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सालों से लौटा रहे थे अब घर आकर दिया राशनकार्ड
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 10 Jan 2016 11:20 PM IST
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बांदा/बड़ोखर बुजुर्ग। मुख्य सचिव के दौरे का खौफ
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अफसरों के सिर चढ़कर बोल रहा है। फाइलों में आंकड़े दुरुस्त करने से लेकर
चौपाल वाले गांव तक को सजाने-संवारने का काम दिन-रात चल रहा है। पड़ुई गांव
के ग्रामीणों की बल्ले-बल्ले है। उनकी हर मांग पूरी हो रही है।
मुख्य सचिव आलोक रंजन 13 जनवरी को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से दो घंटे पूर्व दिन में दो बजे बांदा आएंगे। यहां सर्किट हाउस में विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे।
चार बजे मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर नरैनी रोड पर पड़ुई गांव पहुंचेंगे। यहां गांव के विकास कार्यों की हकीकत देखने के बाद ग्रामीणों से चौपाल में चर्चा करेंगे।
रात्रि विश्राम इसी गांव के परिषदीय स्कूल में करेंगे। मुख्य सचिव का कार्यक्रम तय होने के बाद से ही सारे अफसरों ने पड़ुई गांव को संवारने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। रात-दिन अफसरों ने डेरा डाल रखा है।
सड़क, गली, हैंडपंप, स्कूल, बिजली, पानी सब चुस्त दुरुस्त किया गया है। राशनकार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अर्से से भटक रहे ग्रामीणों को घर बैठे योजना का लाभ दिया जा रहा है। लेखपाल, कानूनगो, ग्राम पंचायत सचिव, बीडीओ इत्यादि रात-दिन डेरा डाले हैं।
गांव के गुलाब ने बताया कि राशनकार्ड के लिए महीनों से भटक रहा था। अब सचिव ने खुद बुलाकर कार्ड दे दिया है। ग्राम प्रधान ने 270 और कोटेदार ने 110 राशन कार्ड बांटे हैं।
प्रेमचंद्र का कहना था कि पुष्टाहार की पंजीरी पहली बार मिली है। बबलू ने बताया कि पहली बार गांव की गलियां इतनी साफ की गईं हैं।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन बांटने से कोटेदार ने यह कहकर इनकार कर दिया कि उसे इस योजना का राशन आवंटित नहीं हुआ है।
जिला पूर्ति अधिकारी ने कोटेदार बालकृष्ण शिवहरे को समझा-बुझाकर राजी किया। उधर, मुख्यालय बांदा शहर से पड़ुई गांव तक की सड़क और उसमें बने डिवाडर को साफ-सुथरा और दुरुस्त करने के लिए मजदूर काम कर रहे हैं।
मुख्य सचिव आलोक रंजन 13 जनवरी को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से दो घंटे पूर्व दिन में दो बजे बांदा आएंगे। यहां सर्किट हाउस में विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे।
चार बजे मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर नरैनी रोड पर पड़ुई गांव पहुंचेंगे। यहां गांव के विकास कार्यों की हकीकत देखने के बाद ग्रामीणों से चौपाल में चर्चा करेंगे।
रात्रि विश्राम इसी गांव के परिषदीय स्कूल में करेंगे। मुख्य सचिव का कार्यक्रम तय होने के बाद से ही सारे अफसरों ने पड़ुई गांव को संवारने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। रात-दिन अफसरों ने डेरा डाल रखा है।
सड़क, गली, हैंडपंप, स्कूल, बिजली, पानी सब चुस्त दुरुस्त किया गया है। राशनकार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अर्से से भटक रहे ग्रामीणों को घर बैठे योजना का लाभ दिया जा रहा है। लेखपाल, कानूनगो, ग्राम पंचायत सचिव, बीडीओ इत्यादि रात-दिन डेरा डाले हैं।
गांव के गुलाब ने बताया कि राशनकार्ड के लिए महीनों से भटक रहा था। अब सचिव ने खुद बुलाकर कार्ड दे दिया है। ग्राम प्रधान ने 270 और कोटेदार ने 110 राशन कार्ड बांटे हैं।
प्रेमचंद्र का कहना था कि पुष्टाहार की पंजीरी पहली बार मिली है। बबलू ने बताया कि पहली बार गांव की गलियां इतनी साफ की गईं हैं।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन बांटने से कोटेदार ने यह कहकर इनकार कर दिया कि उसे इस योजना का राशन आवंटित नहीं हुआ है।
जिला पूर्ति अधिकारी ने कोटेदार बालकृष्ण शिवहरे को समझा-बुझाकर राजी किया। उधर, मुख्यालय बांदा शहर से पड़ुई गांव तक की सड़क और उसमें बने डिवाडर को साफ-सुथरा और दुरुस्त करने के लिए मजदूर काम कर रहे हैं।