंड और खासकर चित्रकूटधाम मंडल में अन्ना मवेशियों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या गायों की है। शहर से लेकर गांवों तक अन्ना गायों की बाढ़ आ गई है।
सूखे से जूझ रहे पशुपालकों और किसानों ने इन्हें छुट्टा छोड़ दिया है। भूख से परेशान गायें बाजारों में इधर-उधर मुंह मारती हैं तो लाठी-डंडों की मार सहनी पड़ती है।
सड़कों पर यह ट्रैफिक के लिए खतरा और समस्या बन रही हैं। चारे के लिए भटकती इन गायों को अक्सर जान गंवानी पड़ रही है।
हाल ही में ऐसी ही एक घटना में बांदा रेलवे स्टेशन से चंद कदम दूर केन नदी रेलवे पुल के पास भटक रही एक दर्जन गायें ट्रेन की चपेट में आ गईं। 10 की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गईं।